विज्ञापन
जनगणना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें देश के हर व्यक्ति से जुड़ी जरूरी जानकारी जुटाई जाती है। इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, उम्र, पढ़ाई, नौकरी, रहने की स्थिति और दूसरी सामाजिक जानकारी शामिल होती है। यह काम भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत किया जाता है।

भारत जैसे विशाल देश को सही तरीके से समझने के लिए यह जानना बेहद जरूरी होता है कि यहां कितने लोग रहते हैं, उनकी शिक्षा क्या है, वे किस क्षेत्र में रहते हैं और उनकी जरूरतें क्या हैं इसी काम को पूरा करती है जनगणना। यह सिर्फ लोगों की गिनती भर नहीं होती बल्कि देश की योजनाओं और भविष्य की दिशा तय करने का एक बड़ा आधार होती है। करीब 16 साल बाद भारत में फिर से जनगणना की प्रक्रिया शुरू हुई है। पिछली बार यह काम साल 2011 में हुआ था। आमतौर पर जनगणना हर 10 साल में कराई जाती है लेकिन कोरोना महामारी और कई प्रशासनिक कारणों की वजह से इसमें देरी हुई। अब 2026-27 की जनगणना को लेकर तैयारियां तेज हो चुकी हैं और इस बार इसमें कई बड़े बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं।
जनगणना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें देश के हर व्यक्ति से जुड़ी जरूरी जानकारी जुटाई जाती है। इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, उम्र, पढ़ाई, नौकरी, रहने की स्थिति और दूसरी सामाजिक जानकारी शामिल होती है। यह काम भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत किया जाता है। सरकार इन आंकड़ों के आधार पर नई योजनाएं बनाती है। स्कूल, अस्पताल, सड़क, पानी, बिजली और रोजगार जैसी सुविधाओं की जरूरत कहां ज्यादा है इसका अंदाजा भी जनगणना के आंकड़ों से लगाया जाता है। यही वजह है कि इसे किसी भी देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया माना जाता है।
इस बार की जनगणना पहले से काफी अलग होने वाली है। पहले जहां कर्मचारी कागजों पर जानकारी लिखते थे, वहीं अब डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। गणना करने वाले कर्मचारी मोबाइल ऐप और ऑनलाइन सिस्टम की मदद से सीधे डेटा दर्ज करेंगे। इससे गलतियों की संभावना कम होगी और काम भी तेजी से पूरा हो सकेगा। सरकार ने इसके लिए एक खास डिजिटल सिस्टम भी तैयार किया है जिसे जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMS) कहा जा रहा है। इसके जरिए अधिकारी पूरे काम पर नजर रख सकेंगे और किसी भी समस्या को जल्दी ठीक किया जा सकेगा।
2026-27 की जनगणना की सबसे खास बात यह है कि इस बार लोग खुद भी अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकेंगे। सरकार ने Self-Enumeration (स्व-गणना) की सुविधा शुरू की है। लोग आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपनी पसंद की भाषा चुन सकते हैं और परिवार की जानकारी खुद दर्ज कर सकते हैं। जानकारी जमा करने के बाद उन्हें एक यूनिक SE ID मिलेगी जिसे बाद में आने वाले प्रगणक को दिखाना होगा। इससे प्रक्रिया और ज्यादा आसान और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।
इस बार की जनगणना में जातिगत आंकड़ों को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है। लंबे समय से इसकी मांग की जा रही थी और अब सरकार व्यापक स्तर पर जातिगत डेटा जुटाने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि इससे सामाजिक योजनाओं और आरक्षण से जुड़ी नीतियों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी।
