केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों के लंबे आंदोलन के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया। करीब 50 दिनों तक चले देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया।

Dharmendra Pradhan : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों के लंबे आंदोलन के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया। करीब 50 दिनों तक चले देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। प्रधान ने यह भी कहा कि कुछ लोग भ्रम फैलाकर इस स्थिति का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे थे, जिसे रोकने के लिए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया। Dharmendra Pradhan
57 वर्षीय धर्मेंद्र प्रधान पिछले कुछ वर्षों में भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख रणनीतिक नेताओं में शामिल रहे हैं। संगठन क्षमता, राजनीतिक प्रबंधन और सरकार में अहम जिम्मेदारियां संभालने के कारण उन्हें भाजपा के भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता रहा है। ओडिशा से आने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। लेकिन उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि जिस मुद्दे यानी पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता के खिलाफ आंदोलन से उनकी राजनीति को पहचान मिली थी, वर्षों बाद उसी तरह के विवाद ने उन्हें शिक्षा मंत्री का पद छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। Dharmendra Pradhan
धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक सफर की शुरुआत साल 1997 में हुई थी। उस समय ओडिशा में कांग्रेस की सरकार थी और जानकी वल्लभ पटनायक मुख्यमंत्री थे। राज्य में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक का मामला बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका था। उस समय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राष्ट्रीय सचिव रहे 28 वर्षीय धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों को एकजुट कर इस मामले के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया था। उत्कल विश्वविद्यालय से मानव विज्ञान (एंथ्रोपोलॉजी) की पढ़ाई कर रहे प्रधान के नेतृत्व में करीब 1500 छात्रों ने भुवनेश्वर स्थित राज्य सचिवालय का घेराव किया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच टकराव हुआ। पुलिस लाठीचार्ज में धर्मेंद्र प्रधान गंभीर रूप से घायल हुए थे। उनके साथियों के मुताबिक, उन्हें कई चोटें आई थीं और शरीर की हड्डियां तक टूट गई थीं। उनके पुराने सहयोगी और वर्तमान में आरएमडी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य प्रशांत राउत ने उस घटना को याद करते हुए कहा था कि उस आंदोलन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान को पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। यह घटना उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। Dharmendra Pradhan
धर्मेंद्र प्रधान ने महज 18 वर्ष की उम्र में छात्र राजनीति में कदम रखा था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े छात्र संगठन ABVP में उन्होंने एक सक्रिय कार्यकर्ता और कुशल संगठनकर्ता के रूप में पहचान बनाई। साल 1994 से 1997 के बीच वह दो बार ABVP के राष्ट्रीय सचिव रहे। 1997 के आंदोलन के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय राजनीति शुरू की। संगठन को मजबूत करने की उनकी क्षमता के चलते वह धीरे-धीरे पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए। ओडिशा में भाजपा के विस्तार में भी उनकी अहम भूमिका मानी गई। साल 2024 में भाजपा ने ओडिशा में पहली बार सरकार बनाई और नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली बीजू जनता दल की 24 साल पुरानी सत्ता का अंत किया। केंद्र सरकार में धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले। साल 2021 में उन्हें देश का शिक्षा मंत्री बनाया गया। Dharmendra Pradhan
NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। छात्र परीक्षा प्रणाली में सुधार और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
दिल्ली के जंतर-मंतर समेत कई स्थानों पर चले आंदोलन के बीच शिक्षा मंत्रालय पर दबाव बढ़ता गया। आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने चार दशक से अधिक समय तक छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था के लिए काम किया है। उन्होंने शिक्षा मंत्री के रूप में काम करने का अवसर देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया।
उन्होंने NEET-UG परीक्षा में सामने आई गड़बड़ियों को गंभीर मामला बताया और कहा कि किसी भी योग्य छात्र के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। प्रधान ने कहा कि उनका प्रयास हमेशा यही रहा कि परीक्षा माफिया की वजह से किसी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति ही देश की सबसे बड़ी ताकत है। Dharmendra Pradhan
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