राजस्थान की जेल व्यवस्था में पहली बार एक ऐसा विवाह होने जा रहा है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर की मंडोर ओपन एयर कैंप (ओपन जेल) में उम्रकैद की सजा काट रहे दो दोषियों को विवाह की अनुमति दे दी है।

Jail Marriage : राजस्थान की जेल व्यवस्था में पहली बार एक ऐसा विवाह होने जा रहा है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर की मंडोर ओपन एयर कैंप (ओपन जेल) में उम्रकैद की सजा काट रहे दो दोषियों को विवाह की अनुमति दे दी है। अदालत ने इसे सुधारात्मक न्याय (Reformative Justice) की भावना के अनुरूप बताते हुए कहा कि दो बालिग व्यक्तियों को विवाह करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है।
22 जुलाई को मंडोर ओपन जेल परिसर में जेल प्रशासन की निगरानी में दोनों सात फेरे लेंगे। यह राजस्थान की ओपन जेल प्रणाली में अपनी तरह का पहला मामला माना जा रहा है।
Jail Marriage
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ, न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर ने यह आदेश सुनाते हुए कहा कि जेल का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंड देना नहीं, बल्कि उनका सुधार और समाज में पुनर्वास भी है। अदालत ने माना कि यदि दो वयस्क अपनी इच्छा से विवाह करना चाहते हैं तो केवल जेल में होने के कारण उन्हें इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
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जानकारी के अनुसार, नागौर निवासी 33 वर्षीय मूलाराम भाटी हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। वर्ष 2017 से जेल में बंद मूलाराम को करीब दो वर्ष पहले जोधपुर की मंडोर ओपन जेल भेजा गया था।
वहीं, मुंबई निवासी 31 वर्षीय सीमा भी अपने पति की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा भुगत रही हैं। उन्हें करीब डेढ़ वर्ष पहले महिला जेल से मंडोर ओपन जेल में स्थानांतरित किया गया था। ओपन जेल में दोनों खेती के कार्य के दौरान मिले। धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती हुई और यह रिश्ता प्रेम में बदल गया।
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हाल ही में सीमा को 40 दिन की पैरोल मिली। इसी दौरान दोनों ने विवाह करने का निर्णय लिया और राजस्थान हाईकोर्ट में अनुमति के लिए याचिका दायर की। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विवाह की अनुमति दे दी।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि 22 जुलाई को मंडोर ओपन एयर कैंप में विवाह कराया जाए। विवाह समारोह में दोनों पक्षों के अधिकतम 21 परिजनों और विवाह कराने वाले पुजारी को प्रवेश की अनुमति होगी। यदि इससे अधिक लोगों को बुलाना हो तो जेल प्रशासन अंतिम निर्णय लेगा। विवाह का पूरा खर्च मूलाराम स्वयं वहन करेंगे।
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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि दोनों दोषी विवाह करना चाहते हैं और सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं है। लोक अभियोजकों ने कहा कि यदि विवाह जेल नियमों के अनुरूप कराया जाता है तो सरकार इसका विरोध नहीं करेगी। इसके बाद अदालत ने विवाह की अनुमति प्रदान कर दी।
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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में वर्ष 2022 के एक पूर्व फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि कैदियों को विवाह और पारिवारिक जीवन का अवसर देना उनके पुनर्वास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अदालत ने कहा कि सुधारात्मक न्याय व्यवस्था का उद्देश्य दोषियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें नया जीवन शुरू करने का अवसर देना है।
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मूलाराम भाटी को पड़ोसी युवक की हत्या के मामले में अदालत ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं सीमा को वर्ष 2019 में अपने पति की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा मिली थी। दोनों अलग-अलग मामलों में सजा काट रहे हैं, लेकिन ओपन जेल में रहने के दौरान उनके बीच संबंध विकसित हुए और अब अदालत की अनुमति से दोनों विवाह के बंधन में बंधने जा रहे हैं।
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