
सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) के हालिया आदेश में दिल्ली-NCR के सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में भेजने के निर्देश ने एक बार फिर डॉग-बाइट्स ( Dog-Bites ) के खतरों को चर्चा में ला दिया है। अब ध्यान केवल रैबीज तक सीमित नहीं है, बल्कि उन तमाम बीमारियों की ओर भी खिंच रहा है, जो कुत्तों के काटने से इंसानों में फैल सकती हैं। बीते महीनों में कई दिल दहला देने वाली घटनाएं सामने आईं—कभी बच्चों पर आवारा कुत्तों का हमला, तो कभी खिलाने को लेकर लोगों के बीच झगड़े। कई मामलों में तो कुत्तों के काटने के बाद पीड़ित की मौत तक हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सड़कों पर घूम रहे इन कुत्तों को टीकाकरण न मिलने से संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। Stray Dogs
राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के डॉ. एन.आर. रावत के मुताबिक, कुत्ते के काटने से उसके शरीर में मौजूद Capnocytophaga canimorsus नामक बैक्टीरिया इंसान के खून में प्रवेश कर सकता है।
यह बैक्टीरिया बुजुर्गों, डायबिटीज या कैंसर पीड़ितों जैसे कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए अधिक घातक है।
लक्षणों में घाव पर पस, सूजन, लालिमा और तेज संक्रमण शामिल हैं। इलाज में देरी मौत का कारण बन सकती है।
यदि काटे गए हिस्से की समय पर सफाई या इलाज न हो, तो बैक्टीरिया खून की धमनियों में फैलकर सेप्सिस पैदा कर सकता है।
इसके परिणामस्वरूप रक्तस्राव ( bleeding ) रुक सकता है, अंग फेल हो सकते हैं और मरीज की जान पर बन आती है।
यह सामान्य कट की तरह नहीं, बल्कि कई गुना खतरनाक स्थिति है।
डॉग-बाइट को कभी हल्के में न लें। तुरंत घाव को साबुन और साफ पानी से धोएं।
लालिमा, पस या सूजन दिखे तो फौरन डॉक्टर से संपर्क करें।
टिटनेस ( Tetanus ) का टीका समय पर लगवाएं।
बुखार, कमजोरी या घाव के आसपास जलन हो तो यह सेप्सिस का संकेत हो सकता है।
पालतू कुत्ते आमतौर पर प्रशिक्षित और वैक्सीनेटेड होते हैं। वे खतरा महसूस करने पर भी कई बार पीछे हट जाते हैं। इसके विपरीत, आवारा कुत्ते शिकारी प्रवृत्ति वाले होते हैं, जो मामूली उत्तेजना पर भी हमला कर देते हैं। चूंकि उन्हें टीकाकरण नहीं मिलता, इसलिए उनके काटने से रैबीज, बैक्टीरियल इंफेक्शन और सेप्सिस का खतरा कहीं अधिक होता है। Stray Dogs