इंडियन एक्सप्रेस के हिंदी संस्करण का नेतृत्व करेंगे सौरभ द्विवेदी

मीडिया इंडस्ट्री में इसे इंडियन एक्सप्रेस की उस रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके जरिए समूह अपनी अंग्रेजी पत्रकारिता की विश्वसनीयता और रिपोर्टिंग को हिंदी पट्टी के बड़े पाठक वर्ग तक और प्रभावी ढंग से पहुंचाना चाहता है।

सौरभ द्विवेदी
सौरभ द्विवेदी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar22 Jan 2026 02:20 PM
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Saurabh Dwivedi : वरिष्ठ पत्रकार सौरभ द्विवेदी अब द इंडियन एक्सप्रेस के नए हिंदी संस्करण का नेतृत्व करने जा रहे हैं। इस नई भूमिका में वे हिंदी प्लेटफॉर्म के सम्पूर्ण संपादकीय और ऑपरेशनल ढांचे की जिम्मेदारी संभालेंगेजिसमें वीडियो शोज, डिजिटल प्रोडक्ट्स और ई-पेपर भी शामिल होंगे। मीडिया इंडस्ट्री में इसे इंडियन एक्सप्रेस की उस रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके जरिए समूह अपनी अंग्रेजी पत्रकारिता की विश्वसनीयता और रिपोर्टिंग को हिंदी पट्टी के बड़े पाठक वर्ग तक और प्रभावी ढंग से पहुंचाना चाहता है।

इंडिया टुडे ग्रुप से 12 साल बाद विदाई

इससे पहले इसी महीने सौरभ द्विवेदी ने करीब 12 वर्षों के लंबे कार्यकाल के बाद इंडिया टुडे ग्रुप से इस्तीफा दिया था। वे द लल्लनटॉप के संस्थापक संपादक रहे हैं और बाद में इंडिया टुडे हिंदी के संपादक की जिम्मेदारी भी संभाली। उनके नेतृत्व में लल्लनटॉप ने हिंदी डिजिटल मीडिया में अलग पहचान बनाई और खासकर युवा दर्शकों के बीच मजबूत जुड़ाव खड़ा किया। सौरभ द्विवेदी ने 5 जनवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दो पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे की जानकारी दी थी। पहली पोस्ट में उन्होंने लल्लनटॉप के साथ यात्रा को याद करते हुए धन्यवाद कहा और आगे के लिए अध्ययन अवकाश तथा नए संकल्प की बात लिखी। दूसरी पोस्ट में उन्होंने एक तस्वीर के साथ एक हिंदी शेर साझा किया, जिसे उनके अगले पड़ाव की ओर इशारा माना गया।

लल्लनटॉप से बनाई डिजिटल पहचान

सौरभ द्विवेदी ने इंडिया टुडे ग्रुप में आज तक में फीचर्स एडिटर के तौर पर शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने कमलेश सिंह के साथ मिलकर द लल्लनटॉप की सह-स्थापना की। यही वह दौर रहा जब हिंदी डिजिटल दर्शक खासकर नए और युवा पाठकतेजी से एक नई किस्म की पत्रकारिता से जुड़ रहे थे, और लल्लनटॉप ने उसी बदलाव में अपनी जगह बनाई। सौरभ द्विवेदी के इस्तीफे के वक्त इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने उनके काम की सराहना करते हुए कहा था कि द्विवेदी ने द लल्लनटॉप को भारत के हिंदी हार्टलैंड के युवाओं के लिए भरोसेमंद और पसंदीदा मंच बनाया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सौरभ समूह के मौजूदा दायरे से आगे जाकर नई रचनात्मक संभावनाएं तलाशना चाहते थे और अब उनका अगला कदम उसी दिशा में देखा जा रहा है। Saurabh Dwivedi

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BJP में इन जिम्मेदारियों पर तय होगी आयु-सीमा, बैठक में हुआ मंथन

