
बिहार विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने मतगणना प्रक्रिया में अहम बदलाव किए हैं। आयोग ने तय किया है कि अब किसी भी हाल में EVM (Electronic Voting Machines) पोस्टल बैलेट की पूरी गिनती होने से पहले नहीं खोली जाएंगी। यह कदम मतगणना की पारदर्शिता सुनिश्चित करने और प्रक्रिया में सुधार लाने के लिए उठाया गया है। पिछले छह महीनों में चुनाव आयोग ने चुनाव प्रक्रिया में करीब 30 बदलाव किए हैं। इनमें नवीनतम फैसला यही है कि पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी होने तक ईवीएम में मौजूद वोटों की गिनती शुरू नहीं की जाएगी। पहले आम तौर पर पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी होने से पहले ही ईवीएम खोल दी जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। Bihar Assembly Election 2025
चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि पोस्टल बैलेट की पूरी गिनती पूरी होने तक किसी भी हालत में ईवीएम नहीं खोली जा सकती। पहले ऐसा होता था कि कई बार सुबह 8:30 बजे पोस्टल बैलेट की गिनती अधूरी होने के बावजूद ईवीएम चालू कर दी जाती थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाएगी। अब काउंटिंग की शुरुआत केवल तभी होगी जब सभी पोस्टल बैलेट गिने जा चुके होंगे। आयोग ने यह भी कहा है कि अगर किसी काउंटिंग सेंटर पर पोस्टल बैलेट की संख्या ज्यादा है, तो अतिरिक्त टेबल लगाई जाएंगी और जरूरत पड़ने पर अधिक स्टाफ भी तैनात किया जाएगा।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतगणना में कोई देरी न हो और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से पूरी हो। पोस्टल बैलेट की गिनती के परिणाम सामने आने के बाद ही ईवीएम में दर्ज वोटों की गणना शुरू की जाएगी, ताकि हर वोट का सही और निष्पक्ष हिसाब रखा जा सके।
पोस्टल बैलेट की व्यवस्था चुनाव आयोग ने मतदान के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ाने और हर मतदाता को अपनी राय दर्ज कराने का मौका देने के लिए शुरू की थी। इसका इस्तेमाल खासकर उन लोगों के लिए होता है, जो अपने काम या अन्य कारणों से अपने निर्वाचन क्षेत्र में मतदान नहीं कर पाते। इसके अलावा, 80 साल से ऊपर के बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाता भी केवल पोस्टल बैलेट के माध्यम से ही वोट डाल सकते हैं। ध्यान रहे, इसके लिए पहले पंजीकरण अनिवार्य है।
चुनाव में प्रक्रिया इस तरह होती है कि आम मतदाताओं के मतदान से पहले ही इन पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी हो जाती है। जैसे ही मतगणना शुरू होती है, सबसे पहले पोस्टल बैलेट के वोट गिने जाते हैं और उसके बाद ईवीएम में दर्ज वोटों की गणना होती है। इस तरह यह सुनिश्चित किया जाता है कि हर मत का सही और निष्पक्ष हिसाब हो।
आयोग लगातार मतदाता और उम्मीदवार दोनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए चुनाव प्रक्रिया में सुधार कर रहा है। पिछले छह महीनों में आयोग ने 30 से अधिक बदलाव किए हैं। हाल ही में ईवीएम में उम्मीदवारों की रंगीन फोटो और बड़े अक्षरों में नाम दिखाने की सुविधा जोड़ी गई है, जिससे मतदाता आसानी से पहचान कर सकें। इसके अलावा, वोटर आईडी के लिए अब आधार और मोबाइल नंबर लिंक करना अनिवार्य कर दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिना आधार से लिंक मोबाइल नंबर वाले किसी भी आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा। ये बदलाव चुनाव प्रक्रिया को और पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।
पिछले कुछ महीनों में चुनाव आयोग पर विपक्ष की ओर से कई गंभीर आरोप लगे हैं। महाराष्ट्र हो या हरियाणा, लगभग हर चुनाव में आयोग को जवाबदेही के सवालों का सामना करना पड़ा। हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वोट चोरी और वोट डिलीट करने जैसी गंभीर शिकायतें उठाईं। इसी पृष्ठभूमि में आयोग ने चुनाव प्रक्रिया में सुधार के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि ये बदलाव मतगणना को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और सामने आने वाली समस्याओं को खत्म करने की दिशा में हैं, ताकि हर वोट का सही और निष्पक्ष हिसाब सुनिश्चित किया जा सके। Bihar Assembly Election 2025