नि:संकोच : कोई न कोई शिकायत तो आपको भी अवश्य होगी!
भारत
RP Raghuvanshi
28 Nov 2025 01:36 PM
विनय संकोची
मुझे यह शिकायत है कि शिकायतों पर कोई खास कार्यवाही नहीं होती है। शिकायत एक कान से सुनी और दूसरे से निकाल दी जाती हैं। सच तो यह है कि लोगों को सरकारी विभागों, सरकारी अफसरों और कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों तथा शासन व्यवस्था के तमाम अंगों से इतनी शिकायतें होती हैं और हैं कि उनके निस्तारण के लिए बाकायदा एक 'शिकायत निस्तारण मंत्रालय' बनाए जाने की आवश्यकता है। 'शिकायत निस्तारण मंत्रालय' से होने वाली शिकायतों को कौन सुनेगा कौन शिकायतों का समाधान देगा, यह आगे की बात है।
तरह-तरह के सर्वे देश में होते रहते हैं लेकिन आज तक कोई सर्वे ऐसा नहीं हुआ जिसमें यह पता लगाया गया हो कि देश में ऐसे कितने लोग हैं जिन्हें शासन व्यवस्था से शिकायत है, शिकायत कितनी गंभीर है और शिकायत करने वालों में से कितनों की शिकायतों का समाधान हुआ। यह शोध का विषय है और इस पर काम किए जाने की आवश्यकता है। मुझे व्यक्तिगत रूप से ऐसा लगता है कि यदि सरकार देश की जनता से अपनी शिकायत लिखित में भेजने का विनम्र अनुरोध करे, तो इतनी शिकायत आएंगी, इतनी शिकायत आएंगी कि पढ़ना तो दूर उन्हें सहेज कर रखना तक मुश्किल हो जाएगा। इन शिकायती पत्रों में उन महानुभावों की चिट्ठियां भी जरूर होंगी, जो सरकार अथवा नेता विशेष की आलोचना करने पर माथा फोड़ने को तैयार रहते हैं। कोई व्यक्ति ऐसा नहीं है, जिसे सरकार, सरकारी विभाग, सरकारी अफसरों-कर्मचारियों से कोई न कोई शिकायत न हो। हां-अगर कोई विचार शून्य ही हो तो बात अलग है।
अगर मैं यह दावा करूं कि आम जनता को छोड़ो तमाम कर्मचारियों, अफसरों के साथ ग्राम प्रधानों, सभासदों, पार्षदों, चेयरमैनों, मेयरों, विधायकों, सांसदों, मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों, यहां तक कि स्वयं प्रधानमंत्री को भी व्यवस्था से कोई न कोई शिकायत अवश्य होगी, तो क्या यह गलत होगा। अगर सब सच बोलेंगे तो मेरी बात की सौ प्रतिशत पुष्टि हो जाएगी।
गरीब को तो शासन प्रशासन से क्या खुद अपने आप तक से भी शिकायत रहती है, लेकिन जो रईस हैं, कमाई के मामले में देश में नीचे से ऊपर तक की सीढ़ी पर बैठे चैन की सीटी बजाते नजर आते हैं, उनमें से शायद ही कोई होगा तो दिल पर हाथ रख कर दावा करे कि उसे सरकार से कोई शिकायत नहीं है।
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि सब की शिकायतों को दूर नहीं किया जा सकता है, यह किसी भी सूरत में संभव नहीं है। लेकिन इतना तो किया ही जा सकता है कि शासन अपनी टेढ़ी बांकी व्यवस्था में सुधार कर ले। आप सोचिए जहां कुछ सौ रुपए की पेंशन पाने के लिए विधवा और वृद्धों को रिश्वत देनी पड़े, जहां अपने प्रिय की मृत्यु पर उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए घूस भरनी पड़े, जहां छोटे-बड़े सही काम को भी करवाने के लिए धक्के खाने पड़ें और दाम भी खर्च करने पड़ें, जहां अपनी वोट से चुने हुए जनप्रतिनिधियों से मिलने के लिए चक्कर लगाने पड़ें, वहां किसे शिकायत नहीं होगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय आदि तमाम क्षेत्रों में से एक भी ऐसा नहीं है जिसमें शिकायतों का अंबार न लगे हों। शिकायत करने वालों को प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। अनेक मामलों में शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जाता है और इतना दबाव बनाया जाता है कि आदमी मजबूर होकर शिकायत वापस लेकर घर बैठ जाता है।
मेरी इस शिकायती टिप्पणी पर बहुत लोग होंगे जो कह सकते हैं - 'इसे तो हमेशा शिकायत ही रहती है, इसकी तो सोच ही नकारात्मक है, जो अच्छा हो रहा है इसे दिखाई नहीं देता।'...तो इसके उत्तर में मेरा यह निवेदन है कि जो अच्छा हो रहा है, वह मुझे तो दिखाई देता है लेकिन तमाम लोग हैं, जिन्हें जो गलत होता है, गलत हो रहा है वह भी अच्छा ही नजर आता है।