नासिक से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां खुद को आध्यात्मिक गुरु बताने वाले अशोक खरात की कथित करतूतों ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।

Black Empire : महाराष्ट्र के नासिक से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां खुद को आध्यात्मिक गुरु बताने वाले अशोक खरात की कथित करतूतों ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) और क्राइम ब्रांच ने उसके ठिकानों पर छापेमारी कर कई ऐसे सबूत जुटाए हैं, जो उसके तथाकथित धार्मिक साम्राज्य की सच्चाई उजागर करते हैं।
एसआईटी की कार्रवाई के दौरान खरात के दफ्तर और अन्य ठिकानों से महिलाओं के कटे बाल, जानवरों के अवशेष, तंत्र-मंत्र से जुड़ी सामग्री और कई संदिग्ध किताबें बरामद हुईं। फोरेंसिक टीम ने इन सभी सामानों को जब्त कर जांच के लिए भेज दिया है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर उसके आफिस को सील कर दिया है।
जांच में सामने आया कि अशोक खरात लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए मनोवैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल करता था।
वह हॉट रीडिंग के जरिए पहले से जुटाई गई जानकारी का उपयोग करता था, जबकि कोल्ड रीडिंग में लोगों की बातों और भावनाओं को समझकर उन्हें भ्रमित करता था। इसी तरीके से वह खुद को चमत्कारी बाबा साबित कर लोगों का विश्वास जीतता और फिर उनका शोषण करता था।
पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी बाबा ने धार्मिक अनुष्ठानों और भविष्यवाणी के नाम पर 150 से ज्यादा महिलाओं का शारीरिक शोषण किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने उसका एचआईवी टेस्ट भी कराया, जिसकी रिपोर्ट फिलहाल निगेटिव बताई गई है।
हालांकि, जांच एजेंसियां अभी और पीड़ितों की पहचान करने में जुटी हैं।
सूत्रों के अनुसार, करीब डेढ़ साल पहले अशोक खरात को लकवे का दौरा पड़ा था। बताया जा रहा है कि यह हालत अत्यधिक शक्तिवर्धक दवाओं के सेवन के कारण हुई। इलाज के बाद उसकी जान तो बच गई, लेकिन आज भी उसके शरीर पर उस बीमारी का असर दिखाई देता है।
फिलहाल आरोपी 29 मार्च तक पुलिस कस्टडी में है। पूछताछ के दौरान उसका व्यवहार असामान्य बताया जा रहा है। वह लगातार मंत्र जाप करता रहता है और अपने ऊपर लगे आरोपों को धार्मिक प्रक्रिया बताकर बचने की कोशिश कर रहा है। उसने जांच के दौरान यह भी कहा कि, मेरे अंतर्मन ने मुझे धोखा दिया, अब मैं केवल अपने दिमाग की सुनूंगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अशोक खरात का हथियार लाइसेंस भी रद कर दिया है, जो उसे वर्ष 2012 में जारी किया गया था। पुलिस अब उसके नेटवर्क, सहयोगियों और आर्थिक स्रोतों की भी गहराई से जांच कर रही है। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि अंधविश्वास और आस्था के नाम पर कैसे लोगों को जाल में फंसाया जा सकता है। पुलिस की कार्रवाई से जहां एक बड़े फर्जी धार्मिक नेटवर्क का पदार्फाश हुआ है, वहीं समाज के लिए यह एक गंभीर चेतावनी भी है।