जीव विज्ञानी जितने भी एक्सपेरिमेंट करते हैं अधिकतर बंदर और चूहा, मेंढक आदि पर करते हैं। किसी भी नई इजाद की गई औषधि का प्रयोग सबसे पहले इन्हीं जीवों पर किया जाता है। अगर परिणाम सकारात्मक होते हैं, तो हम मनुष्यों की रोग मुक्ति के लिए ही वही औषधि इस्तेमाल में लाई जाती है। यह तो हुई वह बात जो प्रत्यक्ष है और लगभग सभी जानते हैं लेकिन सच्चाई यह भी है कि हमारे आपके ऊपर भी तरह-तरह के प्रयोग किए जाते हैं और हमें पता तक नहीं चलता है या फिर पता तब चलता है जब प्रयोग हो चुका होता है तथा उसके प्रभाव से हमारा जीवन प्रभावित होने लगता है। इस तरह के प्रयोग, इस तरह के एक्सपेरिमेंट सत्ता में बैठी सरकार करती हैं और खूब करती हैं।
एक बार एक वैज्ञानिक ने मेंढक पर एक प्रयोग किया। वैज्ञानिक ने एक मेंढक की चार टांगों में से एक टांग काट दी और आदेश दिया 'उछलो', मेंढक तीन इंच उछला। वैज्ञानिक ने दूसरी टांग काटने के बाद मेंढक से उछलने को कहा तो मेंढक दो इंच उछला। फिर मेंढक की तीसरी टांग काट दी गई तो वह मात्र एक इंच उछला। वैज्ञानिक ने मेंढक की चौथी टांग काटने के बाद उसे उछलने का इशारा किया तो मेंढक नहीं उछला। इस पर वैज्ञानिक ने अपने शोध का नतीजा लिखा - 'जब मेंढक की चारों टांगे काट दी जाती हैं, तो वह बहरा हो जाता है और कोई आदेश नहीं मानता है।'
इसी तरह के तमाम प्रयोग सत्ताधारी जनता पर करते रहते हैं और उल्टे सीधे निष्कर्ष निकालकर लोगों को भ्रमित करते हैं। जो सत्ता में नहीं होते हैं, वह भी सत्ता में आने के लिए इसी तरह के प्रयोग करने में पीछे नहीं रहते हैं। सत्ताधारी पार्टियां ऐसे प्रयोग भी करती हैं, जिनका कोई अर्थ नहीं होता है। लेकिन सत्ता में बैठे नेता उस निरर्थक प्रयोग को भी महान उपलब्धि के रूप में प्रचारित-प्रसारित करके लोगों को भ्रमित करने का अभियान चलाते हैं।
एक वैज्ञानिक ने अविष्कार किया और अपने शोध का खुलासा करने के लिए पत्रकार सम्मेलन बुलाया। वैज्ञानिक ने पत्रकारों के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा - 'मैंने जो आविष्कार किया है, उस के माध्यम से दीवार के आर-पार देखा जा सकता है।' पत्रकारों को आश्चर्य हुआ और उन्होंने आविष्कार के बारे में और जानने की इच्छा व्यक्त की। वैज्ञानिक ने बड़े गर्व से कहा - 'मैंने खिड़की का आविष्कार किया है और आप उस के माध्यम से दीवार के आर-पार बखूबी देख सकते हैं। पत्रकारों ने बाल नोच लिए और उनका मन वैज्ञानिक का मुंह नोचने का हुआ, लेकिन क्योंकि प्रेस कान्फ्रेंस के शुरू में ही सबके सामने शानदार नाश्ता परोसा जा चुका था इसलिए सब खामोश रहे। परंतु उनमें से एक ने अखबारों में उस वैज्ञानिक कड़े शब्दों में खुलकर आलोचना की लेकिन बहुतेरों ने वैज्ञानिक के आविष्कार को युग प्रवर्तक उपलब्धि के रूप में स्थापित किया। जनता कंफ्यूज हो गई और आपस में वैज्ञानिक के पक्ष-विपक्ष में उलझ गई।
जनता रूपी मेंढक पर सत्ताधारी हमेशा से प्रयोग करते आ रहे हैं, कर रहे हैं और अनंत काल तक करते रहेंगे। प्रयोगों द्वारा जनता को ही बहरा बताते रहेंगे, उस मेंढक की तरह जो चारों टांगें कटने के बाद चल नहीं पाता है, क्योंकि वह चल नहीं सकता है, लेकिन कहा जाता है - 'मेंढक तो बेहरा हो गया है'। खिड़की जो तब से हमारे साथ चली आ रही है, जब से मकान बनने शुरू हुए हैं। लेकिन सत्ताधारी खिड़की को अपनी उपलब्धि, अपना अविष्कार बताकर जनता को मूर्ख बना रहे हैं। आपको ऐसा नहीं लगता क्या?