नाबालिग से पहचान छिपाकर होटल में किया दुष्कर्म, जांच में जुटी पुलिस

रत जिले के इच्छापोर इलाके से एक गंभीर आपराधिक मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपनी असली पहचान छुपाने के लिए कथित तौर पर दस्तावेजों में बदलाव कर फर्जी नाम का इस्तेमाल किया और इसी आधार पर होटल में कमरा लिया।

rape (3)
नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar24 Mar 2026 03:24 PM
bookmark

Love Jihad : गुजरात के सूरत जिले के इच्छापोर इलाके से एक गंभीर आपराधिक मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपनी असली पहचान छुपाने के लिए कथित तौर पर दस्तावेजों में बदलाव कर फर्जी नाम का इस्तेमाल किया और इसी आधार पर होटल में कमरा लिया।

पहचान छुपाकर बनाया भरोसा

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने लड़की से संपर्क बनाने के दौरान खुद को दूसरे नाम से परिचित कराया। बताया जा रहा है कि उसने आधार कार्ड में कथित रूप से बदलाव कर अपनी पहचान बदल ली, ताकि शक न हो और होटल में एंट्री आसानी से मिल सके। पुलिस के मुताबिक, आरोपी लड़की को बहाने से एक होटल में लेकर गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म की घटना हुई। घटना के बाद मामला सामने आने पर इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की।

नाबालिग होने से मामला और गंभीर

पीड़िता के नाबालिग होने के कारण मामला और गंभीर हो गया है। इस केस में संबंधित धाराओं के साथ-साथ पाक्सो एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने मेडिकल जांच और अन्य साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि आरोपी ने दस्तावेजों में किस तरह बदलाव किया और इसमें कोई अन्य व्यक्ति या नेटवर्क शामिल है या नहीं। अगर फर्जीवाड़ा साबित होता है, तो आईटी और फॉरजरी से जुड़े आरोप भी जोड़े जा सकते हैं।

आरोपी की तलाश जारी

घटना के बाद से आरोपी फरार बताया जा रहा है। पुलिस की टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही हैं और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति पर तुरंत भरोसा न करें और संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत सूचना दें। साथ ही, होटल संचालकों को भी पहचान पत्र की जांच में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। यह मामला न केवल एक गंभीर अपराध को दर्शाता है, बल्कि पहचान छुपाकर अपराध करने की बढ़ती प्रवृत्ति की ओर भी इशारा करता है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किा जाएगा।


संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

महिला आरक्षण को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी, लॉटरी से होगा सीटों का चयन

देश की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा महिला आरक्षण अब तय समय से पहले लागू हो सकता है। केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से ही इस व्यवस्था को अमल में लाने की तैयारी में जुटी है। इसके लिए 2023 में पारित कानून में संशोधन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

महिला आरक्षण पर नई तैयारी
महिला आरक्षण पर नई तैयारी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar24 Mar 2026 02:02 PM
bookmark

Women's Reservation : देश की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा महिला आरक्षण अब तय समय से पहले लागू हो सकता है। केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से ही इस व्यवस्था को अमल में लाने की तैयारी में जुटी है। इसके लिए 2023 में पारित कानून में संशोधन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। पहले यह माना जा रहा था कि महिला आरक्षण 2034 के आम चुनाव के बाद लागू होगा, लेकिन अब सरकार इसे अगले लोकसभा चुनाव से ही लागू करने के पक्ष में दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले सरकार विपक्षी दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। संभावना है कि संशोधन से जुड़ा विधेयक पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने लाया जाएगा और वहां से मंजूरी मिलने के बाद संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाएगा। सरकार की मंशा है कि 2011 की जनगणना को आधार बनाकर 2029 के चुनाव में ही महिला आरक्षण लागू कर दिया जाए। यदि ऐसा होता है, तो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों का पूरा गणित बदल सकता है।

15 साल बाद होगा रोटेशन

मिली जानकारी के अनुसार, लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में कुल सीटों की संख्या में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना है। इसके बाद नई कुल सीटों में 33 फीसदी हिस्सेदारी महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि किन सीटों को महिला आरक्षण के दायरे में रखा जाएगा। सरकारी हलकों में चर्चा है कि इसके लिए लॉटरी प्रणाली अपनाई जा सकती है। यानी जिन सीटों का चयन आरक्षण के लिए होगा, उनका निर्धारण ड्रॉ के जरिए किया जाएगा। एक बार किसी सीट पर महिला आरक्षण लागू हो गया तो वह 15 वर्षों तक उसी स्वरूप में बनी रह सकती है। इसके बाद रोटेशन की प्रक्रिया लागू की जाएगी।

