क्या 5 अगस्त को फिर कुछ बड़ा करेगा केंद्र? उमर अब्दुल्ला के ट्वीट से सियासी हलचल तेज
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 11:16 PM
Discussion-E-Date : जम्मू-कश्मीर को लेकर एक बार फिर 5 अगस्त की तारीख चर्चा में है। बीते वर्षों में यही तारीख कई बड़े फैसलों की गवाह रही है, और यही वजह है कि इस बार भी अटकलों का बाजार गर्म है कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर को लेकर फिर कोई अहम कदम उठा सकती है। आखिर उमर अब्दुल्ला ने अपने ट्वीट में ऐसा क्या कहा जो जिसकी इतनी चर्चा चल रही है।
उमर अब्दुल्ला के ट्वीट से चचार्एं तेज
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के एक ट्वीट ने इस सियासी सरगर्मी को और हवा दे दी है। उन्होंने लिखा कि "मैंने कल जम्मू-कश्मीर में क्या हो सकता है, इसको लेकर हर तरह की संभावनाएं और कयास सुन लिए हैं। ईमानदारी से कहूं तो मुझे नहीं लगता कि कल कुछ होगा। सौभाग्य से कुछ बुरा नहीं होगा, लेकिन दुर्भाग्य से कुछ अच्छा भी नहीं होगा। हालांकि मैं अब भी संसद के मौजूदा मानसून सत्र में जम्मू-कश्मीर के लिए किसी सकारात्मक पहल की उम्मीद रखता हूं लेकिन कल नहीं। और नहीं, मेरी दिल्ली में किसी से कोई मुलाकात या बातचीत नहीं हुई है। यह बस एक आंतरिक भावना है। देखते हैं कल क्या होता है।" इस ट्वीट के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा और तेज हो गई है कि आखिर उमर अब्दुल्ला किस "संभावना" की ओर इशारा कर रहे हैं।
क्यों अहम है 5 अगस्त?
गौरतलब है कि 5 अगस्त की तारीख पहले भी कई ऐतिहासिक निर्णयों से जुड़ी रही है। 2019 में इसी दिन जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया। राम मंदिर शिलान्यास भी इसी दिन हुआ था। अब जब फिर से 5 अगस्त नजदीक है, तो कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या सरकार एक बार फिर कोई बड़ा फैसला सुना सकती है?
उमर अब्दुल्ला की मांग और सरकार का रुख
उमर अब्दुल्ला लगातार यह मांग करते रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा दिया जाए। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से अपील कर चुके हैं। उनका तर्क है कि सरकार ने राज्य के दर्जे को बहाल करने से कभी इनकार नहीं किया, बल्कि सिर्फ "उचित समय" की बात कही है। अब सवाल उठता हैक्या वह उचित समय आ चुका है? हालाँकि उमर अब्दुल्ला की मानें तो 5 अगस्त को कुछ भी नहीं होगा, लेकिन उनके ट्वीट की भाषा ने यह साफ कर दिया है कि किसी बड़े घटनाक्रम की आहट जरूर महसूस की जा रही है। खासकर तब, जब केंद्र सरकार ने संसद के मानसून सत्र में जम्मू-कश्मीर से जुड़ी कुछ अहम चर्चा के संकेत दिए हैं। 5 अगस्त की तारीख एक बार फिर उम्मीद और अटकलों का केंद्र बन गई है। उमर अब्दुल्ला जहां फिलहाल किसी बड़े घटनाक्रम की संभावना को नकारते हैं, वहीं राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि केंद्र सरकार के पास जम्मू-कश्मीर को लेकर कुछ नया करने का यह सांकेतिक अवसर हो सकता है।