अंजना भागी
जो शुरू तो कुत्तों से हुई थी, पर ठन गई इंसानों में। खुदा कसम वो खूबसूरत तो बला की थी, पर थी तोतली। अब यह तो कोई उससे बात करने के बाद ही जानेगा न। हुआ यूं कि उसका तोतलापन ही सभी स्यापों की जड़ था। कोई अमीर घराना तोतली से शादी करना नहीं चाहता था, गरीब घराने से वे जोड़ना नहीं चाहते थे।
उम्र 30 को छूने लगी थी, पर लगती बावली बिलकुल 20 की थी। पर, अब कुछ कुंठित होने लगी थी। पब्लिक में बोलने से तो बचती ही थी। शरीर भारी होने लगा। कुछ मोटी सी दिखने लगी तो पापा ने एक दिन डांट लगाई और यहीं से सारा क्लेश शुरू हुआ। गली के कुत्तों से बहुत स्नेह रखती थी, उन्हें खिलाती थी तथा पीने को पानी भी ठंडा फ्रिज का ही देती। अब कुत्ता तो वैसे ही पूरा फेमस वफादार। यहीं से सारा क्लेश शुरू हुआ। तोतली बेटी सुबह 4.30 चार बजे उठकर पार्क में दौड़ने लगी। जब बिटिया दौड़ लगाती, साथ ही पूरे ब्लॉक के कुत्ते भी वफादारी निभाते और तेज तेज दौड़ते। अब ज्ञानी तो थे नहीं, बीच में कभी भी भौंक पड़ते। अब सभी की नींद तो पक्की नहीं होती न, दो घर ही छोड़ नया किरायेदार आया था। कुत्ते का भौंकना सुन उसके तीन साल के बेटे की नींद खुल गई। गुस्से में तमतमाता ये सोच जरूर कोई सीनियर सिटीजन सेहत बनाता होगा, किरायेदार उसको समझाने बाहर दौडा पर अंदर आते ही बच्चे का मुहं चूम लिया। पत्नी सो रही थी। शाम ऑफिस से आते ही उसने पत्नी को मोटा होता पेट दिखाया और सुबह दौड़ लगाने का अपना इरादा भी समझाया। पत्नी भी कामकाजी है, बोली आप जानो।
रात कटी सुबह आई, किरायेदार साहब ने जॉगिंग शूज पहने और निकले दौड़ लगाने। दस कदम भी न दौडा होगा कि बेटा पापा का दीवाना था, जाग गया और नंगे पांव भागा पापा के पीछे। कुत्ते कुछ सेकंड के लिए तो शॉक में आ गए कि हमारी दौड़ में ये कौन और आनन-फानन में चिपक गए बच्चे से। नामुराद बेरहमों ने तीन जगह काटा। एक तो किरायेदार बौखलाया हुआ, ऊपर से सोने पर सुहागा तोतली चिल्लाये जा रही थी। किरायेदार की पत्नी जागे और कुछ गलत समझे, उससे पहले ही किरायेदार ने इतना शोर मचाया कि पूरा ब्लॉक पार्क में अब तोतली की टूटू कौन सुने। किरायेदार का चीखना चिल्लाना रोना सब सुनने और यकीन करने लगे। तोतली बेटी के परिवार ने पूरी समझदारी से काम लिया। तू चुप चुप कुछ नहीं बोलेगी और बेटी अंदर चली गई। अब घमासान चल रहा था डॉग लवर्स में और कुत्तों द्वारा सताये गए लोगों में। कुत्तों को इंसानों की लड़ाई से क्या लेना देना। वो अपना तोतली बेटी के घर के आंगन में घुसकर सो गए।
जुबान से चप्पल-जूते, जब लाठी आई तो पुलिस बुला ली गई। दोपहर 12 बजे तक पूरे सेक्टर में हाहाकार। कुत्तों की भी नींद बार बार टूट रही थी अधिक शोर से, पर फिर भी वो दोपहर भोजन के जुगाड़ में निकले और किरायेदार के दरवाजे पर पहुंच गए। तब तक बच्चा इलाज करवा कुत्तों वाला टीका लगवा घर में घुसा ही था कि बच्चा दहशत में फिर चिल्लाने लगा। बच्चे की मम्मी बहुत रेसोर्सफुल फैमिली से है। मामला फिर उतना ही ताजा हो गया। बात एसीपी पुलिस नोएडा के सभी आला अधिकारियों तक पहुंची। एसपीसीए की गाड़ी आयी कुत्तों को उठाने, पर उठाने वालों ने कहा, ये तो सेनिटाइज्ड हैं, ये तो नहीं जाएंगे। इस रिसोर्सफुल कलह को खत्म करने को नोएडा अथॉरिटी के आला ऑफिसर्स ने बिहेवियरल चेंज थेरेपी वाली संस्था से गाड़ी भिजवाई। कुत्ते 10 दिन को चले गए, चारों और शान्ति। मैडम स्वयं छोड़ने आईं कुत्तों को, चलते वक्त बाई-बाई भी की। पूरे नोएडा में इस किस्से का शोर था।
कुत्ते भेड़ियों की प्रजाति आते ही पहले साथ के ब्लॉक के कुत्तों से खूब लड़ भिड़कर आये। फिर जैसे ही उन्होंने देखा कि उनके विश्राम की जगह पर कोई बाइक लगा गया और अब वो हंस-हंस के फोन पर बातें भी कर रहा है। बस वहीं उस नासमझ की टांग को जा चबाया। यह कोई कहानी नहीं आपबीती है हर सेक्टर की। स्टर्लाइज्ड कुत्तिया बच्चे दे रही है। नोएडा में कुत्तों का स्टरलाइजेशन आज नहीं बरसों से चल रहा है। कुत्तों का चबा जाना भी रोज जारी है। सुरक्षा के लिए सेक्टर, ब्लॉक्स गेटेड बनाये जाते हैं, कुत्ते उसे अपनी टेरिटरी मान लेते हैं। कोई बेचारा किसी भी काम से जाए, ये वफादार, ड्यूटीफुल उन्हें चबा जाते हैं। आज हर सेक्टर ब्लॉक का ये हाल बन गया है। यानी इंसानों के साथ आज तक रह कर पलने वाला यह प्राणी जी का जंजाल बन गया है। फिर वही दौड़ आरडब्ल्यूए से फोनरवा, फिर नोएडा प्राधिकरण, तब भी समस्या का समाधान न हो तो? दस्ताने कुत्ते क्या यूं ही चलती रहेंगी।