एससी-एसटी सीटों पर भी लागू होगा आरक्षण का प्रावधान

महिला आरक्षण को लेकर एक बड़ा प्रश्न अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों को लेकर भी उठ रहा है। इस पर जो संकेत मिल रहे हैं, उनके अनुसार यह व्यवस्था वर्टिकल आरक्षण के रूप में लागू होगी। इसका मतलब यह है कि एससी और एसटी के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। वर्तमान में लोकसभा में अनुसूचित जाति के लिए 84 सीटें आरक्षित हैं। प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत इनकी संख्या बढ़कर 136 तक पहुंच सकती है। इसी तरह अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 47 से बढ़कर करीब 70 होने की संभावना जताई जा रही है। इन बढ़ी हुई सीटों के भीतर भी महिलाओं के लिए एक-तिहाई हिस्सा तय किया जाएगा। इस तरह वर्गवार महिला प्रतिनिधित्व की भी एक संरचना बन जाएगी।

दक्षिण के दलों का समर्थन क्यों अहम माना जा रहा है

महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयकों को संसद से पारित कराने के लिए सरकार ने राजनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। इसी सिलसिले में सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई गैर-कांग्रेसी विपक्षी नेताओं से बातचीत की। इस बैठक में समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव, एनसीपी-एसपी की नेता सुप्रिया सुले, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के संजय राउत और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता शामिल बताए गए। सरकारी सूत्रों के अनुसार, तेलुगु देशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस जैसे दक्षिण भारत के प्रमुख दलों ने भी इस प्रस्ताव को समर्थन देने के संकेत दिए हैं। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि सरकार ने सीटों के पुनर्निर्धारण और आरक्षण के अनुपात के लिए 2011 की जनगणना को आधार मानने का निर्णय लिया है। दक्षिणी राज्यों की लंबे समय से यह चिंता रही है कि नई जनगणना के आधार पर सीटों का बंटवारा होने पर उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में 2011 के आंकड़ों को आधार बनाए रखने का फैसला उनके लिए राहत की तरह देखा जा रहा है।

बदल सकती है प्रतिनिधित्व की तस्वीर

अगर यह प्रस्ताव 2029 से लागू होता है, तो भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी एक नए चरण में प्रवेश कर सकती है। लोकसभा और विधानसभाओं में उनकी संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, साथ ही सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का स्वरूप भी बदलेगा। हालांकि अंतिम तस्वीर तभी साफ होगी जब सरकार संशोधन विधेयक संसद में लाकर उसका विधायी रास्ता पूरा करेगी। Women's Reservation

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

लोकसभा में बड़े फेरबदल के संकेत, पुनर्गठन को लेकर तेज हुई चर्चा

केंद्र सरकार लोकसभा की संरचना में बड़ा बदलाव करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, सरकार लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने पर विचार कर रही है।

लोकसभा
लोकसभा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar24 Mar 2026 01:46 PM
bookmark

Lok Sabha : केंद्र सरकार लोकसभा की संरचना में बड़ा बदलाव करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, सरकार लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की तैयारी भी की जा रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो लोकसभा में करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं।

2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन की तैयारी

बताया जा रहा है कि इस पूरे प्रस्ताव का आधार 2011 की जनगणना के आंकड़े होंगे। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है। सरकार इस बदलाव को कानूनी रूप देने के लिए संसद के मौजूदा सत्र में संशोधन विधेयक ला सकती है। राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे इस विषय पर विपक्षी सांसदों के साथ चर्चा कर चुके हैं। वहीं मंगलवार को एनडीए नेताओं की बैठक में इस प्रस्ताव को लेकर आगे की रणनीति और रोडमैप पर मंथन होने की संभावना जताई जा रही है। अगर प्रस्तावित ढांचा लागू होता है, तो कई बड़े राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में सीटों का आंकड़ा काफी ऊपर जा सकता है।

संभावित सीट वृद्धि इस प्रकार हो सकती है

राज्य वर्तमान सीटें प्रस्तावित सीटें
उत्तर प्रदेश 80 120
बिहार 40 60
पश्चिम बंगाल 42 63
तमिलनाडु 39 59
महाराष्ट्र 48 72
कर्नाटक 28 42
केरल 20 30
आंध्र प्रदेश 25 38
गुजरात 26 39
राजस्थान 25 38
दिल्ली 7 11
ओडिशा 21 32
झारखंड 14 21



इस प्रस्ताव को लेकर पहले दक्षिण भारत के कई राज्यों की ओर से आशंकाएं जताई जाती रही हैं। उनका मानना था कि परिसीमन के बाद उत्तर भारत के अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को ज्यादा लाभ मिल सकता है। हालांकि अब जो संकेत मिल रहे हैं, उनके अनुसार सीटों में बढ़ोतरी का फार्मूला आनुपातिक आधार पर तय किया जा सकता है, ताकि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जा सके। कुल मिलाकर, अगर सरकार यह विधेयक लाती है और उसे संसद की मंजूरी मिलती है, तो भारतीय राजनीति में प्रतिनिधित्व का स्वरूप बदल सकता है।  Lok Sabha

संबंधित खबरें