
Dr. Ambedkar Jayanti 2023 : आज भारत रत्न डा. भीमराव अंबेडकर की जयंती है। पूरा विश्व उन्हें नमन कर रहा है। डा. अंबेडकर ने अपने जीवनकाल में न केवल दलित, बल्कि समाज के अन्य शोषित वर्गों के उत्थानों के लिए भी कार्य किया है। आज उनके जन्मदिवस पर हम आपको डा. अंबेडकर के जीवन से जुड़े तीन प्रेरक प्रसंग की जानकारी देंगे। यह प्रेरक प्रसंग ही उन्हें महान बनाते हैं।
बाबासाहेब की ईमानदारी
यह आज़ादी के पहले की घटना है। 1943 में बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर को वाइसराय काउंसिल में शामिल किया गया और उन्हें श्रम मंत्री बना दिया गया। इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग (PWD) भी उन्हीं के पास था। इस विभाग का बजट करोड़ों में था और ठेकेदारों में इसका ठेका लेने की होड़ लगी रहती थीं
इसी लालच में दिल्ली के एक बड़े ठेकेदार ने अपने पुत्र को बाबासाहेब के पुत्र यशवंत राव के पास भेजा और बाबासाहेब के माध्यम से ठेका दिलवाने पर अपना पार्टनर बनाने और 25-50% तक का कमीशन देने का प्रस्ताव दिया। यशवंत राव उसके झांसे में आ गए और अपने पिता को यह सन्देश देने पहुँच गए।
जैसे ही बाबासाहेब ने ये बात सुनी वो आग-बबूला हो गए। उन्होंने कहा- “मैं यहाँ पर केवल समाज के उद्धार का ध्येय को लेकर आया हूँ। अपनी संतान को पालने नहीं आया हूँ। ऐसे लोभ-लालच मुझे मेरे ध्येय से डिगा नहीं सकते।” और उसी रात यशवंत को भूखे पेट मुम्बई वापस भेज दिया।
डॉ. आंबेडकर ने अपने जीवन में बहुत से कष्ट सहे लेकिन कभी भी अपनी शिक्षा को प्रभावित नहीं होने दिया। वह हर दिन 14 से 18 घंटे तक अध्ययन किया करते थे। शिक्षा के प्रति उनकी ललक और जी तोड़ मेहनत का ही परिणाम था कि बड़ौदा के शाहू महाराज जी ने उन्हें उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड भेज दिया था।
बाबासाहेब को किताबें पढने का बड़ा शौक था। माना जाता है कि उनकी पर्सनल लाइब्रेरी दुनिया की सबसे बड़ी व्यक्तिगत लाइब्रेरी थी, जिसमे 50 हज़ार से अधिक पुस्तकें थीं। लन्दन प्रवास के दौरान वे रोज एक लाइब्रेरी में जाया करते थे और घंटों पढाई किया करते थे। एक बार वे लंच टाइम में अकेले लाइब्रेरी में बैठ-बैठे ब्रेड का एक टुकड़ा खा रहे थे कि तभी लाइब्रेरियन ने उन्हें देख लिया और उन्हें डांटने लगा कि कैफेटेरिया में जाने की बजाय वे यहाँ छिप कर खाना खा रहे हैं। लाइब्रेरियन ने उन पर फाइन लगाने और उनकी मेम्बरशिप ख़त्म करने की धमकी दी।
तब बाबासाहेब ने क्षमा मांगी और अपने और अपने समाज के संघर्ष और इंग्लैंड आने के की वजह के बारे में बताया। उन्होंने यह भी बड़ी ईमानदारी से कबूल किया कि कैफेटेरिया में जाकर लंच करने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं।
उनकी बात सुनकर लाइब्रेरियन बोला- आज से तुम लंच आर्स में यहाँ नहीं बैठोगे तुम मेरे साथ कैफेटेरिया चोलोगे और मैं तुमसे अपना खाना शेयर करूँगा। वह लाइब्रेरियन एक यहूदी (Jew) था और उसके इस व्यवहार के कारण बाबासाहेब के मन में यहूदियों के लिए एक विशेष स्थान बन गया।
यह घटना तब की है जब डॉ. अंबेडकर जब अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे। वह रोज सुबह लाइब्रेरी खुलने से पहले ही वहां पहुँच जाते थे और सबके जाने के बाद ही वे वहां से निकलते थे। यहाँ तक कि वे कई बार लाइब्रेरी की टाइमिंग ख़त्म होने के बाद भी वहां बैठे रहने की अनुमति माँगा करते थें उन्हें रोज ऐसा करते देख एक दिन चपरासी ने उनसे कहा, “क्यों तुम हमेशा गंभीर रहते हो, बस पढाई ही करते रहते हो और कभी किसी दोस्त के साथ मौज-मस्ती नहीं करते।”
तब बाबा साहेब बोले- “अगर मैं ऐसा करूँगा तो मेरे लोगों का ख़याल कौन रखेगा ?”
