DM Murder Case : हत्या मामले में पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई पर बिहार व केंद्र से जवाब तलब
Response summoned from Bihar and Center on the release of former MP Anand Mohan in the murder case
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:18 AM
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी. कृष्णैया की 1994 में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व सांसद आनंद मोहन को समय से पहले रिहा करने के बिहार सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को केंद्र एवं बिहार सरकार से जवाब मांगा। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की पीठ ने याचिका पर केंद्रीय गृह मंत्रालय, बिहार सरकार और आनंद मोहन को नोटिस जारी किया है।
DM Murder Case
27 अप्रैल को हुई थी आनंद मोहन की रिहाई
याचिका पर सुनवायी शुरू होते ही दिवंगत अधिकारी की पत्नी उमा कृष्णैया की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण मामला है। पीठ ने कहा कि वह याचिका पर नोटिस जारी कर रही है। शीर्ष अदालत ने एक मई को याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी। इसे आठ मई के लिए सूचीबद्ध किया था। बिहार कारागार नियमावली में संशोधन के बाद आनंद मोहन को 27 अप्रैल को सहरसा जेल से रिहा कर दिया गया था।
उम्रकैद की सजा की व्याख्या 14 वर्ष कैद के रूप में नहीं की जा सकती
जी. कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने अपनी याचिका में दलील दी है कि गैंगस्टर से नेता बने आनंद मोहन को सुनाई गई उम्रकैद की सजा उनके पूरे जीवनकाल के लिए है। इसकी व्याख्या महज 14 वर्ष की कैद की सजा के रूप में नहीं की जा सकती। उन्होंने उच्चतम न्यायालय में दायर अपनी याचिका में कहा कि जब मृत्युदंड की जगह उम्रकैद की सजा सुनाई जाती है, तब उसका सख्ती से पालन करना होता है, जैसा कि न्यायालय का निर्देश है और इसमें कटौती नहीं की जा सकती। आनंद मोहन का नाम उन 20 से अधिक कैदियों में शामिल है, जिन्हें जेल से रिहा करने के लिए राज्य के कानून विभाग ने हाल में एक अधिसूचना जारी की थी, क्योंकि वे जेल में 14 वर्षों से अधिक समय बिता चुके हैं।
DM Murder Case
कारागार नियमावली में संशोधन के बाद घटाई गई सजा
बिहार कारागार नियमावली में राज्य की महागठबंधन सरकार द्वारा 10 अप्रैल को संशोधन किये जाने के बाद आनंद मोहन की सजा घटा दी गई। नियमावली में संशोधन के जरिये ड्यूटी पर तैनात लोकसेवक की हत्या में संलिप्त दोषियों की समय पूर्व रिहाई पर पाबंदी हटा दी गई थी। राज्य सरकार के इस फैसले के आलोचकों का दावा है, ऐसा मोहन की रिहाई को सुविधाजनक बनाने के लिए किया गया, जो जाति से राजपूत हैं। इससे नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले महागठबंधन को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ उसकी लड़ाई में मदद मिल सकती है। नेताओं सहित कई अन्य लोगों को राज्य के जेल नियमावली में संशोधन से लाभ हुआ है।
उल्लेखनीय है कि तेलंगाना के रहने वाले जी. कृष्णैया की 1994 में उग्र भीड़ ने उस समय पीट-पीटकर हत्या कर दी थी, जब उनके वाहन ने मुजफ्फरपुर जिले में गैंगस्टर छोटन शुक्ला की शवयात्रा से आगे निकलने की कोशिश की थी। तब आनंद मोहन विधायक थे और शवयात्रा में शामिल थे।
देश विदेशकी खबरों से अपडेट रहने लिएचेतना मंचके साथ जुड़े रहें।देश–दुनिया की लेटेस्ट खबरों से अपडेट रहने के लिए हमेंफेसबुकपर लाइक करें याट्विटरपर फॉलो करें।