लेकिन वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़े इससे उलट तस्वीर दिखाते हैं। चुनावी बॉन्ड बंद होने के बावजूद बीजेपी की आय में बड़ा उछाल दर्ज हुआ है, जबकि कांग्रेस को मिलने वाले दान में गिरावट सामने आई है।

Electoral bond : सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2024 में इलेक्टोरल बॉन्ड योजना पर रोक लगाकर राजनीतिक चंदे की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया था। इसके बाद माना जा रहा था कि पार्टियों की फंडिंग पर असर पड़ेगा और चंदे की रफ्तार धीमी होगी। लेकिन वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़े इससे उलट तस्वीर दिखाते हैं। चुनावी बॉन्ड बंद होने के बावजूद बीजेपी की आय में बड़ा उछाल दर्ज हुआ है, जबकि कांग्रेस को मिलने वाले दान में गिरावट सामने आई है।
चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, 2024-25 में बीजेपी को करीब ₹6,125 करोड़ का वालंटरी/स्वैच्छिक योगदान मिला। यह राशि पिछले वित्त वर्ष 2023-24 के ₹3,967 करोड़ की तुलना में करीब 54% अधिक है। मतलब एक साल में पार्टी के चंदे में ₹2,158 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है जो चुनावी बॉन्ड खत्म होने के बाद संभावित नुकसान की भरपाई से कहीं ज्यादा मानी जा रही है।
बीजेपी की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर बताया गया है कि कंपनियों और संगठनों से मिलने वाले दान में भी तेज वृद्धि हुई। आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में कॉरपोरेट डोनेशन ₹5,422 करोड़ रहा, जबकि 2023-24 में यह ₹1,885 करोड़ था। यानी चुनावी बॉन्ड बंद होने के बाद कॉरपोरेट दान का ग्राफ करीब तीन गुना तक बढ़ा हुआ नजर आया। गौरतलब है कि 2023-24 में बीजेपी को चुनावी बॉन्ड के जरिए करीब ₹1,686 करोड़ का चंदा मिला था, जिसे बॉन्ड स्कीम बंद होने के बाद फंडिंग के नए रास्तों से कवर किए जाने की चर्चा भी तेज है।
दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए 2024-25 का वित्तीय साल अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण नजर आया। रिपोर्ट में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक पार्टी की कुल आय ₹918 करोड़ रही, जबकि कुल खर्च ₹1,123 करोड़ तक पहुंच गया। सबसे बड़ा संकेत पार्टी को मिलने वाले चंदे में आई तेज गिरावट से मिलता है। 2023-24 में कांग्रेस को करीब ₹1,130 करोड़ का चंदा मिला था, लेकिन 2024-25 में यह घटकर लगभग ₹522 करोड़ रह गया। इसका मतलब है कि पार्टी की डोनेशन इनकम में करीब 54% की कमी दर्ज हुई। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि चुनावी बॉन्ड बंद होने का असर कांग्रेस पर ज्यादा पड़ा, क्योंकि 2023-24 में पार्टी ने बॉन्ड के जरिए करीब ₹828 करोड़ जुटाए थे।
भाजपा की फंडिंग में व्यक्तिगत दाताओं की हिस्सेदारी भी इस बार तेज़ी से बढ़ती दिखी। वित्त वर्ष 2024-25 में पार्टी को पर्सनल डोनर्स से ₹641 करोड़ मिले, जो 2023-24 के ₹240 करोड़ के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं। कुल मिलाकर 2024-25 में भाजपा की कुल आय ₹6,769 करोड़ दर्ज की गई, जो पिछले साल (2023-24) के ₹4,340 करोड़ से उल्लेखनीय रूप से अधिक है। आय के स्रोतों पर नजर डालें तो सबसे बड़ा हिस्सा स्वैच्छिक योगदान का रहा ₹6,125 करोड़। इसके अलावा पार्टी को बैंक ब्याज से ₹634 करोड़, शुल्क/सदस्यता से ₹5.7 करोड़ और अन्य आय से ₹4.5 करोड़ मिलने की बात रिपोर्ट में दर्ज है। साफ है कि चुनावी बॉन्ड के बाद भी पार्टी की फंडिंग मशीनरी ने डोनर बेस से लेकर फाइनेंशियल इनकम तक, दोनों स्तरों पर मजबूती दिखाई है।
खर्च के मोर्चे पर भी भाजपा ने 2024-25 में बड़ा दांव खेला। पार्टी का कुल खर्च ₹3,775 करोड़ दर्ज किया गया, जिसमें से ₹3,335 करोड़ सिर्फ चुनाव प्रचार पर झोंके गए,यह रकम 2023-24 के ₹1,754 करोड़ की तुलना में करीब दोगुनी है। उधर, कांग्रेस ने भी प्रचार खर्च बढ़ाया 2024-25 में ₹896 करोड़, जो पिछले साल ₹620 करोड़ था। भाजपा की प्रचार-लागत का बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर गया, जहां खर्च ₹1,125 करोड़ तक पहुंच गया (पिछले वर्ष ₹435 करोड़)। इसके अलावा हवाई यात्राओं पर ₹583 करोड़, उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता के रूप में ₹313 करोड़, होर्डिंग्स पर ₹107 करोड़, मोर्चों/रैलियों पर ₹91 करोड़ और बैठक/मीटिंग खर्च में करीब ₹52 करोड़ दर्ज किए गए। कुल मिलाकर आंकड़े यही संकेत देते हैं कि 2024-25 में प्रचार रणनीति के केंद्र में मीडिया-पुश, तेज मूवमेंट और ग्राउंड-मैनेजमेंट रहा, और इसी पर खर्च का बड़ा बजट तय हुआ।
भाजपा की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 की शुरुआत में पार्टी के जनरल फंड में ₹9,170 करोड़ का ओपनिंग बैलेंस दर्ज था। साल भर में आय–व्यय के बाद पार्टी ने ₹2,995 करोड़ का अधिशेष बनाया, जिसके चलते क्लोजिंग बैलेंस बढ़कर ₹12,164 करोड़ तक पहुंच गया। इतना ही नहीं, 31 मार्च 2025 की स्थिति में भाजपा के पास ₹9,996 करोड़ की राशि नकद/नकद समकक्ष के रूप में बताई गई है जो पिछले साल के ₹7,114 करोड़ के मुकाबले स्पष्ट बढ़त दिखाती है। Electoral bond