माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी (Prime Minister Narendra Modi) ने आज विवादास्पद तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है। इस पर टिप्पणी करने से पहले मैं एक संस्मरण सुनाना चाहूंगा। करीब 6 महीने पहले कृषि कानूनों पर एक समाचार चैनल पर डिबेट सुन रहा था। चैनल का एंकर और भाजपा प्रवक्ता जोर देकर कह रहे थे कि सरकार कृषि कानूनों पर 1 इंच भी पीछे नहीं हटेगी और ये बिल किसी भी सूरत में वापस नहीं होंगे। विपक्षी पार्टी के प्रवक्ता ने एक किस्सा सुनाते हुए अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि एक बार एक चोर को पकड़ कर थाने में लाया गया। कोतवाल ने कहा कि या तो तुम सिर पर दस जूते लगवा लो या दस प्याज खा लो । चोर ने कहा कि मैं प्याज खा लूंगा। 10 प्याज टोकरी में सामने रख दी गई। चोर ने एक प्याज खाई तो उसकी आंखों में आंसू आ गए। चोर ने कहा कि मैं जूते ही खा लूंगा। सिपाही ने धड़ाम से उसके सिर में जूता मारा तो उसके सिर में तगड़ी झनझनाहट पैदा हुई। चोर ने कहा कि प्याज ही खा लूंगा। उसे फिर प्याज दे दी गई। इस तरह चोर ने 10 प्याज भी खाए और 10 जूते भी खाए। प्रवक्ता ने कहा कि सरकार के साथ भी यही होने वाला है। यह सरकार जूते भी खाएगी और प्याज भी खाएगी।
आज मुझे उस प्रवक्ता की बात सही लग रही है। 10 महीने के आंदोलन और 700 किसानों की शहादत के बाद सरकार ने ये कानून वापस लिए हैं। इस बीच सरकार ने किसानों और किसान समर्थकों की कितनी गालियां खाई हैं यह सभी को पता है। इस बीच किसानों पर भी क्या-क्या अत्याचार न हुए। लाठियों से पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी गई, गाडिय़ों से रौंद दिया गया, जेलों में डाला गया, सड़कों पर कीलें और कंटीले तार लगाकर रोका गया, भूखे-प्यासे मरने को विवश किया गया। तब जाकर सरकार ने ये कानून वापस लिये हैं।
अब सरकार के प्रवक्ता और सरकार समर्थक मीडिया इसके लिए भी प्रधानमंत्री का महिमामंडन करने में लगा हुआ है कि देखो-देखो मोदी जी का दिल कितना बड़ा है। उन्होंने कृषि कानून वापस ले लिये। यह तो वही बात हुई कि जब थूका जा रहा था तो थूकने के फायदे बता रहे थे, अब चाटा जा रहा है तो चाटने के फायदे गिना रहे हैं। इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कहना चाहूंगा क्योंकि हमारे पाठक स्वयं प्रबुद्ध और समझदार हैं।