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Himanta Biswa Sarma : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को बांग्लादेश और उसके रणनीतिक बयानबाजों को दो टूक चेतावनी दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर को बार-बार निशाना बनाने वालों को पहले अपने देश के नाजुक ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर की हकीकत समझनी चाहिए। सरमा ने भूगोल के तथ्यों का हवाला देते हुए बताया कि बांग्लादेश के पास दो बेहद संवेदनशील कॉरिडोर हैं, जो भारत के 'चिकन नेक' से कहीं ज़्यादा असुरक्षित हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने मार्च में चीन की यात्रा के दौरान यह कहा था कि बांग्लादेश, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए "महासागर का एकमात्र संरक्षक" है। यूनुस के इस बयान को भारत की संप्रभुता और भू-राजनीतिक संतुलन के लिए चुनौतीपूर्ण माना गया।
मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने सोशल मीडिया पर लिखा,
"जो लोग भारत के चिकन नेक कॉरिडोर को लेकर बार-बार रणनीतिक धमकियां देते हैं, वे यह जान लें कि बांग्लादेश में भी दो ऐसे कॉरिडोर मौजूद हैं, जो कहीं ज्यादा संवेदनशील हैं।"
उन्होंने बताया:
पहला कॉरिडोर: उत्तरी बांग्लादेश में, दखिन दिनाजपुर से लेकर गारो हिल्स तक फैला है, जिसकी लंबाई लगभग 80 किलोमीटर है। यहां किसी भी तरह का विघटन पूरे रंगपुर डिवीजन को मुख्य भूभाग से काट सकता है।
दूसरा 'चिकन नेक' कॉरिडोर, जो महज़ 28 किलोमीटर लंबा है, बांग्लादेश की श्वास-नली जैसा है। यह दक्षिण त्रिपुरा से बंगाल की खाड़ी तक फैला है और ढाका को चटगांव से जोड़ने वाला इकलौता सीधा मार्ग है। चटगांव, जहां से बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था सांस लेती है, और ढाका, जहां से नीतियां बनती हैं—इन दोनों के बीच अगर इस पट्टी में कोई भी विघटन हो गया, तो देश की रीढ़ टूट सकती है। यह वही संकरी डोरी है जिस पर बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक जीवनरेखा टिकी है। भारत को घूरने से पहले पड़ोसी को अपने शीशे जैसे संवेदनशील गलियारों पर नज़र डालनी चाहिए।
सरमा ने लिखा, “मैं केवल भौगोलिक तथ्य पेश कर रहा हूं जिन्हें राजनीतिक जोश में अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।”
पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक स्थिति जटिल है। यह क्षेत्र शेष भारत से केवल 22 किलोमीटर लंबी सिलीगुड़ी पट्टी (चिकन नेक) के माध्यम से जुड़ा है, जबकि इस इलाके की सीमाएं चीन, म्यांमार, बांग्लादेश, भूटान और नेपाल जैसे देशों से लगी हैं। इस लिहाज से यह भारत के लिए रणनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है।
नीति आयोग की हालिया बैठक में भी हिमंत सरमा ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों के लिए समर्पित लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर, जलमार्गों के विस्तार, रेल नेटवर्क के पुनरुद्धार और सस्ती बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि “जब तक पूर्वोत्तर को बराबर का औद्योगिक अवसर और कनेक्टिविटी नहीं मिलेगी, तब तक भारत की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा सकतीं।”
Himanta Biswa Sarma