अपने ही बैंक के 34 हजार करोड़ रूपए खा गया बैंक का निदेशक, सबसे बड़ा बैंक घोटाला
DHFL Fraud
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 01:40 PM
DHFL Fraud : दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड यानि की DHFL यह नाम आपने जरूर सुना होगा। कुछ साल पहले तक DHFL अच्छी कंपनी हुआ करती थी। फाइनेंस के क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण DHFL को लोग एक बैंक की तरह भी जानते हैं। रातोंरात अमीर बनने के चक्कर में DHFL का मालिक धीरज वधावन पूरे बैंक को ही खा गया। धीरज वधावन तथा उसके भाई ने पूरे 34 हजार करोड़ रूपए खाए हैं। मंगलवार को DHFL के निदेशक को गिरफ्तार करके दिल्ली की तिहाड़ जेल में भेजा गया है।
CBI ने पकड़ा DHFL के मालिक को
केन्द्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एक टीम ने DHFL के निदेशक धीरज वधावन को मुंबई से दबोच लिया है। मंगलवार को इस सबसे बड़े बैंक के घोटालेबाज को दिल्ली की एक अदालत ने जेल भेज दिया है। अदालत ने भी माना है कि DHFL के मालिकों ने सबसे बड़ा बैंक घोटाला किया है। पूरे 34 हजार करोड़ रूपए इस घोटाले की भेंट चढ़ गए हैं।
इससे पहले CBI ने वधावन को यस बैंक से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में हिरासत में लिया था। हालांकि, बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था। CBI के अफसरों ने बताया है कि DHFL मामले में कंपनी के पूर्व डायरेक्टर और उनके भाई कपिल को 19 जुलाई 2022 को भी गिरफ्तार किया गया था। 15 अक्टूबर 2022 को कपिल और धीरज समेत 75 संस्थाओं के विरुद्ध आरोप-पत्र दायर किए गए थे। अफसरों के अनुसार स्पेशल कोर्ट ने 3 दिसंबर 2022 को उन्हें जमानत दे दी थी। कोर्ट ने कहा था कि जांच अधूरी है। साथ ही आरोप-पत्र टुकड़ों में है। इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था। अभी धीरज वधावन और उनके भाई कपिल वधावन और अजय नवांदर न्यायिक हिरासत में हैं। फरवरी 2021 में सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने पूर्व DHFL प्रमोटरों, धीरज और कपिल वधावन के बैंक अकाउंट, शेयर और म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स को कुर्क करने का आदेश जारी किया था। SEBI ने यह आदेश डिस्कोजर नियमों का पालन न करने की वजह से उन पर लगाए जुर्माने को चुकाने में नाकामयाब रहने पर किया था।
यूं हुआ था DHFL का घोटाला
यह मामला 17 बैंकों के एक कंसोर्टियम (संघ) के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है। इसे देश में सबसे बड़ा बैंकिंग लोन स्कैम बताया जा रहा है। साल 2010 से आरोपी फर्मों ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले 17 बैंकों के कंसोर्टियम से लोन लेना शुरू किया था। विभिन्न तारीखों में लोन को नॉन परफॉर्मिंग असेट्स (NPA) घोषित किया गया था। फंड के डायवर्जन, राउंड ट्रिपिंग और फंड की हेरा-फेरी के आरोपों पर रिपोर्ट्स आने के बाद जांच शुरू हुई थी। फिर 1 फरवरी 2019 को कर्जदाता बैंकों ने बैठक की थी। 1 अप्रैल 2015 से 31 दिसंबर 2018 तक KPMG को DHFL के स्पेशल रिव्यू ऑडिट करने को नियुक्त किया गया था। बैंकों ने 18 अक्टूबर 2019 को कपिल और धीरज वाधावन के विरुद्ध लुक आउट सर्कुलर जारी करने की मांग की थी, जिससे वो देश छोड़कर नहीं जा सके। ऑडिट में कपिल और धीरज द्वारा किए गए फंड डायवर्जन, फंड की राउंड ट्रिपिंग और अन्य अनियमितताएं सामने आई थीं। इस मामले में CBI ने 2 साल पहले मुंबई में 12 जगहों पर छापेमारी की थी। CBI ने DHFL, कपिल वाधवान, धीरज वाधवान, सुधाकर शेट्टी, दर्शन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, सिगटिया कंस्ट्रक्शन बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड, टाउनशिप डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, शिशिर रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड, सनब्लिंक रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, स्काईलार्क बिल्डकॉन प्रा. लिमिटेड और अन्य को आरोपी बनाया था। CBI के अनुसार साल 2018 के अप्रैल और जून के बीच यस बैंक ने DHFL के शॉर्ट टर्म डिबेंचर में 3700 करोड़ रुपए निवेश किया था। इसके एवज में वधावन ने कथित तौर पर डीओआईटी अर्बन वेंचर्स को 600 करोड़ रुपए का लोन दिया था। CBI का कहना है कि यह लोन नहीं रिश्वत थी। इन वेंचर्स पर कपूर की पत्नी और बेटियों का पूरा कंट्रोल था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बताया कि DHFL ने लेन-देन को कवर करने को 40 करोड़ रुपए की संपत्तियों के बदले 600 करोड़ रुपए का लोन दिया था।