पटेलनगर थाना क्षेत्र की एक मुस्लिम महिला ने अपने पति पर पहले तीन तलाक देने, मारपीट करने और फिर दोबारा वैवाहिक जीवन शुरू करने के लिए कथित तौर पर ऐसी शर्त रखने का आरोप लगाया है, जिसे लेकर महिला ने पुलिस की शरण ली।

National News : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से सामने आया ट्रिपल तलाक और कथित निकाह हलाला का मामला गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पटेलनगर थाना क्षेत्र की एक मुस्लिम महिला ने अपने पति पर पहले तीन तलाक देने, मारपीट करने और फिर दोबारा वैवाहिक जीवन शुरू करने के लिए कथित तौर पर ऐसी शर्त रखने का आरोप लगाया है, जिसे लेकर महिला ने पुलिस की शरण ली। महिला का आरोप है कि पति ने उससे कहा कि यदि वह दोबारा उसके साथ रहना चाहती है तो पहले उसे अपने बहनोई के साथ हलाला की प्रक्रिया से गुजरना होगा। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी पति फरमान को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। महिला ने अपनी शिकायत के साथ पति द्वारा भेजे गए मोबाइल संदेशों समेत अन्य साक्ष्य भी पुलिस को सौंपे हैं और मामले की निष्पक्ष जांच तथा अपनी सुरक्षा की मांग की है। National News
शिकायतकर्ता महिला के अनुसार उसकी शादी करीब ढाई वर्ष पहले बिजनौर जिले के किरतपुर थाना क्षेत्र के इस्लामपुर साहनी निवासी फरमान पुत्र जबर के साथ हुई थी। शादी के बाद उसका पति उसे देहरादून ले आया था, जहां दोनों किराए के मकान में रहने लगे। महिला का आरोप है कि वैवाहिक जीवन के दौरान उसके साथ विवाद और मारपीट की घटनाएं हुईं। करीब चार महीने पहले उसके पति ने उसे कथित तौर पर तीन तलाक दे दिया। महिला के मुताबिक उस समय पति की बहन भी वहां मौजूद थी। तीन तलाक के बाद महिला अपने मायके चली गई। हालांकि, महिला का कहना है कि वह अपना वैवाहिक जीवन खत्म नहीं करना चाहती थी। इसी उम्मीद में उसने पति और ससुराल वालों के साथ दोबारा घर बसाने की कोशिश की। National News
महिला के मुताबिक 14 जुलाई को वह अपने पति के गांव स्थित घर पहुंची थी। उसका कहना है कि उसने पति और ससुराल वालों से उसे दोबारा स्वीकार करने की गुहार लगाई, लेकिन वहां उसके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और फिर उसे घर से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद महिला वापस देहरादून लौट आई और अपनी बहनों के साथ रहने लगी। महिला का आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद भी वह मानसिक रूप से परेशान रही और वैवाहिक संबंध को लेकर समाधान की उम्मीद करती रही। National News
मामले में सबसे गंभीर आरोप इसके बाद सामने आया। महिला के अनुसार कुछ समय बाद उसका पति देहरादून आया। उसने कथित तौर पर माफी मांगते हुए फिर से साथ रहने की बात कही, लेकिन इसके साथ एक शर्त भी रख दी। महिला का आरोप है कि पति ने कहा कि दोबारा उसे पत्नी के रूप में स्वीकार करने से पहले उसे अपने बहनोई के साथ कथित तौर पर हलाला की प्रक्रिया से गुजरना होगा। महिला ने इस शर्त का विरोध किया। महिला का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर उस पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा था। इसके बाद उसने पुलिस में लिखित शिकायत देकर पति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। National News
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी पति फरमान को गिरफ्तार कर लिया है। महिला ने पुलिस को मोबाइल संदेश और अन्य सामग्री भी उपलब्ध कराई है। अब पुलिस इन साक्ष्यों की जांच के साथ ही शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता की पड़ताल कर रही है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें केवल कथित तीन तलाक ही नहीं, बल्कि महिला को दोबारा वैवाहिक जीवन में स्वीकार करने के लिए कथित तौर पर ‘हलाला’ की शर्त रखने का आरोप भी सामने आया है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
भारत में तत्काल तीन तलाक की प्रथा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 2017 के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) कानून, 2019 बनाया था। ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस और अदालत की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए देहरादून का यह मामला केवल एक पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि महिला के कानूनी अधिकारों, वैवाहिक गरिमा और कानून के संरक्षण से जुड़े सवाल भी सामने ला रहा है। National News
शिकायतकर्ता महिला ने पुलिस से अपनी सुरक्षा की मांग करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है। उसने कथित तौर पर भेजे गए संदेशों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करने का भी अनुरोध किया है। अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि महिला द्वारा लगाए गए आरोपों के पीछे वास्तविक घटनाक्रम क्या था, तीन तलाक किस परिस्थिति में दिया गया और कथित हलाला की शर्त को लेकर पति की भूमिका क्या रही। चेतना मंच की टिप्पणी: इस मामले में सामने आए आरोप बेहद गंभीर हैं। हालांकि, खबर में वर्णित आरोप शिकायतकर्ता महिला के बयान और उपलब्ध रिपोर्ट पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच एजेंसियों और न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही मानी जाएगी। National News
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