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भारत में कुल प्रजनन दर (टोटल फर्टिलिटी रेट (टीएफआर) लगातार गिर रही है और अब यह 2.1 के रिप्लेसमेंट लेवल से भी नीचे पहुंच चुकी है।

Fertility Rate : भारत में कुल प्रजनन दर (टोटल फर्टिलिटी रेट (टीएफआर) लगातार गिर रही है और अब यह 2.1 के रिप्लेसमेंट लेवल से भी नीचे पहुंच चुकी है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश का औसत टीएफआर लगभग 1.9 है, यानी औसतन एक महिला अब दो बच्चों से भी कम जन्म दे रही है। हालांकि यह गिरावट पूरे देश में एक जैसी नहीं है। उत्तर भारत के कुछ राज्य जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान अब भी रिप्लेसमेंट लेवल से ऊपर हैं, जबकि दिल्ली और दक्षिण भारत के लगभग सभी राज्य काफी नीचे जा चुके हैं।
Fertility Rate
* बिहार: लगभग 2.8-2.9 (सबसे अधिक)
* उत्तर प्रदेश: 2.4-2.6
* मध्य प्रदेश / राजस्थान: 2.3-2.4
* दिल्ली: लगभग 1.2 (सबसे कम)
* केरल / तमिलनाडु / पश्चिम बंगाल: लगभग 1.3-1.7
Fertility Rate
इन राज्यों में कई सामाजिक और आर्थिक कारण मिलकर जन्म दर को ऊंचा बनाए रखते हैं-
* ग्रामीण आबादी का बड़ा हिस्सा
* महिलाओं की औसतन कम शिक्षा और कम नौकरी भागीदारी
* जल्दी शादी और लंबा प्रजनन काल
* गरीबी और बच्चों को आर्थिक सहारा मानने की सोच
* बेटा प्राथमिकता की पारंपरिक मानसिकता
इन कारणों से परिवार का आकार अभी भी बड़ा बना हुआ है।
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इसके पीछे आधुनिक सामाजिक-आर्थिक बदलाव प्रमुख कारण हैं-
* महिलाओं की अधिक शिक्षा और जागरूकता
* देर से शादी और करियर फोकस
* शहरी जीवन की उच्च लागत (हाउसिंग, शिक्षा, हेल्थ)
* छोटे परिवार की सामाजिक स्वीकार्यता
* मजबूत परिवार नियोजन सेवाएं और स्वास्थ्य व्यवस्था
इन राज्यों में छोटा परिवार, बेहतर जीवन की सोच अब सामान्य बन चुकी है। यह अंतर सिर्फ जनसंख्या का नहीं, बल्कि विकास मॉडल का फर्क भी दिखाता है। जहां उत्तर भारत अभी संक्रमण के दौर में है, वहीं दक्षिण और शहरी भारत लो-फर्टिलिटी सोसाइटी की ओर बढ़ चुका है।
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