अध्यक्ष पद संभालते ही नितिन नवीन ने संगठन में युवाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में ठोस ढांचा बनाने का संकेत दिया है। जेन-जी और नई पीढ़ी की राजनीति पर देशभर में चल रही चर्चा के बीच भाजपा का यह कदम पार्टी के युवा-केंद्रित एजेंडे को और स्पष्ट करता है।

नितिन नवीन
नितिन नवीन
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar22 Jan 2026 01:56 PM
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BJP Organizational Changes : भाजपा ने संगठन की कमान 45 वर्षीय नितिन नवीन को सौंपकर साफ संकेत दिया है कि पार्टी अब नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव को तेज करना चाहती है। अध्यक्ष पद संभालते ही नितिन नवीन ने संगठन में युवाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में ठोस ढांचा बनाने का संकेत दिया है। जेन-जी और नई पीढ़ी की राजनीति पर देशभर में चल रही चर्चा के बीच भाजपा का यह कदम पार्टी के युवा-केंद्रित एजेंडे को और स्पष्ट करता है।

युवा मोर्चा में उम्र-सीमा तय करने का प्रस्ताव

पार्टी सूत्रों के मुताबिक नितिन नवीन के स्तर पर इस बात पर विचार हुआ है कि युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी ऐसे नेता को दी जा सकती है जिसकी उम्र 35 वर्ष या उससे कम हो। वहीं, राज्यों में युवा मोर्चा प्रमुख के लिए करीब 32 वर्ष के आसपास की आयु-सीमा पर भी मंथन हुआ है। उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि युवा शब्द सिर्फ नाम तक सीमित न रहे, बल्कि संगठन के भीतर वास्तविक युवा नेतृत्व को आगे लाया जाए।

पदाधिकारियों की बैठक में हुई चर्चा

इस दिशा में बुधवार को हुई पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में आयु-सीमा वाले विचार पर विस्तार से बात हुई। बैठक में यह भी संकेत मिला कि अगर संगठन सहमत हुआ, तो इसे ज्यादा सख्ती के साथ लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है। इस चर्चा में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी स्पष्ट किया कि युवाओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियों में अधिक जगह देने के लिए एक व्यवस्थित नीति जरूरी है।

5 राज्यों के चुनावों को लेकर रणनीतिक मंथन

बैठक में सिर्फ संगठनात्मक बदलाव ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुदुचेरी जैसे राज्यों के आगामी चुनावों को लेकर भी रणनीति पर चर्चा हुई। नितिन नवीन ने जोर दिया कि चुनावी मोर्चे पर बेहतर संवाद, मजबूत संगठन और सरकार के साथ प्रभावी समन्वय निर्णायक साबित होगा। साथ ही उन्होंने यह रेखांकित किया कि केंद्र सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों को जनता तक सही तरीके से पहुंचाने के लिए संगठन का तालमेल और अधिक मजबूत करना होगा। बैठक में एक अहम संदेश यह भी रहा कि मीडिया में बोलते समय अनुशासन और सावधानी बरती जाए। नितिन नवीन ने स्पष्ट किया कि पार्टी का पक्ष वही लोग रखें जिन्हें अधिकृत किया गया हो, ताकि अलग-अलग बयान पार्टी की लाइन को नुकसान न पहुंचाएं।

खास वर्गों तक पहुंच के लिए अलग टीम का विचार

बैठक के दौरान यह सुझाव भी सामने आया कि दिहाड़ी मजदूरों तक संपर्क और संवाद के लिए अलग टीम बनाई जाए। इसके अलावा विकसित भारत जैसे कार्यक्रमों/योजनाओं की जानकारी जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए भी विशेष सेल गठित करने पर विचार हुआ, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के बीच जाकर योजनाओं को सरल भाषा में समझाए। BJP Organizational Changes

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न कोई निर्देश, न कोई एनाउंसमेंट, बस आदत ने बचाई सफ़ाई

