आइसलैंड संसद में पहली बार सबसे ज्यादा महिलाओं की भागीदारी
भारत
चेतना मंच
28 Nov 2025 05:06 PM
मौजूदा समय में महिलाओं की भागीदारी लगभग सभी क्षेत्रों में है चाहे वह सेना मे हो या संसद, खेल हो या शिक्षा सभी क्षेत्रों में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की भागीदारी अधिक हैं lमहिलाएं परिवार बनाती है, परिवार घर बनाता है, घर समाज बनाता है और समाज ही देश बनाता है। इसका सीधा सीधा अर्थ यही है की महिला का योगदान हर जगह है। महिला की क्षमता को नज़रअंदाज करके समाज की कल्पना करना व्यर्थ है। शिक्षा और महिला ससक्तिकरण के बिना परिवार, समाज और देश का विकास नहीं हो सकता lमहिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी कई प्रयास किए जा रहे हैंl जानकारी के मुताबिक आइसलैंड ने महिलाओं के बहुमत वाली यूरोप की पहली संसद को चुना हैl
आइसलैंड में महिलाओं ने रविवार को मतगणना संपन्न होने पर 63 सीटों में से 33 सीटों पर पूर्ण बहुमत से सफलता हासिल की हैं l इस संसद का गठन होने पर आइसलैंड के प्रधानमंत्री ने सभी युवा महिला सांसदों को बधाई दी हैl आइसलैंड के सभी राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह आइसलैंड की राजनीति मे एक नए मापदंड का काम करेगा इसके अलावा विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह चुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष और लैंगिक समानता को कहीं ना कहीं दर्शाता है l दूसरे देशों की तुलना मे आइसलैंड में महिलाओं के लिए कोई भी कोटा या आरक्षण नहीं है इसके बावजूद यहां के लोगों ने महिलाओं को एक उचित मुकाम दिलाया हैl संसद के निचले सदन में महिलाओं की भागीदारी मे आइसलैंड तीसरे स्थान पर आता है l इसी प्रकार से संसद में महिलाओं की भागीदारी में भारत सातवें स्थान पर आता है l
डब्ल्यूबीएल सूचकांक के मुताबिक औसत वैश्विक अंक 75.2 पाया गया जो कि पिछले सूचकांक वर्ष 2017 में 73.9 था। भारत ने इस मामले में 74.4 अंक प्राप्त किया है जो कि बेनिन और गेम्बिया जैसे देश के बराबर है। भारत इस मामले में कम से कम विकसित देश जैसे रवांडा और लिसोटो जैसों से भी पीछे है। इस तरह भारत का स्थान 190 देशों में 117वां है।