पूनम पांडे के कारण चर्चा का विषय बन गई मंदोदरी
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 11:23 AM
चर्चित
फिल्म
स्टार
पूनम
पांडे
को
मंदोदरी
के
किरदार
से
हटा
दिया
गया
है।
दिल्ली
की
प्रसिद्ध
लव
-
कुश
रामलीला
में
चर्चित
फिल्म
स्टार
पूनम
पांडे
मंदोदरी
का
किरदार
नहीं
निभा
पाएंगी।
दिल्ली
के
लाल
किला
मैदान
में
आयोजित
होने
वाली
लव
-
कुश
रामलीला
कमेटी
ने
साधु
-
संतों
के
विरोध
के
कारण
पूनम
पांडे
को
रामलीला
से
बाहर
का
रास्ता
दिखा
दिया
है।
पूनम
पांडे
के
स्थान
पर
मंदोदरी
का
रोल
करने
के
लिए
रामलीला
कमेटी
जल्दी
ही
नए
कलाकार
के
नाम
की
घोषणा
कर
देगी।
पूनम
पांडे
के
कारण
मंदोदरी
के
रोल
पर
मचे
बवाल
के
कारण
अचानक
मंदोदरी
का
किरदार
बड़ी
चर्चा
का
विषय
बन
गया
है।
हर
कोई
इंटरनेट
पर
मंदोदरी
के
विषय
में
जानने
का
प्रयास
कर
रहा
है।
Mandodari
भगवान श्रीराम के युग में रावण की पत्नी थी मंदोदरी
पूनम
पांडे
के
कारण
चर्चा
में
आए
मंदोदरी
के
किरदार
के
विषय
में
बहुत
ही
कम
चर्चा
होती
रही
है।
इसे
संयोग
ही
कहा
जाएगा
कि
चर्चित
फिल्म
स्आर
पूनम
पांडे
के
कारण
मंदोदरी
का
किरदार
बड़ी
चर्चा
का
विषय
बन
गया
है।
भगवान
श्रीराम
के
युग
के
लंका
के
राजा
रावण
का
नाम
सबने
सुना
है।
लंका
के
राजा
रावण
की
पटरानी
थी
मंदोदरी।
भारत
में
ही
नहीं
पूरी
दुनिया
भर
में
अनेक
नामों
से
रामायण
लिखी
गई
है।
सबसे
ज्यादा
चर्चा
बाल्मीकि
रामायण
तथा
संत
तुलसीदास
की
रामायण
रामचरित
मानस
की
होती
है।
किसी
भी
रामायण
में
लंकापति
रावण
की
पत्नी
मंदोदरी
के
किरदार
को
अधिक
महत्व
नहीं
दिया
गया
है।
यही
कारण
है
कि
भारत
के
कोने
-
कोने
में
होने
वाली
रामलीलाओं
मेें
भी
मंदोदरी
के
किरदार
को
कोई
खास
महत्व
नहीं
दिया
जाता
है।
मंदोदरी
के
किरदार
को
बहुत
ही
छोटे
से
आकार
में
दिखाया
जाता
है।
रामलीला
में
मंदोदरी
को
रावण
को
समझाते
हुए
दिखाया
जाता
है।
मंदोदरी
रावण
को
समझाती
है
कि
राम
को
साधारण
राजा
मानकर
उनकी
पत्नी
का
अपहनरण
करके
रावण
ने
अपने
जीवन
की
सबसे
बड़ी
भूल
की
है।
रावण
मंदोदरी
को
मूर्ख
स्त्री
कहकर
उसका
अपमान
करता
हुआ
दिखाया
जाता
है।
Mandodari
पुराणों में अप्सरा बताया गया है मंदोदरी को
रामायण
तथा
रामलीलाओं
में
छोटे
किरदार
के
रूप
में
नजर
आने
वाली
मंदोदरी
का
किरदार
बहुत
ही
विशाल
किरदार
है।
पुराणों
में
मंदोदरी
के
विषय
में
अलग
पहचान
बताई
गई
है।
पुराणों
में
मंदोदरी
को
हेमा
अप्सरा
,
दैत्यराज
मय
की
पुत्री
तथा
भगवान
विष्णु
के
शरीर
पर
लगे
हुए
चंदन
से
उत्पन्न
होने
वाली
सुंदर
कन्या
के
रूप
में
वर्णित
किया
गया
है।
इसी
