फेक कॉल्स पर लगेगी लगाम! अब स्क्रीन पर दिखेगा कॉलर का नाम
भारत
चेतना मंच
29 Oct 2025 06:32 PM
देशभर में बढ़ते साइबर फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और बैंकिंग घोटालों पर अब लगाम कसने की तैयारी है। सरकार अब एक ऐसा फीचर शुरू करने जा रही है, जिसके तहत मोबाइल पर कॉल आने से पहले ही कॉलर का वास्तविक नाम दिखेगा। वही नाम, जो उसने मोबाइल कनेक्शन लेते वक्त अपने आईडी प्रूफ में दिया था। इस कदम का मकसद है फर्जी कॉल्स, ठगी और धोखाधड़ी से आम उपभोक्ता को सुरक्षित रखना। Curb Fake Calls :
क्या है यह नया फीचर?
यह सुविधा कालिंग नेम प्रजेन्टेशन (सीएनएपी) के नाम से शुरू की जाएगी। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी आॅफ इंडिया (टीआरएआई) ने इसकी सिफारिश फरवरी 2024 में की थी। शुरुआत में यह फीचर वैकल्पिक रखने का सुझाव था, यानी उपभोक्ता की मांग पर ही यह सर्विस एक्टिव होती। लेकिन बाद में संचार मंत्रालय ने इसे डिफॉल्ट रूप में लागू करने का फैसला किया। अब यह फीचर हर मोबाइल यूजर को अपने आप मिलेगा, और अगर कोई उपभोक्ता यह सेवा नहीं चाहता, तो वह अनुरोध करके इसे बंद करवा सकेगा।
कहां हुआ ट्रायल?
टेलीकॉम कंपनियों ने इस फीचर का मुंबई और हरियाणा सर्किल में सफल ट्रायल किया था। ट्रायल के दौरान यह देखा गया कि कॉलर का नाम दिखने से उपभोक्ताओं ने संदिग्ध कॉल्स को पहचानना आसान पाया। जिन उपभोक्ताओं ने सुविधा ले रखी है, उनका नाम कॉल रिसीव करने वाले के मोबाइल पर नहीं दिखेगा। यह सुविधा सामान्य उपभोक्ताओं के साथ-साथ खुफिया एजेंसियों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और महत्वपूर्ण व्यक्तियों को दी जाती है। हालांकि, कॉल सेंटर, टेलीमार्केटर और बल्क कनेक्शन वाले यूजर्स को इस छूट का लाभ नहीं मिलेगा।
क्यों जरूरी है यह कदम?
भारत में हर महीने लाखों यूजर्स स्पैम कॉल्स, बैंकिंग फ्रॉड्स जैसे फर्जी संदेशों का शिकार बनते हैं। डिजिटल अरेस्ट जैसे नए साइबर अपराधों में स्कैमर्स खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर डराते हैं और पैसे वसूलते हैं। इसलिए, जब मोबाइल स्क्रीन पर कॉल करने वाले का असली नाम दिखेगा, तो उपभोक्ता पहले से ही तय कर सकेगा कि कॉल उठानी है या नहीं। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह फीचर बैंकिंग धोखाधड़ी और डेटा चोरी जैसी घटनाओं को काफी हद तक रोक सकता है। यह ट्रूकॉलर जैसे ऐप्स पर निर्भरता भी घटाएगा, जिनके जरिए कई बार निजी डेटा लीक होने का खतरा रहता है।
स्पैम कॉल्स कैसे पहचानें और बचें?
1. अनजान कॉल्स पर व्यक्तिगत जानकारी न दें।
2. किसी कॉल में नंबर दबाने या वेरिफिकेशन के लिए कहा जाए, तो तुरंत कॉल काटें।
3. यदि कोई व्यक्ति बैंक अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बनकर जानकारी मांगे, तो सीधे संबंधित संस्था के आधिकारिक नंबर पर कॉल करें।
4. किसी भी कॉल या लिंक पर क्लिक करने से पहले सोर्स की वैधता जांचें।
उपभोक्ता की जानकारी कैसे पहुंचती है स्कैमर्स तक?
अक्सर यूजर्स खुद अनजाने में अपना मोबाइल नंबर विभिन्न वेबसाइटों, ऐप्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर साझा कर देते हैं।
कई कंपनियां इन डेटा को थर्ड पार्टी एजेंसियों को बेच देती हैं, जो आगे चलकर इन नंबरों का इस्तेमाल विज्ञापन, स्पैम कॉल्स या फ्रॉड कैंपेन के लिए करती हैं। सरकार का यह कदम डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा सुधार साबित हो सकता है। अगर यह फीचर सही ढंग से लागू हुआ, तो यह न सिर्फ फेक कॉल्स को रोकने में मदद करेगा, बल्कि आम उपभोक्ताओं का साइबर आत्मविश्वास भी बढ़ाएगा।