10वीं की परीक्षा के बीच छात्रा ने दिया बच्चे को जन्म, परिवार को नहीं थी गर्भावस्था की जानकारी

10वीं बोर्ड की गणित परीक्षा के दौरान एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। परीक्षा दे रही एक छात्रा को अचानक तेज पेट दर्द हुआ। उसने कक्ष निरीक्षक से अनुमति लेकर वॉशरूम जाने की बात कही। कुछ ही देर बाद वॉशरूम से नवजात शिशु के रोने की आवाज सुनाई दी।

garbh
छात्रा
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar26 Feb 2026 01:23 PM
bookmark

Baby in Washroom : मध्यप्रदेश के पीथमपुर में 10वीं बोर्ड की गणित परीक्षा के दौरान एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। परीक्षा दे रही एक छात्रा को अचानक तेज पेट दर्द हुआ। उसने कक्ष निरीक्षक से अनुमति लेकर वॉशरूम जाने की बात कही। कुछ ही देर बाद वॉशरूम से नवजात शिशु के रोने की आवाज सुनाई दी। जब स्कूल स्टाफ वहां पहुंचा तो पता चला कि छात्रा ने बच्चे को जन्म दिया है। घटना से परीक्षा केंद्र में अफरा-तफरी मच गई।

एंबुलेंस बुलाकर छात्रा और नवजात को अस्पताल भेजा

तुरंत एंबुलेंस बुलाकर छात्रा और नवजात को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। डॉक्टरों के अनुसार दोनों की हालत फिलहाल स्थिर है और चिकित्सकीय निगरानी में रखकर आवश्यक उपचार किया जा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि छात्रा के परिजनों को उसकी गर्भावस्था के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि छात्रा ने अपनी स्थिति किसी को नहीं बताई थी।

पुलिस जांच शुरू

मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। जीरो एफआईआर दर्ज कर प्रकरण को आगे की जांच के लिए बेतमा क्षेत्र की पुलिस को सौंपा गया है। चूंकि मामला नाबालिग से जुड़ा है, इसलिए संबंधित कानूनी धाराओं के तहत जांच की जा रही है। यह घटना केवल एक अप्रत्याशित प्रसंग नहीं है, बल्कि किशोरावस्था में स्वास्थ्य जागरूकता, पारिवारिक संवाद और यौन शिक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर भी सवाल उठाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से बचाव के लिए परिवार और स्कूल दोनों स्तर पर खुला संवाद और स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन बेहद जरूरी है।

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

जाने एक ऐसी जगह जहाँ महिलाओं का राज, पुरुषों की भूमिका तय नियमों से

अदर वर्ल्ड किंगडम' किसी असली देश जैसा नहीं है। इसे एक वैकल्पिक सामाजिक मॉडल के रूप में पेश किया गया है। इसका अपना झंडा, प्रतीक, पासपोर्ट और करेंसी है, लेकिन ये सभी केवल प्रतीकात्मक हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैध नहीं हैं।

Czech Republic
चर्चा में है 'अदर वर्ल्ड किंगडम' (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar26 Feb 2026 01:09 PM
bookmark

Czech Republic: महिलाओं के अधिकार और सुरक्षा को लेकर दुनिया में लगातार बहस चल रही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसी भी जगह है, जहां दावा किया जाता है कि वहां सिर्फ महिलाओं का राज चलता है? यहां पुरुषों के लिए अलग और कड़े नियम बनाए गए हैं। हम बात कर रहे हैं 'अदर वर्ल्ड किंगडम' (Other World Kingdom) की, जो अपनी अनोखी व्यवस्था के कारण चर्चा में बना हुआ है।

कहां है यह जगह और कौन हैं शासक?

'अदर वर्ल्ड किंगडम' चेक रिपब्लिक (Czech Republic) में स्थित एक निजी माइक्रोनेशन के रूप में जाना जाता है। इसे 1996 में एक निजी पहल के तौर पर शुरू किया गया था। यह किसी मान्यता प्राप्त संप्रभु देश की तरह संयुक्त राष्ट्र या अन्य देशों द्वारा मान्य नहीं है। यहां की शासक को 'रानी पैट्रिसिया-1' (Queen Patricia I) के नाम से जाना जाता है। इसकी अपनी एक राजधानी भी है, जिसे 'ब्लैक सिटी' कहा जाता है।

पुरुषों के लिए हैं खास नियम

इस जगह की सबसे खास बात यहां का थीम आधारित ढांचा है। यहां महिलाओं को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, जबकि पुरुषों को अधीन भूमिका में रखा गया है। यहां के नियमों के अनुसार, कानून में बदलाव का अधिकार सिर्फ रानी के पास होता है। पुरुषों के लिए कुछ प्रतीकात्मक और सख्त नियम बताए जाते हैं, जैसे कि पुरुषों को महिलाओं का सम्मान करना अनिवार्य है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां पुरुषों को कॉलर पहनना पड़ता है और उन्हें कोई भी काम करने के लिए 'मालकिन' की अनुमति लेनी होती है। यहां तक कि पुरुषों की पहचान के लिए विशेष निशान भी बनाए जाते हैं।

क्या है असली सच?

