कंपनी लोन लेते समय कम ब्याज दर दिखाकर ग्राहकों को आकर्षित करती है, लेकिन आगे चलकर प्रिंसिपल, इंटरेस्ट या पॉलिसी चेंज का हवाला देकर ब्याज दर बढ़ा देती है। ग्राहकों का यह भी कहना है कि जब वे इस संबंध में ऑनलाइन माध्यम से शिकायत दर्ज कराते हैं।

Home Loan : हर साल केंद्र सरकार बजट सत्र के दौरान आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से लोन और ब्याज दरों से जुड़े प्रावधान करती है, लेकिन इसके बावजूद होम लोन लेने वाले उपभोक्ताओं को राहत मिलती नहीं दिख रही है। आरोप है कि होम लोन देने वाली निजी कंपनियां किसी न किसी बहाने से हर साल ब्याज दर और लोन अमाउंट बढ़ा देती हैं।
पहले होम लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी सरकार या आरबीआई की नीतियों के अनुसार होती थी, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि जब वे होम लोन लेते हैं तो 8 से 9 प्रतिशत की ब्याज दर बताई जाती है, लेकिन कुछ समय बाद कंपनी की तरफ से अलग-अलग मुद्दों का हवाला देकर इसे 12 से 13 प्रतिशत तक बढ़ा दिया जाता है। कभी प्रिंसिपल अमाउंट में बदलाव का बहाना बनाया जाता है, तो कभी इंटरेस्ट रिवीजन के नाम पर ईएमआई बढ़ा दी जाती है। यह सारी प्रक्रिया उसी कंपनी द्वारा की जाती है, जबकि सरकार या आरबीआई की ओर से उस समय कोई आधिकारिक बढ़ोतरी नहीं की जाती।
बता दें कि इस मामले में सबसे ज्यादा शिकायतें हीरो हाउसिंग फाइनेंस (hero housing finance) को लेकर सामने आ रही हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कंपनी लोन लेते समय कम ब्याज दर दिखाकर ग्राहकों को आकर्षित करती है, लेकिन आगे चलकर प्रिंसिपल, इंटरेस्ट या पॉलिसी चेंज का हवाला देकर ब्याज दर बढ़ा देती है। ग्राहकों का यह भी कहना है कि जब वे इस संबंध में ऑनलाइन माध्यम से शिकायत दर्ज कराते हैं, तो कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती और न ही उन्हें संतोषजनक जवाब मिलता है।
बता दें कि ऑनलाइन शिकायत पोर्टल्स पर दर्ज मामलों में मुख्य रूप से दो कंपनियों के नाम सामने आ रहे हैं— हीरो हाउसिंग फाइनेंस (hero housing finance) और हीरा फाइनकॉर्प (Hira Fincorp)। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ये कंपनियां पारदर्शिता नहीं बरत रहीं और उपभोक्ताओं को लोन शर्तों की पूरी जानकारी नहीं दी जाती।
बता दें कि पीड़ित उपभोक्ताओं ने सरकार, आरबीआई और संबंधित नियामक संस्थाओं से मांग की है कि हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की कार्यप्रणाली की जांच की जाए और बिना सरकारी निर्देश के ब्याज दर बढ़ाने पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही ऑनलाइन शिकायतों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी मांग की जा रही है।
बता दें कि यदि सरकार या नियामक संस्थाएं हीरो हाउसिंग फाइनेंस के खिलाफ सख्त कदम उठाती हैं, तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। आरोप है कि किस तरह कंपनी योजनाबद्ध तरीके से आम जनता से अधिक ब्याज वसूल कर आर्थिक शोषण कर रही है, इसकी परतें खुल सकती हैं। Home Loan