प्रकार
उत्तररामायण
में
वर्णन
आता
है
कि
मयासुर
को
बहुत
प्रार्थना
के
बाद
यह
कन्या
मिली
थी
,
जिसे
देखकर
रावण
ने
विवाह
किया
और
लंका
ले
गया।
एक
और
कथा
ऐसी
भी
आती
है
कि
मय
दानव
ने
खुद
अपनी
बेटी
मंदोदरी
का
विवाह
रावण
से
कराया
और
दहेज
स्वरूप
लंका
भेंट
दी।
Mandodari
वाल्मीकि
रामायण
कहती
है
कि
मंदोदरी
इतनी
सुंदर
थीं
कि
जब
हनुमान
रावण
की
रानियों
के
बीच
उन्हें
देखते
हैं
तो
एक
पल
के
लिए
उन्हें
सीता
समझ
बैठते
हैं।
फिर
वह
जब
उन्हें
पलंग
पर
चैन
से
सोता
हुआ
देखते
हैं
तो
अनुमान
लगाते
हैं
कि
यह
देवी
सीता
नहीं
हो
सकतीं
,
क्योंकि
सीता
इतनी
पवित्र
हैं
कि
वह
न
तो
किसी
पलंग
पर
लेटेंगी
और
न
ही
आराम
से
सोएंगी
ही।
मंदोदरी
ही
वह
थी
,
जो
रावण
को
बार
-
बार
समझाने
की
कोशिश
करती
है
कि
वह
सीता
को
वापस
भेज
दें।
सीता
को
मारने
से
रोकने
के
लिए
वे
रावण
को
उसके
श्रापों
की
याद
दिलाती
हैं
और
उसे
बहलाने
का
प्रयास
करती
हैं।
संक्षेप
में
,
मंदोदरी
हर
संभव
उपाय
करती
हैं
ताकि
उनका
पति
निरपराध
स्त्री
-
वध
जैसा
महापाप
न
कर
बैठे।
यह भी पढ़े: राजनीति या निजी रिश्ते? आजम पर अखिलेश का सन्नाटा क्यों कायम है
अलग-अलग कथाओं में वर्णित है मंदोदरी की कहानी
कश्मीरी
रामायण
में
कथा
है
कि
जब
रावण
सीता
को
लंका
लाता
है
तो
उसे
मंदोदरी
के
सुपुर्द
कर
देता
है
.
तब
सीता
को
देखकर
मंदोदरी
में
ममता
उमड़
आती
है।
असल
में
कुछ
कथाओं
में
यह
भी
जिक्र
मिलता
है
कि
मंदोदरी
ने
तीन
पुत्रों
से
पहले
संतान
के
रूप
में
एक
पुत्री
को
भी
जन्म
दिया
था
,
लेकिन
उस
पुत्री
के
जन्म
पर
आकाशवाणी
होती
है
कि
यही
रावण
का
काल
होगी
,
तब
रावण
उसे
लंका
से
बहुत
दूर
मिथिला
की
भूमि
में
छिपा
आया
था।
सीता
के
नैन
-
नक्श
देखकर
मंदोदरी
को
अपनी
वही
नवजात
बेटी
याद
आ
गई
थी।
मंदोदरी
पंचकन्याओं
में
से
एक
हैं
,
इसमें
उन्हें
अहिल्या
,
द्रौपदी
,
कुंती
और
तारा
के
साथ
गिना
जाता
है।
इन्हें
स्मरण
करने
से
महापाप
नष्ट
होते
हैं।
फिर
भी
,
उनकी
पवित्रता
की
परीक्षा
भी
अग्नि
द्वारा
होती
है
,
ठीक
वैसे
ही
जैसे
सीता
की।
Mandodari
असमिया
लोककथा
'
गणकाचरिता
'
में
आता
है
कि
मंदोदरी
को
अपनी
पवित्रता
सिद्ध
करनी
पड़ती
है।
हनुमान
उन्हें
छलपूर्वक
कलंकित
करता
है
,
किंतु
वे
सत्यनिष्ठा
से
अपनी
निर्दोषिता
सिद्ध
करती
हैं
और
अंतत
:
रावण
को
डांटकर
कहती
हैं
—‘
सीता
को
तुरंत
राम
को
लौटा
दो।
’
थाइलैंड
की
रामकथा
रामकिआन
में
भी
ऐसी
कथा
है
कि
मंदोदरी
के
सतीत्व
के
कारण
रावण
का
प्रभाव
कम
नहीं
हो
रहा
था।
तब
हनुमान
रावण
का
रूप
बनाते
हैं
और
मंदोदरी
उन्हें
स्पर्श
कर
लेती
हैं
.