दरअसल, 'अदर वर्ल्ड किंगडम' किसी असली देश जैसा नहीं है। इसे एक वैकल्पिक सामाजिक मॉडल के रूप में पेश किया गया है। इसका अपना झंडा, प्रतीक, पासपोर्ट और करेंसी है, लेकिन ये सभी केवल प्रतीकात्मक हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैध नहीं हैं। यह क्षेत्र असल में निजी संपत्ति है और चेक रिपब्लिक के कानूनों के तहत ही आता है। यहां आने वाले या रहने वाले लोगों पर चेक रिपब्लिक के ही राष्ट्रीय कानून लागू होते हैं। Czech Republic

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

महाराष्ट्र में सात राज्यसभा सीटों पर सियासी हलचल तेज, पवार ने कांग्रेस की टेंशन बढ़ाई

सात राज्यसभा सीटों को लेकर सियासी हलचल तेज है। विधानसभा में बदल चुके शक्ति-संतुलन ने विपक्षी खेमे खासकर कांग्रेस, शरद पवार गुट और उद्धव ठाकरे की राजनीति को नई चुनौती दे दी है।

india
सात राज्यसभा सीटों को लेकर सियासी हलचल तेज
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar26 Feb 2026 12:30 PM
bookmark

Maharashtra Elections : महाराष्ट्र में इस समय सात राज्यसभा सीटों को लेकर सियासी हलचल तेज है। विधानसभा में बदल चुके शक्ति-संतुलन ने विपक्षी खेमे खासकर कांग्रेस, शरद पवार गुट और उद्धव ठाकरे की राजनीति को नई चुनौती दे दी है। संख्या बल के लिहाज से तस्वीर साफ दिख रही है, लेकिन असली पेच विपक्ष के भीतर की खींचतान है।

चुनाव क्यों अहम है?

इन सात सीटों का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है, इसलिए मार्च में मतदान प्रस्तावित है। राज्यसभा का चुनाव सीधे जनता नहीं, बल्कि विधायक करते हैं। इसलिए विधानसभा में किस दल के पास कितनी ताकत है, यही जीत-हार तय करती है। राज्य में सत्तारूढ़ महायुति जिसमें शिंदे गुट और अजित पवार गुट शामिल हैं के पास विधानसभा में स्पष्ट बढ़त है। मौजूदा आंकड़ों के आधार पर यह गठबंधन सात में से लगभग छह सीटें निकालने की स्थिति में माना जा रहा है। संख्या बल की मजबूती के कारण सत्ता पक्ष अपेक्षाकृत सहज दिख रहा है और उम्मीदवारों के चयन पर उसका ध्यान ज्यादा है, गणित पर कम।

विपक्ष के सामने असली परीक्षा

दूसरी ओर महाविकास आघाड़ी (एमवीए) जिसमें इंडियन नेशनल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) शामिल हैं के पास इतनी ताकत है कि वह मुश्किल से एक सीट सुरक्षित कर सके। यहीं से राजनीतिक पेच शुरू होता है। उस एकमात्र संभावित सीट पर किसे उतारा जाए? क्या अनुभवी नेता शरद पवार फिर से राज्यसभा जाएंगे? या उद्धव ठाकरे की पार्टी अपना दावा मजबूत करेगी? कांग्रेस की सहमति किसके साथ जाएगी? इन सवालों ने गठबंधन के भीतर असहजता बढ़ा दी है।

शरद पवार की भूमिका क्यों अहम?

शरद पवार लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति के अनुभवी चेहरा रहे हैं। यदि वे राज्यसभा जाने का फैसला करते हैं, तो स्वाभाविक रूप से सहयोगी दलों को अपने दावों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। लेकिन उद्धव ठाकरे गुट भी यह मानता है कि विधानसभा में उसके विधायकों की संख्या और हालिया राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए सीट पर उसका हक बनता है। कांग्रेस इस समीकरण में किंगमेकर जैसी भूमिका में दिख रही है, क्योंकि उसका समर्थन निर्णायक हो सकता है।

बड़ा राजनीतिक संकेत

यह चुनाव केवल सात सीटों का नहीं है, बल्कि यह बताएगा कि महाराष्ट्र में विपक्षी एकता कितनी मजबूत है। क्या एमवीए भविष्य की लड़ाइयों के लिए संगठित रह पाएगा। या आंतरिक मतभेद उसकी राजनीतिक जमीन और कमजोर करेंगे। सत्ता पक्ष जहां संख्या के भरोसे आत्मविश्वास में है, वहीं विपक्ष के लिए यह चुनाव अस्तित्व और समन्वय दोनों की परीक्षा बन गया है।


संबंधित खबरें