Namak Haram : नमक हराम शब्द आपने जरूर सुना होगा। नमक हराम उस व्यक्ति को कहा जाता है जो अपने परिवार, समाज अथवा देश के साथ गद्दारी करता है। साधारण शब्दों में नमक हराम वह इन्सान होता है जो जिसका नमक (खाना) खाता है उसी के साथ विश्वासघात अथवा गद्दारी करता है। हमारे समाज में हर जगह नमक हराम लोग मौजूद हैं। हम आज आपको बताएंगे कि भारत का सबसे पहला तथा असली नमक हराम कौन है?
भारत के असली नमक हराम ने की थी देश की जासूसी
भारत के सबसे पहले तथा असली नमक हराम का नाम भवानी शंकर खत्री था। देश के सबसे पहले नमक हराम ने भारत को गुलाम बनाने वाले अंग्रेजों के लिए जासूसी का काम किया था। देश के विरूद्ध जासूसी करके इस नमक हराम भवानी शंकर खत्री ने देश के महान योद्धाओं को एक महत्वपूर्ण युद्ध हरवा दिया था। भारत का यह पहला नमक हराम भवानी शंकर खत्री एक जमाने में इंदौर के महाराजा यशवंत राव होलकर का वफादार सिपाही था। बाद में वह नमक हराम अंग्रेजों के साथ मिल गया और देश की खुफिया जानकारी अंग्रेजों को देने लगा।
नमक हराम भवानी शंकर खत्री ने हरवाया था महत्वपूर्ण युद्ध
आपको बता दें कि, वर्ष-1803 में दिल्ली के पटपड़गंज के इलाके में मराठा यशवंतराव होलकर और अंग्रेजों के बीच एक बड़ी लड़ाई हुई। इस लड़ाई में भवानी शंकर खत्री ने अंग्रेजों का साथ दिया, जिससे मराठा सेना को हार का सामना करना पड़ा। भवानी शंकर खत्री की गद्दारी से खुश होकर अंग्रेजों ने उसे चांदनी चौक में एक शानदार हवेली इनाम में दी। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, जब दिल्ली के लोग अंग्रेजों के खिलाफ उठ खड़े हुए तभी से इस हवेली का नाम ‘नमक हराम की हवेली’ पड़ गया।
दिल्ली में मौजूद है ‘नमक हराम की हवेली’
भारत की राजधानी दिल्ली में ‘नमक हराम की हवेली’ मौजूद है। नमक हराम की हवेली दिल्ली के चांदनी चौक में स्थित है। ये हवेली अपने खास नाम की वजह से मशहूर है। इस हवेली को लोग 'नमक हराम की हवेली' के नाम से जानते हैं। जो भी इस हवेली के सामने से गुजरता है, उसके मन में बस एक ही शब्द आता है वो है 'गद्दार'। बता दें कि, नमक हराम की हवेली दिल्ली के चांदनी चौक के कूचा घसीराम गली में स्थित है। इस हवेली का नाम 'नमक हराम की हवेली' इसलिए पड़ा क्योंकि इसके मालिक भवानी शंकर खत्री ने 19वीं सदी की शुरुआत में अंग्रेजों का साथ दिया था। भवानी शंकर खत्री, जो पहले इंदौर के महाराजा यशवंतराव होलकर के वफादार हुआ करते थे, लेकिन बाद में उसने अंग्रेजों को होलकर और मराठा सेना की खुफिया जानकारी दी। यही वजह है कि लोग खत्री को गद्दार कहते हैं और उनकी हवेली को 'नमक हराम की हवेली'। चांदनी चौक में स्थित इस हवेली में आज भी कई किराएदार रहते हैं। ये लोग कई दशकों से यहां रह रहे हैं। मजेदार बात ये है कि यहां रहने वाले लोगों को नाम मात्र का किराया देना पड़ता है। जानकारी के अनुसार, यहां का किराया आज भी मात्र पांच-दस रुपये ही है। हवेली के मालिक ने 200 साल पहले जो गद्दारी की थी उसके दाग आज भी इस हवेली से नहीं मिटे हैं।