मुनव्वर राणा की ये मशहूर शायरी नहीं पढ़ी, तो क्या पढ़ा
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 12:17 AM
Munawwar Rana : उर्दू के मशहूर शायर मुनव्वर राणा का रविवार 14 जनवरी को लखनऊ में निधन हो गया। मुनव्वर राणा जीवन भर उर्दू साहित्य की बेहतरीन रचनाएं लिखते रहे। वह इतने मशहूर हुए कि उन्हें विदेश में होने वाले मुशायरों में भी शोहरत हासिल हुई। मुनव्वर राणा तो चले गए, लेकिन अपने पीछे छोड़ गए हैंअपनी कुछ मशहूर शायरियां, जो पढ़ने वालों के दिलों में हमेशा अमर रहेंगी ।
मुनव्वर राणा की मशहूर शायरियां
"चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है
मैंने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है "
"ज़रा सी बात है लेकिन हवा को कौन समझाये,
दिये से मेरी माँ मेरे लिए काजल बनाती है"
"यूँ तो अब उसको सुझाई नहीं देता लेकिन
माँ अभी तक मेरे चेहरे को पढ़ा करती है
वह कबूतर क्या उड़ा छप्पर अकेला हो गया
माँ के आँखें मूँदते ही घर अकेला हो गया"
"लिपट को रोती नहीं है कभी शहीदों से,
ये हौसला भी हमारे वतन की मांओं में है।
ये ऐसा कर्ज है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता,
मैं जब तक घर न लौटूं मेरी माँ सज़दे में रहती है।"
"घेर लेने को जब भी बलाएँ आ गईं,
ढाल बनकर माँ की दुआएँ आ गईं।"
"किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई,
मैं घर में सब से छोटा था मिरे हिस्से में माँ आई।"
"सिसकियाँ उसकी न देखी गईं मुझसे 'राना'
रो पड़ा मैं भी उसे पहली कमाई देते
मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू
मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना"
"ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर न लौटूँ मेरी माँ सजदे में रहती है
यारों को मसर्रत मेरी दौलत पे है लेकिन
इक माँ है जो बस मेरी ख़ुशी देख के ख़ुश है"
"तेरे दामन में सितारे होंगे तो होंगे ऐ फलक़
मुझको अपनी माँ की मैली ओढ़नी अच्छी लगी"
"मुहाजिर हैं मगर हम एक दुनिया छोड़ आए हैं.
तुम्हारे पास जितना है, हम उतना छोड़ आए हैं।"
देशविदेशकी खबरों से अपडेट रहने लिए चेतना मंचके साथ जुड़े रहें।देश-दुनिया की लेटेस्ट खबरों से अपडेट रहने के लिए हमें फेसबुकपर लाइक करें या ट्विटरपर फॉलो करें।