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देश के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच बिजली की बढ़ती मांग ने ऊर्जा उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

Delhi News : देश के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच बिजली की बढ़ती मांग ने ऊर्जा उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश में जहां बिजली कटौती और तकनीकी फॉल्ट की शिकायतें बढ़ रही हैं, वहीं राज्य सरकार और बिजली विभाग उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए अतिरिक्त 10 प्रतिशत बिजली टैरिफ वसूली के प्रस्ताव पर फिलहाल रोक लगा चुके हैं। इन परिस्थितियों के बीच यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि आखिर भारत में सबसे ज्यादा बिजली उत्पादन किस राज्य में होता है। हैरानी की बात यह है कि देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्यों में शामिल उत्तर प्रदेश इस सूची में शीर्ष पांच राज्यों में भी जगह नहीं बना पाया है।
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ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, गुजरात देश का सबसे बड़ा बिजली उत्पादक राज्य बनकर उभरा है। भारत में कुल बिजली उत्पादन में गुजरात की हिस्सेदारी लगभग 12.61 प्रतिशत है, जो किसी भी अन्य राज्य से अधिक है। गुजरात की इस उपलब्धि के पीछे दशकों की ऊर्जा नीति, निवेश और आधारभूत ढांचे का विस्तार प्रमुख कारण माना जाता है। राज्य ने पारंपरिक तापीय ऊर्जा के साथ-साथ सौर और पवन ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर निवेश किया है। चारंका सोलर पार्क समेत कई विशाल नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं ने गुजरात को ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है।
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बिजली उत्पादन के मामले में महाराष्ट्र देश में दूसरे नंबर पर है। राष्ट्रीय उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 10.71 प्रतिशत बताई जाती है। राज्य में स्थित तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन और चंद्रपुर सुपर थर्मल पावर स्टेशन जैसे बड़े संयंत्र इसकी ताकत हैं। औद्योगिक गतिविधियों और महानगरीय क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने में महाराष्ट्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं राजस्थान 10.29 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। दुनिया के सबसे बड़े सौर ऊर्जा पार्कों में शामिल भड़ला सोलर पार्क राजस्थान की ऊर्जा क्षमता का प्रमुख उदाहरण है। इसके अलावा पवन और तापीय ऊर्जा क्षेत्र में भी राज्य लगातार विस्तार कर रहा है।
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तमिलनाडु बिजली उत्पादन में चौथे स्थान पर है और देश की कुल बिजली में उसकी हिस्सेदारी लगभग 7.63 प्रतिशत है। पवन ऊर्जा उत्पादन में तमिलनाडु लंबे समय से अग्रणी राज्यों में गिना जाता है। इसके अलावा राज्य की तापीय ऊर्जा परियोजनाएं भी ऊर्जा आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। कर्नाटक पांचवें स्थान पर है, जिसकी हिस्सेदारी करीब 6.30 प्रतिशत है। पिछले कुछ वर्षों में सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं में हुए निवेश ने राज्य की उत्पादन क्षमता को काफी मजबूत किया है। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में कर्नाटक लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।
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देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। औद्योगिक विस्तार, शहरीकरण और बढ़ती आबादी के कारण खपत में तेजी आई है, लेकिन उत्पादन क्षमता उसी अनुपात में नहीं बढ़ सकी है। यही वजह है कि राज्य बिजली उत्पादन के मामले में छठे स्थान पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश को भविष्य की मांग को देखते हुए नए ऊर्जा संयंत्रों, सौर परियोजनाओं और वितरण व्यवस्था में बड़े निवेश की आवश्यकता होगी। इससे न केवल बिजली आपूर्ति बेहतर होगी बल्कि दूसरे राज्यों पर निर्भरता भी कम होगी।
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1. गुजरात - 12.61%
2. महाराष्ट्र - 10.71%
3. राजस्थान - 10.29%
4. तमिलनाडु - 7.63%
5. कर्नाटक - 6.30%
6. उत्तर प्रदेश
7. आंध्र प्रदेश
8. मध्य प्रदेश
9. तेलंगाना
10. हरियाणा
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ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में बिजली की मांग तेजी से बढ़ने वाली है। ऐसे में जिन राज्यों ने नवीकरणीय ऊर्जा और आधुनिक बिजली उत्पादन परियोजनाओं में निवेश किया है, वे भविष्य में और मजबूत स्थिति में होंगे। गुजरात इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है, जिसने पारंपरिक और हरित ऊर्जा दोनों क्षेत्रों में संतुलित विकास कर देश में अपनी अलग पहचान बनाई है।
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