1: भीमराव अंबेडकर अपने माता-पिता की चौदहवीं और आखिरी संतान थे।
2: डॉ. अंबेडकर के पूर्वज काफी समय तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी में एम्प्लोयेड थे और उनके पिता ब्रिटिश इंडियन आर्मी में Mhow cantonment में तैनात थे।
3: डॉ. अम्बेडकर का मूल या ओरिजिनल नाम था अम्बावाडेकर था। लेकिन उनके शिक्षक, महादेव अम्बेडकर, जो उन्हें बहुत मानते थे, ने स्कूल रिकार्ड्स में उनका नाम अम्बावाडेकर से अम्बेडकर कर दिया।
4: बाबासाहेब मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में दो साल तक प्रिंसिपल पद पर कार्यरत रहे।
5: डॉ. बी. आर अम्बेडकर भारतीय संविधान की धारा 370, जो जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देता है के खिलाफ थे।
6: बाबासाहेब अम्बेडकर विदेश जाकर अर्थशास्त्र डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने वाले पहले भारतीय थे।
7: डॉ. अम्बेडकर बाद के सालों में डायबिटीज से बुरी तरह ग्रस्त थे।
8: डॉ. अम्बेडकर ही एक मात्र भारतीय हैं जिनकी portrait लन्दन संग्रहालय में कार्ल मार्क्स के साथ लगी हुई है।
9: इंडियन फ्लैग में अशोक चक्र को जगह देने का श्रेय भी डॉ. अम्बेडकर को जाता है।
10: B R Ambedkar Labor Member of the Viceroy’s Executive Council के सदस्य थे और उन्ही की वजह से फैक्ट्रियों में कम से कम 12-14 घंटे काम करने का नियम बदल कर सिर्फ 8 घंटे कर दिया गया था।
11: वो बाबासाहेब ही थे जिन्होंने महिला श्रमिकों के लिए सहायक Maternity Benefit for women Labor, Women Labor welfare fund, Women and Child, Labor Protection Act जैसे कानून बनाए।
12: Economics का Nobel Prize जीत चुके अर्थशास्त्री प्रो. अमर्त्य सेन] डॉ. बी आर अम्बेडकर को अर्थशास्त्र में अपना पिता मानते हैं।
13: बेहतर विकास के लिए 50 के दशक में ही बाबासाहेब ने मध्य प्रदेश और बिहार के विभाजन का प्रस्ताव रखा था, पर सन 2000 में जाकर ही इनका विभाजन कर छत्तीसगढ़ और झारखण्ड का गठन किया गया।
14: बाबासाहेब को किताबें पढने का बड़ा शौक था। माना जाता है कि उनकी पर्सनल लाइब्रेरी दुनिया की सबसे बड़ी व्यक्तिगत लाइब्रेरी थी, जिसमे 50 हज़ार से अधिक पुस्तकें थीं।
15: डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की दो शादियाँ हुईं थीं, पहली 9 वर्षीय बालिका रामाबाई के साथ तब बाबा साहेब 15 वर्ष के थे और दूसरी रामाबाई की मृत्यु के बाद हेल्थ इसूज की वजह से 57 साल की उम्र में डॉ. शारदा कबीर से।
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