यह वायरल वीडियो केवल एक ट्रेन का दृश्य नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश भी है। यह बताता है कि साफ़ भारत कोई अभियान नहीं, बल्कि एक सोच और आदत है, जिसे नॉर्थ ईस्ट के लोग सालों से निभा रहे हैं।

North East train
वीडियो देख शर्म से झुक जाएंगी आंखें (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar22 Jan 2026 12:34 PM
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भारत में सार्वजनिक स्थानों पर सफ़ाई की समस्या कोई नई नहीं है। खासकर ट्रेनों में सफ़र के दौरान गंदगी और कचरा फैलना आम बात बन चुकी है। कई यात्रियों का मानना है कि सफ़ाई का काम केवल प्रशासन का है, जबकि वे खुद कचरा फैलाने से गुरेज नहीं करते। लेकिन अब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसने इस सोच को पूरी तरह चुनौती दे दी है।

नॉर्थ ईस्ट की ट्रेन में दिखा असली सिविक सेंस

बता दें कि इंस्टाग्राम पर @daily.passenger नाम के अकाउंट से शेयर किए गए वीडियो में आइज़ोल-गुवाहाटी ट्रेन का नज़ारा दिखाया गया है। वीडियो में यात्रियों को अपने कचरे को छोटे-छोटे बैगों में इकट्ठा करते हुए देखा जा सकता है। खास बात यह है कि यात्रियों ने कचरे के बैगों को अपनी सीट के पास टांग दिया है ताकि कचरा इधर-उधर न फैले और ट्रेन के डिब्बे में सफ़ाई बनी रहे।

वीडियो के साथ लिखा 

बता दें कि वीडियो के साथ लिखा गया है कि न कोई अनाउंसमेंट, न रेलवे का कोई निर्देश… बस एक आदत। साफ़ जगहें इसलिए साफ़ नहीं रहतीं क्योंकि सरकार सफ़ाई करती है, बल्कि इसलिए क्योंकि लोग परवाह करते हैं। वीडियो शेयर करने वाले यूज़र ने खुद को नॉर्थ इंडिया से बताया और लिखा कि यह नज़ारा देखकर उन्हें आत्ममंथन करने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि हम अक्सर गंदी ट्रेनों और सड़कों की शिकायत करते हैं, लेकिन अपने व्यवहार पर सवाल नहीं उठाते। उनका मानना है कि साफ़ जगहें सिर्फ़ प्रशासन की वजह से साफ़ नहीं रहतीं, बल्कि इसलिए क्योंकि लोग जिम्मेदारी नहीं निभाते हैं। उन्होंने कहा कि नॉर्थ ईस्ट से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।

सोशल मीडिया पर लोग हुए भावुक, मिली जमकर तारीफ

बता दें कि वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। एक यूज़र ने लिखा, “नॉर्थ ईस्ट के लोगों से हम सबको बहुत कुछ सीखना चाहिए।” दूसरे ने कहा कि यह इलाके की बात नहीं, लोगों की सिविक सेंस की बात है। तमिलनाडु से एक यूज़र ने कमेंट किया है कि ये देखकर अच्छा लगा, उम्मीद है पूरे भारत में यह अपनाया जाए। बस कचरा सही तरीके से डिस्पोज़ हो। एक अन्य यूज़र ने बचपन की सीख याद दिलाते हुए लिखा कि हमें बचपन से सिखाया गया है कि कचरा जेब या बैग में रखो और डस्टबिन में ही डालो।

यह वीडियो सिर्फ एक ट्रेन का दृश्य नहीं, बल्कि संदेश है

बता दें कि यह वायरल वीडियो केवल एक ट्रेन का दृश्य नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश भी है। यह बताता है कि साफ़ भारत कोई अभियान नहीं, बल्कि एक सोच और आदत है, जिसे नॉर्थ ईस्ट के लोग सालों से निभा रहे हैं।

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