अब मुफ्त नहीं रहेगा UPI! आरबीआई गवर्नर के बयान से बढ़ी हलचल, ट्रांजेक्शन पर लग सकता है चार्ज
भारत
RP Raghuvanshi
07 Aug 2025 03:00 PM
भारत
RP Raghuvanshi
07 Aug 2025 03:00 PM
डिजिटल लेनदेन की दुनिया में भारत की सबसे बड़ी ताकत माने जाने वाले यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) को लेकर अब एक बड़ा संकेत सामने आया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि UPI सेवा हमेशा मुफ्त नहीं रह सकती। उनके इस बयान ने आम उपभोक्ताओं से लेकर व्यापारिक वर्ग तक को चिंता में डाल दिया है।
गवर्नर मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद प्रेस वार्ता में कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली को सुचारु और टिकाऊ बनाए रखने के लिए इसकी लागत को वहन करना आवश्यक है। उनके अनुसार, "UPI ट्रांजेक्शन में लागत आती है और इस लागत का भुगतान किसी-न-किसी को करना ही होगा।" Digital Transactions :
UPI सेवा के उपयोग पर लगाया जा सकता है शुल्क
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत UPI के जरिए दुनिया में सबसे ज्यादा डिजिटल लेनदेन करने वाला देश बन चुका है। IMF की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर 60% और भारत में 85% डिजिटल ट्रांजेक्शन UPI के माध्यम से हो रहे हैं। जून 2025 में UPI से 18.39 अरब ट्रांजेक्शन हुए, जिनकी कुल राशि 24 लाख करोड़ रुपये से अधिक थी।
गवर्नर का यह बयान एक स्पष्ट संकेत है कि आने वाले समय में UPI सेवा के उपयोग पर शुल्क लगाया जा सकता है। हाल ही में मीडिया में आई रिपोर्ट्स के अनुसार, ICICI बैंक ने 1 अगस्त 2025 से कुछ पेमेंट एग्रीगेटर्स पर UPI ट्रांजेक्शन के लिए शुल्क लागू कर दिया है। हालांकि बैंक ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन बताया जा रहा है कि जून के अंतिम सप्ताह में संबंधित संस्थाओं को इसकी जानकारी दी गई थी।
प्रभाव किस पर पड़ेगा, ग्राहक या व्यापारी?
इस मुद्दे पर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है कि शुल्क ग्राहकों से वसूला जाएगा या व्यापारियों से। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि यदि शुल्क लागू होता है, तो यह व्यापारी यानी मर्चेंट को देना होगा, खासकर तब जब लेनदेन एक निश्चित सीमा से अधिक हो। यूपीआई की शुरुआत एनपीसीआई ने कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की थी। इसकी सफलता ने नकद लेनदेन को काफी हद तक कम कर दिया है। लेकिन यदि UPI पर शुल्क लगाया जाता है, तो यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि लोग एक बार फिर नकद लेनदेन की ओर रुख कर सकते हैं। आरबीआई गवर्नर के इस बयान ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या डिजिटल इंडिया की नींव कहे जाने वाले यूपीआई को मुफ्त रखना संभव है? या अब डिजिटल क्रांति की कीमत आम जनता को चुकानी होगी? सरकार और बैंकिंग सेक्टर को इस पर संतुलित नीति बनानी होगी ताकि नवाचार और समावेशिता दोनों को बनाए रखा जा सके।