Farmers Protest : 99वें दिन से जारी है आंदोलन, छावनी में तब्दील प्राधिकरण
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 05:49 PM
नोएडा । भारतीय किसान परिषद के नेतृत्व में सेक्टर-6 स्थित प्राधिकरण कार्यालय पर चल रहा किसानों का आंदोलन(Farmer Protest ) आज 99वें दिन में प्रवेश कर गया है। कल प्राधिकरण कार्यालय पर हुए तनाव को देखते हुए आज प्राधिकरण कार्यालय को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। आज भी बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं व युवा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर एकत्र थे।
अपनी मांगों को लेकर किसानों का धरना प्रदर्शन आज भी जारी रहा। कल हुए वाद-विवाद के चलते आज प्राधिकरण को चारों तरफ से पुलिस छावनी में तब्दील किया गया है। वहीं अभी भी प्राधिकरण के सभी प्रवेश द्वार पर ताला लटका हुआ है। सभी गेटों पर बड़ी संख्या में किसान व महिलाएं बैठी हुई हैं। किसान आंदोलन को देखते हुए आज ग्रेटर नोएडा के भी कई स्थानों के थाना प्रभारी और पुलिस बल यहां मौजूद था। किसानों ने आज सुबह भारी पुलिसबल की मौजूदगी में हवन किया।
इस दौरान किसान नेता सुखबीर खलीफा ने कहा कि किसान अपने हक के लिए लड़ रहे हैं। उनकी यह लड़ाई आने वाली पीढ़ी के लिए भी है। जब तक किसानों को उनके सभी अधिकार नहीं मिल जाते उनका यह संघर्र्ष जारी रहेगा। प्राधिकरण व पुलिस किसानों के इस आंदोलन को तोडऩे के लिए जो भी प्रयास कर रही है उसको किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। किसानों ने आरोप लगाया कि पिछले साढ़े चार साल से नोएडा में किसानों के घर व खेत की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। किसान मजबूरी में अपनी जमीन भी नहीं बेच पा रहा है। धरनारत किसानों ने जनप्रतिनिधियों के रवैये को लेकर भी नाराजगी जताई।
इस अवसर पर खलीफा के अलावा सुरेंद्र प्रधान, अशोक चौहान, उदल शास्त्री ,राजेंद्र यादव ,अतुल यादव, सोनू यादव, उदल शास्त्री सहित बड़ी संख्या में महिलाएं व युवा धरनास्थल पर मौजूद हैं।
किसानों से पहले पहुंचे कर्मचारी
आज दूसरे दिन भी नोएडा प्राधिकरण के सभी कर्मचारी सुबह प्राधिकरण कार्र्यालय पहुंच गए तथा अपना विभागीय कामकाज शुरू किया। उन्हें किसानों की ओर से प्रवेश को लेकर किसी भी तरीके के विरोध का सामना नहीं करना पड़ा।नोएडा एंप्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष चौधरी कुशल पाल तथा महासचिव कपिल शर्मा के आह्वान पर सभी कर्मचारी आज सुबह 8:30 बजे ही नोएडा प्राधिकरण पहुंच गए।
दरअसल जनहित के कार्यों के मद्देनजर आज नोएडा प्राधिकरण के सभी कर्मचारियों को सुबह 8:30 बजे नोएडा पहुंचने के निर्देश दिए गए थे। उसके मुताबिक सभी कर्मचारी समय पर प्राधिकरण पहुंच गए तथा अंदर प्रवेश करके अपना कामकाज संभाल लिया। उधर कल की घटना के बाद से आज सुबह से ही प्राधिकरण पर भारी संख्या में पुलिस बल की मुस्तैदी रही जिसके कारण किसी भी कर्मचारी को प्राधिकरण में प्रवेश को लेकर किसानों की ओर से किसी विरोध का सामना नहीं करना पड़ा।
नोएडा के किसानों के धैर्य का इम्तहान लेना बंद करें: कर्मवीर नागर
समाजसेवी कर्मवीर नागर प्रमुख ने नोएडा प्राधिकरण को चेताया है कि वह किसानों के धैर्य का इम्तहान लेना बंद करें। अंग्रेज मानसिकता के अधिकारी हठ छोडक़र किसानों की मांगों को मान लें।
