बिहार के टॉप अफसर ने दिया इस्तीफा, लड़ सकते हैं चुनाव
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 04:40 AM
Dr. S Sidhharth: बिहार के वरिष्ठ नौकरशाह और शिक्षा विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी डॉ. एस. सिद्धार्थ ने सोमवार को वॉलंटरी रिटायरमेंट (VRS) लेकर प्रशासनिक सेवा से विदाई ले ली। उनके इस फैसले से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि वे नवादा जिले से आगामी विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। डॉ. सिद्धार्थ का करियर तीन दशकों से अधिक का रहा है जिसमें उन्होंने बिहार और केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दीं। वे 30 नवंबर 2025 को रिटायर होने वाले थे लेकिन उससे पहले ही उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प चुन लिया।
प्रशासनिक करियर का प्रभावशाली सफर
1990 के दशक में सिविल सेवा में आए डॉ. सिद्धार्थ ने मुजफ्फरपुर, भोजपुर, औरंगाबाद और लोहरदगा जैसे जिलों में जिलाधिकारी के रूप में काम किया। केंद्र सरकार में उन्होंने भारी उद्योग मंत्रालय में निदेशक की जिम्मेदारी संभाली। बिहार में उन्होंने मुख्यमंत्री के सचिव सहित शहरी विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, ग्रामीण कार्य, श्रम, उद्योग और गृह विभागों में अहम पदों पर काम किया। वे बिहार सरकार के सबसे अनुभवी और नीतिगत दृष्टिकोण से प्रभावशाली अधिकारियों में गिने जाते हैं।
नीतियों के निर्माता रहे सिद्धार्थ
शहरी विकास विभाग में रहते हुए उन्होंने बिहार अर्बन प्लानिंग एंड डिवेलपमेंट एक्ट 2014, इसके नियम और बिल्डिंग बायलॉज का मसौदा तैयार किया। इसके साथ ही पटना मेट्रो की DPR और मेट्रोपॉलिटन मास्टर प्लान की नींव रखी। उद्योग विभाग में उन्होंने बिहार इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2016, इन्वेस्टमेंट एक्ट, रूल्स, और स्टार्टअप पॉलिसी 2017 जैसी अहम योजनाओं का ड्राफ्ट तैयार किया। वे Ease of Doing Business के तहत कई संरचनात्मक सुधारों के सूत्रधार भी रहे।
प्रशासनिक सुधारों में भी छाप
डॉ. सिद्धार्थ ने हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट्स, सिल्क, और स्किल डिवेलपमेंट के क्षेत्र में भी अहम पहल की। वे बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन के मिशन डायरेक्टर रहे और प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए कई कदम उठाए। इसके अलावा, वे लोक शिकायत विभाग के सचिव, गन्ना विभाग के प्रमुख सचिव, बिहार फाउंडेशन के सीईओ, BIADA के चेयरमैन और सेंटर फॉर इकोनॉमिक पॉलिसी एंड पब्लिक फाइनेंस के चेयरमैन व डायरेक्टर भी रह चुके हैं।
डॉ. सिद्धार्थ का VRS ऐसे समय पर आया है जब बिहार की राजनीति एक नए समीकरण की ओर बढ़ रही है। माना जा रहा है कि वे नवादा जिले से विधानसभा या लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमा सकते हैं। चूंकि उनका मूल संबंध नवादा से है और वहां उनका प्रशासनिक व सामाजिक आधार मजबूत माना जाता है, इसलिए यह कयास और मजबूत हो जाते हैं। डॉ. एस. सिद्धार्थ का वीआरएस केवल एक रिटायरमेंट नहीं, बल्कि शायद एक नई राजनीतिक पारी की शुरुआत हो सकती है। 29 वर्षों की प्रशासनिक समझ और नीति-निर्माण की गहरी पकड़ के साथ वे अगर सियासत में उतरते हैं, तो बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ सकता है।