इससे
रावण
के
चारों
ओर
बना
सतीत्व
का
रक्षाकवच
टूट
जाता
है।
इस
तरह
रामकथा
के
एक
वर्जन
में
है
कि
अंगद
मंदोदरी
को
बाल
पकडक़र
घसीटते
हैं।
असल
में
रावण
अग्निबलि
नाम
का
एक
अनुष्ठान
कर
रहा
था।
वह
पूरा
हो
जाता
तो
रावण
अजेय
हो
जाता।
तब
अंगद
मंदोदरी
का
सहारा
लेता
है
और
उसे
घसीटता
है।
मंदोदरी
रावण
से
बचाव
की
गुहार
लगाती
है।
आखिरकार
रावण
को
यज्ञ
से
उठना
ही
पड़ता
है।
ऐसा
होते
ही
यज्ञ
भंग
हो
जाता
है
औ
अपना
उद्देश्य
पूरा
होते
ही
अंगद
मंदोदरी
को
छोड़
देता
है
और
इस
कृत्य
के
लिए
झुककर
क्षमा
भी
मांगता
है।
क्योंकि
उसने
मां
समान
मंदोदरी
के
बाल
पकड़े
थे।
Mandodari
मंदोदरी के जन्म की अनेक कथाएं प्रचलित हैं
मंदोदरी
के
जन्म
की
कथाएं
और
भी
विचित्र
हैं
और
अलग
-
अलग
वर्जन
में
बेहद
दिलचस्प
हैं।
तेलुगु
रंगनाथ
रामायण
में
जिक्र
आता
है
कि
पार्वती
एक
गुडिय़ा
बनाती
हैं
,
जिसे
शिव
एक
कन्या
में
बदल
देते
हैं।
बाद
में
,
कन्या
की
सुंदरता
से
चिंतित
होकर
पार्वती
,
शिव
उसे
मेंढक
में
बदल
देते
हैं
और
वह
एक
कुएं
में
गिर
जाती
है।
वहां
से
ऋषि
उसकी
आवाज
सुनकर
निकालते
हैं
और
एक
सुंदर
कन्या
में
बदल
देते
हैं।
यह
कन्या
लालन
-
पालन
के
लिए
मय
दानव
को
सौंपी
जाती
है
और
इस
तरह
एक
मेढकी
से
लडक़ी
बनी
युवती
मंदोदरी
कहलाती
है।
एक
अन्य
तेलुगु
कथा
और
कुचिपुड़ी
नृत्य
परंपरा
में
आता
है
कि
रावण
शिव
से
पार्वती
को
अपनी
पत्नी
के
रूप
में
मांगते
हैं।
इससे
पार्वती
नाराज
हो
जाती
हैं।
तब
पार्वती
एक
मेढकी
को
अपने
समान
दिखने
वाली
एक
कन्या
में
बदल
देती
हैं
और
उसे
रावण
को
सौंप
देती
हैं।
चूंकि
स्त्री
मेंढक
से
बनी
थी
,
इसलिए
उसे
मंदोदरी
कहा
गया।
आनंद
रामायण
में
है
कि
पार्वती
का
ऐसा
अपमान
देखकर
भगवान
विष्णु
अपने
शरीर
पर
लगे
चंदन
के
लेप
से
मंदोदरी
को
बनाते
हैं
और
रावण
से
पार्वती
को
बचाने
के
लिए
उसे
असली
पार्वती
के
रूप
में
सौंप
देते
हैं
.
इसीलिए
मंदोदरी
भीतर
ही
भीतर
वैष्णव
धर्म
को
मानने
वाली
भी
थी।
Mandodari
संबंधित खबरें
अगली खबर पढ़ें
संबंधित खबरें
चेतना दृष्टि