जनगणना का काम कई चरणों में पूरा होता है। सबसे पहले घरों की सूची तैयार की जाती है। इसके बाद प्रशिक्षित कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों से जानकारी लेते हैं। इस बार मोबाइल ऐप और डिजिटल पोर्टल की वजह से डेटा सीधे ऑनलाइन दर्ज होगा। जानकारी जुटाने के बाद उसका वेरिफिकेशन किया जाता है और फिर विशेषज्ञ उसके आधार पर रिपोर्ट तैयार करते हैं। आखिर में यही रिपोर्ट सरकार और आम जनता के सामने जारी की जाती है।
जब इतनी बड़ी प्रक्रिया होती है तो इसके लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों की जरूरत भी पड़ती है। यही वजह है कि जनगणना के दौरान अलग-अलग तरह की नौकरियां निकलती हैं। इस बार डिजिटल सिस्टम आने की वजह से तकनीकी पदों की मांग पहले से ज्यादा बढ़ गई है।
जनगणना में सबसे ज्यादा जरूरत एन्यूमरेटर की होती है। यही वे लोग होते हैं जो घर-घर जाकर जानकारी जुटाते हैं। इस बार उन्हें मोबाइल ऐप के जरिए डेटा भरना होगा। अक्सर स्थानीय शिक्षक, आंगनवाड़ी कर्मचारी और कॉन्ट्रैक्ट पर युवाओं को इस काम के लिए मौका दिया जाता है। कई राज्यों में जिला स्तर पर इसकी भर्ती प्रक्रिया अलग-अलग तरीके से की जाती है।
हर कुछ एन्यूमरेटर के ऊपर एक सुपरवाइजर नियुक्त किया जाता है। इनका काम यह देखना होता है कि डेटा सही तरीके से भरा जा रहा है या नहीं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि काम समय पर पूरा हो।
इस बार तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत काफी ज्यादा बढ़ी है। टेक्निकल असिस्टेंट का काम कर्मचारियों को ऐप और डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल में मदद करना होता है। अगर कहीं तकनीकी दिक्कत आती है तो उसे ठीक करना भी इन्हीं की जिम्मेदारी होती है। इसके अलावा डेटा एंट्री ऑपरेटर की भी जरूरत पड़ती है खासकर उन जगहों पर जहां ऑनलाइन जानकारी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो पाती। वहीं जिला कार्यालयों में मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS) की भी भर्ती की जाती है।
जनगणना के दौरान सिर्फ फील्ड स्टाफ ही नहीं बल्कि बड़े प्रशासनिक पदों पर भी नियुक्तियां होती हैं। भारतीय महापंजीयक कार्यालय और राज्यों के जनगणना निदेशालय समय-समय पर भर्ती निकालते हैं। रिसर्च एसोसिएट जैसे पदों पर सांख्यिकी और अर्थशास्त्र की जानकारी रखने वाले लोगों को मौका मिलता है। वहीं अनुभवी रिटायर्ड कर्मचारियों को कंसल्टेंट के तौर पर भी रखा जाता है।
जो लोग जनगणना से जुड़ी नौकरी करना चाहते हैं उन्हें सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा राज्य सरकारों के जनसंपर्क विभाग, जिला कलेक्ट्रेट की वेबसाइट और स्थानीय भर्ती विज्ञापनों में भी जानकारी जारी की जाती है। डिजिटल जनगणना की वजह से इस बार युवाओं के लिए तकनीकी और प्रशासनिक दोनों क्षेत्रों में अच्छे अवसर बनने की उम्मीद है।
इस बार की जनगणना सिर्फ एक सरकारी प्रक्रिया नहीं मानी जा रही बल्कि इसे भारत के डिजिटल बदलाव का बड़ा कदम भी कहा जा रहा है। ऑनलाइन सिस्टम, मोबाइल ऐप और Self-Enumeration जैसी सुविधाओं से यह पहले से ज्यादा तेज और आधुनिक बनने जा रही है। साथ ही इससे सरकार को देश की असली जरूरतों को समझने में मदद मिलेगी जिससे आने वाले वर्षों की योजनाएं और बेहतर बनाई जा सकेंगी।
विज्ञापन