
EPFO : अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़ी 7.5 करोड़ से अधिक सदस्यता रखने वाले कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण और लाभकारी सुविधा पेश की जा रही है। EPFO की नई पहल के तहत अब पीएफ खाते से ₹5 लाख तक की रकम निकासी की प्रक्रिया आसान और त्वरित हो जाएगी। पहले इस सीमा को ₹1 लाख तक सीमित रखा गया था, लेकिन अब EPFO इसे बढ़ाकर ₹5 लाख करने की योजना बना रहा है। यह कदम सदस्यों के जीवन में बड़ी सहूलत लाएगा, खासकर उन परिस्थितियों में जब तात्कालिक पैसों की जरूरत होती है।
EPFO का प्रस्ताव है कि वह पीएफ अकाउंट से एडवांस क्लेम के ऑटो सेटलमेंट की सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दे। इस बदलाव से EPFO के 7.5 करोड़ सदस्य आसानी से बिना किसी जटिलता के पांच लाख रुपये तक निकाल सकेंगे। यह निर्णय विशेष अवसरों जैसे शादी, शिक्षा, बीमारी, घर खरीदने या अन्य आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की सचिव, सुमिता डावरा ने इस प्रस्ताव को केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की कार्यकारी समिति की 113वीं बैठक में मंजूरी दी। डावरा का कहना है कि इस संशोधन से EPFO के सदस्य अपने जीवन के महत्वपूर्ण पल या जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए इस निकासी की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। हालांकि, इस प्रस्ताव को अब अंतिम मंजूरी के लिए CBT के पास भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद, EPFO सदस्य ऑटोमेटिक क्लेम के तहत ₹5 लाख तक की रकम निकाल सकेंगे।
EPFO की ऑटो सेटलमेंट प्रक्रिया में पिछले कुछ समय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मार्च 2025 तक, 2.16 करोड़ ऑटो-सेटलमेंट क्लेम निपटाए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है। एक साल पहले इस संख्या में केवल 89.52 लाख दावे निपटाए गए थे। इस सिस्टम के चलते अब लगभग 95% दावों का निपटान महज तीन दिनों में हो रहा है, जिससे प्रक्रिया तेज और सरल हो गई है।
EPFO के केंद्रीय आयुक्त रमेश कृष्णमूर्ति का कहना है कि ऑटो-सेटलमेंट प्रक्रिया ने दावों के निपटान को बहुत सरल और समय बचाने वाला बना दिया है। अब दावों के निपटान में काफी कम समय लग रहा है, और मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता भी घट गई है। इस प्रणाली को और अधिक सरल और उपयोगकर्ता फ्रेंडली बनाने के लिए EPFO निरंतर प्रयासरत है।
EPFO ने उन श्रेणियों का भी विस्तार किया है, जिनमें स्वचालित रूप से एडवांस क्लेम का निपटान किया जा सकता है। इन श्रेणियों में स्वास्थ्य समस्याओं, शिक्षा, विवाह, घर खरीदना, और अन्य व्यक्तिगत जरूरतें शामिल हैं। इसके साथ ही, सिस्टम में सुधार के कारण, दावों के रिजेक्ट होने की दर में भी कमी आई है। पिछले साल जहां रिजेक्ट दावों का प्रतिशत 50% था, वहीं इस साल यह घटकर केवल 30% रह गया है। EPFO :