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मध्य प्रदेश के दतिया जिले के भांडेर कस्बे में मोहर्रम के मौके पर एक बार फिर हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की अनोखी मिसाल देखने को मिली।

Ganga-Jamuni Tehzeeb : मध्य प्रदेश के दतिया जिले के भांडेर कस्बे में मोहर्रम के मौके पर एक बार फिर हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की अनोखी मिसाल देखने को मिली। यहां 37 ताजिया जुलूस मंदिर के सामने रुककर भगवान को सलामी देते हैं और फिर आगे बढ़ते हैं। ताजिया जुलूस जब प्रसिद्ध चतुर्भुज नारायण मंदिर के पास पहुंचा, तो सभी ताजिए वहां रुक गए और परंपरा के अनुसार भगवान को सम्मान स्वरूप सलामी दी गई। यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है।
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इस अवसर पर मंदिर के पुजारियों ने भी ताजियों पर फूल मालाएं चढ़ाकर उनका स्वागत किया। स्थानीय लोगों ने इस दृश्य को भाईचारे और एकता का प्रतीक बताया। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह परंपरा लगभग 200 साल पुरानी है, जिसकी जड़ें उस समय से जुड़ी हैं जब एक मुस्लिम परिवार ने मंदिर की स्थापना और देखरेख में अहम भूमिका निभाई थी।
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भांडेर की यह परंपरा गंगा-जमुनी तहजीब का एक मजबूत उदाहरण मानी जाती है, जहां धार्मिक अलगाव के बजाय आपसी सम्मान और साझी संस्कृति दिखाई देती है। लोगों का कहना है कि यह परंपरा सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक है, जो हर साल मोहर्रम के दौरान दोहराई जाती है और इलाके में सौहार्द का संदेश देती है। दतिया का यह दृश्य दिखाता है कि भारत में कई जगहों पर आज भी धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत और भाईचारा जीवित है, जो समाज को जोड़ने का काम करता है।
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