हाल ही में मौसम में बदलाव और बारिश के कारण फसलों पर कीटों का प्रकोप बढ़ गया है। इन कीटों से निपटने के लिए किसानों को महंगी दवाइयों का इस्तेमाल करना पड़ता है, जो उनकी लागत को बढ़ा देता है। लेकिन अब एक सस्ता और असरदार समाधान सामने आया है—स्टिकी ट्रैप।

बता दे कि कृषि वैज्ञानिक के अनुसार, स्टिकी ट्रैप एक ऐसी यांत्रिक विधि है, जो कम खर्च में फसलों को कीटों से बचाने का काम करती है। ये ट्रैप किसानों को दवाइयों से बचाते हैं और बंपर उत्पादन में मदद करते हैं। स्टिकी ट्रैप को खेतों में फसलों के ऊपर टांगने से कीट चिपक जाते हैं, जिससे फसलों पर कीटों का नियंत्रण किया जा सकता है।
बता दे कि स्टिकी ट्रैप के विभिन्न रंग अलग-अलग प्रकार के कीटों को आकर्षित करते हैं जैसे पीला (Yellow Sticky Trap): यह एफिड (माहू) जैसे कीटों के नियंत्रण में मदद करता है, जो सरसों और मटर जैसी फसलों के लिए हानिकारक होते हैं। नीला (Blue Sticky Trap): यह थ्रिप्स कीट को आकर्षित करता है, जो खासकर मिर्च और अन्य सब्जियों में पाए जाते हैं। लाल और काला (Red & Black Sticky Trap): यह लीफ माइनर और शिकाडा जैसे कीटों को नियंत्रित करने में कारगर होते हैं।
बता दें कि किसान स्टिकी ट्रैप को बाजार से 25 से 30 रुपये में खरीद सकते हैं, लेकिन इसे घर पर भी आसानी से बनाया जा सकता है। इसके लिए एक्स-रे की प्लेट, तेल के टिन या अन्य सामग्री का उपयोग कर रंगीन ग्रीस या तेल लगाया जा सकता है। इसे खेतों में फसलों के ऊपर लटका देने से कीट चिपकते हैं, और बिना दवाइयों के फसलों का बचाव होता है।
बता दें कि एक एकड़ में 8 से 10 स्टिकी ट्रैप लगाने से कीटों का नियंत्रण किया जा सकता है। यदि अधिक कीटों का प्रकोप हो, तो ट्रैप की संख्या बढ़ाकर 20 तक किया जा सकता है।
बता दें कि मौसम में हो रहे बदलाव के कारण कीटों का प्रकोप ज्यादा हो सकता है। अगर समय रहते इनका नियंत्रण नहीं किया गया तो फसलें बर्बाद हो सकती हैं। स्टिकी ट्रैप इस समस्या का सस्ता और प्रभावी समाधान साबित हो सकता है।