बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण का प्रचार आज शाम समाप्त हो गया है। इस चरण में 20 जिलों की 122 सीटों पर मतदान 11 नवंबर को होगा। इससे पहले, पहले चरण में 6 नवंबर को 121 सीटों पर मतदान हो चुका है, जिसकी मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी।

बता दे कि दूसरे चरण में कुल 3 करोड़ 70 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें पुरुष मतदाता 1 करोड़ 95 लाख 44 हजार 441 और महिला मतदाता 1 करोड़ 74 लाख 68 हजार 572 हैं। इस चरण में 45,399 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से ग्रामीण क्षेत्रों में 40,073 और शहरी इलाकों में 5,326 केंद्र शामिल हैं।
इस चरण में कुल 122 सीटें हैं, जिनमें से 101 सामान्य, 19 अनुसूचित जाति और 2 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। चुनाव मैदान में कुल 1,302 उम्मीदवार हैं, जिनमें सबसे अधिक प्रत्याशी तीन सीटों - कैमूर के चैनपुर, रोहतास के सासाराम, और गया के गया शहर - पर मौजूद हैं, जहां 22-22 उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं। वहीं, सबसे कम प्रत्याशी 5-5 हैं, जो लोरिया, रक्सौल, सुगौली, और बनमनखी सीटों पर हैं।
देखा जाए तो इस चरण में कई दिग्गज नेताओं का भाग्य तय होगा, जिनमें नीतीश कुमार के मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, पूर्व उपमुख्यमंत्री रेणु देवी, मंत्री शीला मंडल तथा एकमात्र मुस्लिम मंत्री जमा खान शामिल हैं। चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपनी ताकत झोंकी है। वहीं, विपक्ष की ओर से तेजस्वी यादव, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने भी जोर-शोर से प्रचार किया।
बता दे कि दूसरे चरण में मुख्य रूप से सीमांचल, चंपारण, मिथिलांचल और मगध जैसे इलाकों में वोटिंग होगी। एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला है, लेकिन जन सुराज और AIMIM जैसी पार्टियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। गत चुनाव की तुलना में इस बार भी मतदान का रिकॉर्ड टूटने की संभावना है। 6 नवंबर को पहले चरण में 65 प्रतिशत से अधिक मतदान रिकॉर्ड किया गया था, और दूसरे चरण में भी मतदाता उत्साहित हैं।
बिहार में इस बार मुख्य रूप से रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी, और किसानों की समस्या जैसे मुद्दे केंद्र में हैं। बेरोजगारी और विकास के मुद्दे पर दोनों गठबंधन अपनी-अपनी सरकार की उपलब्धियों और वादों को जनता के सामने पेश कर रहे हैं। कोरोना महामारी के बाद से स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने का भी वादा राजनीतिक दलों ने किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में बिहार के विकास का रोडमैप प्रस्तुत किया, तो वहीं कांग्रेस, महागठबंधन और विपक्षी दलों ने भी अपने-अपने घोषणापत्र जारी किए हैं। भाजपा और जदयू ने मिलकर बिहार के विकास का नारा दिया है, जबकि विपक्षी गठबंधन रोजगार और न्याय का मुद्दा उठा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक नेताओं ने घर-घर जाकर जनता से समर्थन मांगा, और सोशल मीडिया पर भी अपनी बात पहुंचाई।
चुनाव आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। सभी मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, सैनिटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित किया गया है। मतदाता जागरूकता के लिए विभिन्न राज्य स्तरीय अभियान चलाए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक युवा और पहली बार वोट डालने वाले मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग करें।
14 नवंबर को मतगणना के साथ ही यह तय हो जाएगा कि इस बार बिहार में किसकी सरकार बनेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का परिणाम बिहार की राजनीति में नए समीकरण और बदलाव ला सकता है। दोनों पक्ष जीत का जश्न मनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।