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बिहार की राजनीति में एक नया संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र और वर्तमान मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है।

Bihar News : बिहार की राजनीति में एक नया संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र और वर्तमान मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि बिना किसी विधायिका (विधायक या एमएलसी) के सदस्य बने लगातार मंत्री बने रहना संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है। याचिका में 2001 के सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले का हवाला देते हुए दीपक प्रकाश की नियुक्ति को असंवैधानिक घोषित करने और उन्हें पद से हटाने की मांग की गई है। Bihar News
संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार कोई भी गैर-विधायक अधिकतम छह माह तक मंत्री पद पर रह सकता है, और इस अवधि के भीतर उसे किसी सदन का सदस्य बनना आवश्यक होता है। याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह का दावा है कि दीपक प्रकाश इस संवैधानिक सीमा को पूरा नहीं कर पाए हैं, इसके बावजूद उन्हें दोबारा मंत्री बनाया गया, जो सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों की भावना के विपरीत है।जानकारी के अनुसार दीपक प्रकाश पहले भी नीतीश कुमार सरकार में मंत्री रह चुके हैं। उस दौरान उनका कार्यकाल नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 तक बताया जाता है। आरोप है कि उस समय भी वह किसी विधायिका सदन के सदस्य नहीं बन पाए थे और सरकार में बदलाव के चलते उनका पहला कार्यकाल बीच में समाप्त हो गया था। इसके बाद हालिया राजनीतिक पुनर्गठन में उन्हें एक बार फिर मंत्री पद दिया गया, जिससे विवाद और गहरा गया है। Bihar News
याचिका में सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशों वाली पीठ (जस्टिस आर. सी. लाहोटी और जस्टिस के. जी. बालकृष्णन) के वर्ष 2001 के फैसले को आधार बनाया गया है। उस फैसले में स्पष्ट कहा गया था कि यदि कोई व्यक्ति मंत्री बनने के बाद छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं बनता और बाद में इस्तीफा देकर या सरकार बदलने के बाद फिर से मंत्री बना दिया जाता है, तो यह प्रक्रिया संविधान की मूल भावना के खिलाफ मानी जाएगी। याचिकाकर्ता ने पंजाब के एक पुराने मामले का भी उल्लेख किया है, जिसमें एक गैर-विधायक को इस्तीफा देने के बाद दोबारा मंत्री बनाए जाने को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया था। Bihar News
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