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उत्तराखंड की राजनीति से मंगलवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी का निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और देहरादून में उन्होंने अंतिम सांस ली।

Uttarakhand News : उत्तराखंड की राजनीति से मंगलवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी का निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और देहरादून में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। भुवन चंद्र खंडूरी को उत्तराखंड की राजनीति में एक अनुशासित, साफ छवि और ईमानदार नेता के रूप में जाना जाता था। सेना की पृष्ठभूमि से आने वाले खंडूरी ने अपने सख्त प्रशासनिक रवैये और पारदर्शी कार्यशैली से जनता के बीच खास पहचान बनाई थी।
मेजर जनरल बीसी खंडूरी भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके थे। सेना में लंबे समय तक सेवा देने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और राजनीति के जरिए समाज सेवा को नई दिशा दी। उनकी कार्यशैली में सैन्य अनुशासन की झलक साफ दिखाई देती थी। राजनीति में आने के बाद उन्होंने विकास, पारदर्शिता और सुशासन को अपनी प्राथमिकता बनाया। यही वजह रही कि वे उत्तराखंड की राजनीति में एक मजबूत और भरोसेमंद चेहरे के रूप में उभरे।
भुवन चंद्र खंडूरी पहली बार वर्ष 2007 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। मार्च 2007 से जून 2009 तक अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने सड़क निर्माण, प्रशासनिक सुधार और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए कई अहम फैसले लिए।
हालांकि, 2009 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के अपेक्षित प्रदर्शन न होने के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उनका यह कदम राजनीतिक ईमानदारी का उदाहरण माना गया।
वर्ष 2011 में बीजेपी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताते हुए उत्तराखंड की कमान सौंपी। सितंबर 2011 से मार्च 2012 तक अपने दूसरे कार्यकाल में भी उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख बनाए रखा। इसी दौरान “खंडूरी है जरूरी” का नारा काफी लोकप्रिय हुआ, जो उनकी साफ-सुथरी और मजबूत प्रशासनिक छवि का प्रतीक बन गया। जनता के बीच उनकी पहचान एक ऐसे नेता की थी, जो फैसले लेने में कठोर लेकिन जनहित के प्रति पूरी तरह समर्पित थे।
पूर्व मुख्यमंत्री के निधन पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बीसी खंडूरी का योगदान राज्य के विकास और सुशासन के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने उन्हें दूरदर्शी, अनुशासित और कर्मठ नेता बताते हुए कहा कि उत्तराखंड ने आज एक मजबूत नेतृत्व खो दिया है। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने भी अपने पिता को भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने हमेशा ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन का रास्ता दिखाया, जिसे वे जीवनभर आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगी।
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