कुबेर : धन के देवता जिनकी उपासना के बिना अधूरा है धनतेरस
भारत
RP Raghuvanshi
28 Nov 2025 06:10 PM
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28 Nov 2025 06:10 PM
धनतेरस हिन्दू धर्म में दिवाली के पांच दिवसीय पर्व की शुरुआत का प्रतीक है। इसे धन और समृद्धि का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन विशेष रूप से धन के देवता भगवान कुबेर और धात्री देवी (धातु और आभूषणों की देवी) की पूजा की जाती है। हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार दीपावली है और उसकी शुरुआत धनतेरस से ही होती है। इस दिन लोग पूजा के साथ-साथ सामान और गहने आदि की खरीदारी करके अपने परिवार के कल्याण की कामना करते हैं। Dhanteras Festival :
कौन हैं भगवान कुबेर?
* भगवान कुबेर को धन और वैभव का देवता माना जाता है।
* वे अय्यर (कुबेर का निवास स्थान) में रहते हैं और स्वर्गलोक के खजानों के रखवाले माने जाते हैं।
* कुबेर की पूजा करने से घर में धन, संपत्ति और समृद्धि बनी रहती है।
* वे भगवान शिव के वंशज, यक्षों के राजा और दुर्योधन के समय के प्रमुख खजांची के रूप में भी वर्णित हैं।
धनतेरस पर कुबेर की पूजा क्यों आवश्यक है?
1. धन और सुख-समृद्धि का आशीवार्द:
धनतेरस पर कुबेर की पूजा करने से घर में वित्तीय स्थिरता और संपत्ति की वृद्धि होती है।
2. सौभाग्य और सफलता:
इस दिन खासकर सोने-चांदी, आभूषण और धन संबंधित सामान खरीदे जाते हैं। मान्यता है कि कुबेर की कृपा से खरीदी हुई वस्तुएँ लंबे समय तक लाभ और खुशहाली देती हैं।
3. अधूरा न रहे त्योहार:
बिना कुबेर पूजन के धनतेरस का पर्व अधूरा माना जाता है। इसलिए व्यापारियों और घरों में धन की देवी लक्ष्मी और कुबेर की पूजा अनिवार्य रूप से की जाती है।
धनतेरस पूजा की मुख्य बातें:
* घर के पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखें।
* सोने-चांदी या नई वस्तुएँ इस दिन खरीदें।
* कुबेर जी और लक्ष्मी माता की पूजा में सिंदूर, रोली, फूल और मिठाइयाँ अर्पित करें।
* दिन के अंत में दीपक जलाकर धन और समृद्धि का स्वागत करें।