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आप आम तौर पर मिठाई का थोड़ा सा पीस मुंह में उठाकर खा लेते हैं और स्वाद चख कर फिर कहते हैं भैया 1 किलो दे दो। लेकिन इस मिठाई को तो आप गलती से छू नहीं सकते क्योंकि आपने एक भी पीस खा लिया तो सोने के दाम देने पड़ जाएंगे... एक ग्राहक डर करके आता है मैं खा लूं यह पीस ? दरअसल वह ग्राहक नहीं बल्कि इन मिठाइयों पर अध्ययन करने वाला एक छात्र था जो रिसर्च कर रहा था भारत के नए-नए व्यंजनों की.... मिठाई का पीस उसने चखा तो सचमुच उसके चेहरे पर कुछ ऐसी भाव थे जैसे सचमुच उसने प्रभु को 56 भोग लगा दिया हो और वह महसूस कर रहा हो कि प्रभु ने तो छप्पन भोग ग्रहण कर लिया, क्या अब मैं इसे परिवार के लिए भी ले चलूं...
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लेकिन हां एक साधारण आदमी उस मिठाई के दो पीस खरीदने से पहले भी 10 बार सोचेगा और अगर वह जानना चाहेगा इस मिठाई में ऐसा आखिर क्या है ? शॉप के मालिक और विक्रेता के मुताबिक छप्पन भोग में तमाम तरह के ड्राई फ्रूट्स तो पड़ते ही हैं लेकिन विश्व मानकों के अनुसार भारतीय मिठाई के खजाने को अनूठे ढंग से बनाया गया है। उसकी बनाने की प्रक्रिया बहुत ही नायाब है। आम लोग लोग चांदी का वर्क लगाते हैं, इसमें छप्पन भोग के सोने की वर्क है। इसको अंगूठी की तरह से चौकोर पीस में डिब्बों में यूं सजाया किया गया है जैसे आपने सोने की दो अंगूठियां खरीदी हो। इस मिठाई को एग्जॉइटिका नाम दिया गया है।
छप्पन भोग स्वीट्स पर बनाई गई मिठाइयां दोनों तरीकों से बनती हैं मैन्युअल और मशीन .... लेकिन आप जब मिठाई बनते देखेंगे तो आपको ऐसा लगेगा जैसे डॉक्टर मिलकर कोई ऑपरेशन कर रहे हो। मिठाई बनाने के लिए स्पेशल स्टिक का इस्तेमाल हो रहा था । उसका एक एक रेशा ऐसे बनाया जाता है जैसे कि डॉ अपने मेडिकल औजारों से बहुत ही बारीकी से और सफाई के साथ दिल की पड़ताल कर रहे हो और उसमें एक एक महत्वपूर्ण हिस्से की कद्र की जा रही हो.।
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पूछने पर छप्पन भोग के मालिक बताते हैं कि विश्व स्तर पर चॉकलेट आदि के लिए जो मानक होते हैं उनका पूरा पालन किया जाता है। विदेश में मिठाई मशीनों से बनती हैं, हाइजेनिक होकर बनती हैं रखने और पैकिंग करने से लेकर कोरियर करने तक उनकी एक समूची व्यवस्था होती है । हमने सोचा क्यों ना इस व्यवस्था को हम अपने मिठाई संसार में उतारे। इस मिठाई को कोरियर से भेजने के लिए ऐप डाउनलोड कर ऑनलाइन ऑर्डर भी कराया जा सकता है ।
सफाई और स्वाद में बेमिसाल छप्पन भोग में मिठाइयों के निर्माण के लिए हाइजीनिक ढंग से मिठाई बनाने के अलावा, चॉकलेट बनाने की मशीन की तरह से पूरी उच्च कोटि की मशीनें लगाई गई है जहां पर मिश्रण भी स्वयं बनता है उसकी शेप विधि वैसे ही दी जाती है ,सजावट से लेकर डिब्बा पैकिंग तक सब कुछ ऑटोमेटिक मशीन से यानी स्वचालित मशीन द्वारा किया जाता है।
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इस दुकान पर विश्व की सबसे छोटी जलेबी मिलती है जो कोई coin आकर में होती है कॉइन यानी सिक्का। यहां की मिठाई "32" भी बहुत मशहूर है जिसे बेसन और ड्राई फ्रूट्स के घोल से एक-एक रेशा तैयार करके उसे आटे की तरह बना कर फिर उसका रोल बनाया जाता है । इसके बाद उसको शेप देने उसकी कटिंग, उसकी साज-सज्जा तक स्पेशल ढंग से किया जाता है। यह "मिठाई बत्तीसा" मिठाई का शौक रखने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रहती है। लेकिन 50000 किलो की मिठाई अगर यहाँ है तो साथ ही 240 तक के भी गिफ्ट पैक भी अवेलेबल है। ऐसा नहीं है कि आम आदमी कोई मिठाई खा ही नहीं सकता। सच तो यह है कि उन्होंने अपने हिसाब से उच्च कोटि के मानक पर भारत के छप्पन भोग को विश्व मानकों से जोड़कर लोगो तक पहुंचाने प्का प्रयास किया है।
आप राजधानी लखनऊ जायें तो प्रभु दयाल मार्ग शॉप नंबर 311 छप्पन भोग स्वीट्स पर जाना ना भूले ताकि स्वादिष्ट मिठाइयों और टिक्की के स्वाद की महक आपको दूर से परेशान ना कर सके बल्कि वहां जाकर आप जलेबी खाएं मिठाई खाए घर परिवार के लिए पैक कराएं लेकिन साथ ही साथ वह चाट भी खा ले जिसे ऐश्वर्या राय ने अपने सास-ससुर के साथ जाकर परिवार सहित खाना पसंद किया है। यही तो है शाही लोगों की शाही पसंद.... भारत का छप्पन भोग एग्जॉटिका के नए दिवाली तोहफे में...
अब आप विचार कर लीजिए दिवाली पर मिठाई एग्जॉटिका या सोना...?
मीना कौशिक
/ नोएडाका नंबर 1 न्यूज़पोर्टल
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