कर्मवीर नागर ने अपने एक बयान में कहा कि अगर सन् 1976 में नोएडा प्राधिकरण गठन के बाद से अब तक 45 साल के लंबे सफऱ में नोएडा प्राधिकरण की किसान विरोधी कारगुज़ारियों के विरुद्ध समय-समय पर हुए किसान आंदोलनों पर नजर डालें तो सुखबीर खलीफा के नेतृत्व में चल रहा है किसान आंदोलन आज तक का वह आंदोलन है जो किसी प्रलोभन के परवान नहीं चढ़ा है। भले ही नोएडा प्राधिकरण रहा हो अथवा ग्रेटर नोएडा या यमुना प्राधिकरण इन सब की कारगुजारी और उच्च पदों पर बैठे लालफीताशाह अधिकारियों की प्रवृत्ति सदैव अंग्रेज शासनकाल से मेल खाती रही हैं। सदैव से हर बार प्राधिकरण अधिकारियों का प्रयास आंदोलन के नेतृत्व को प्रलोभन देकर समाप्त कराने का रहता है। मुझे यह कहने में भी कोई गुरेज नहीं है कि भोले-भाले किसान और आम जनता की ताकत का दुरुपयोग कुछ आंदोलनकारी नेता प्राधिकरण के अधिकारियों की कृपा से रातों-रात धनाढ्य बनते देखे गए हैं जो निजी स्वार्थवश गौतमबुद्धनगर की जनता के भरोसे को तोडक़र बाद में राजनीतिक लालसा में जनता में भरोसा ढूंढते रहे हैं। लेकिन यह जनता है भले ही जुबां न खोलें लेकिन सब जानती है। ऐसे लोगों की काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती है।
श्री प्रमुख ने कहा कि यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि अगर नेतृत्व सुखबीर खलीफा जैसा निस्वार्थ और मजबूत हो तो अंग्रेजी शासन काल की फूट डालो, राज करो जैसी नीति का भी इस्तेमाल करने से अधिकारी बाज नहीं आते। इसी नीति के तहत पिछले कई दिनों से प्राधिकरण के अधिकारी प्राधिकरण कर्मचारियों और आंदोलनकारी किसानों के बीच तनाव पैदा करने की गंदी राजनीति का खेल खेलने का प्रयास कर रहे हैं।
इतिहास इस बात का साक्षी है कि नोएडा प्राधिकरण के विरुद्ध आज तक इतना मजबूत और संगठित आंदोलन कभी नहीं हुआ। इस आंदोलन ने निरंकुश अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। इसीलिए नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी किसानों की जायज मांगों के समर्थन में चल रहे आंदोलन को कमजोर करने के लिए तरह तरह के ठठपंच रच रहे हैं। प्राधिकरण के कर्मचारियों को भी निरंकुश अधिकारियों के बहकावे में नहीं आना चाहिए क्योंकि प्राधिकरण के विरुद्ध आंदोलनकारी किसान कर्मचारी परिवारों के ही लोग हैं और इस आंदोलन की सफलता से सभी के हित जुड़े हुए हैं। किसान की कोई जाति नहीं होती इसलिए मैं आगाह करना चाहूंगा कि हमें उन विघटनकारी तत्वों पर भी नजर रखनी होगी जो प्राधिकरण के अधिकारियों के दलाल बनकर जातीयता का बीज बो कर आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास कर सकते हैं। नोएडा वासियों को प्राधिकरण के उच्च पदों पर आसीन लालफीताशाही और अंग्रेज मानसिकता से ओतप्रोत अधिकारियों से सावधान करना चाहूंगा कि वह इनके किसी तरह के बहकावे में न आयें अन्यथा भविष्य में प्राधिकरण की तानाशाही नीतियों के विरुद्ध कोई भी आंदोलन करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा।
उन्होंने कहा कि आज के स्वार्थी युग में सुखबीर खलीफा जैसा निस्वार्थ और पारदर्शी नेतृत्व मिलना बहुत मुश्किल है और यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि शायद ईश्वरीय शक्ति ने ही सुखबीर खलीफा को नोएडावासियों के हितों की लड़ाई लडऩे के लिए यह जज्बा दिया है। नोएडा के किसानों की यह लड़ाई आर-पार की लड़ाई है। प्राधिकरण के अधिकारियों की बौखलाहट यह बता रही है कि निश्चित ही यह लड़ाई मंजिल और लक्ष्य की तरफ बढ़ रही है। प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा प्राधिकरण के कर्मचारियों को किसानों के विरुद्ध भडक़ाने का प्रयास इस बात की तरफ साफ इशारा कर रहा है कि अब नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी आपकी ताकत और संगठन के सामने अपने चालबाज रुपी अंतिम हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए यह जज्बा कम नहीं होने देना है। इतिहास और अनेक दृष्टांत इस बात के साक्षी हैं कि जब जब लक्ष्य हासिल करने की आखिरी सीढ़ी तक हौसला बुलंद रहा है तब-तब लोगों ने लक्ष्य और मंजिलें हासिल की हैं। वैसे भी यह वर्ष किसानों की जीत का वर्ष साबित हो रहा है इसलिए होंसला और धैर्य बनाए रखें। जनप्रतिनिधि अगर किसानों की मांगों और आंदोलन से सहमत हैं तो जनप्रतिनिधियों को आगे आकर सरकार पर दबाव बनाना चाहिए।