गगनयान से भारत के चार लाडले बेटे आसमान पर गाडेंगे भारत का झंडा, दो बेटे यूपी के
Gaganyaan Mission
भारत
चेतना मंच
28 Nov 2025 05:01 AM
Gaganyaan Mission : आज भारत का डंका पूरी दुनिया में बज रहा है। अब देश के सबसे अनोखे मिशन गगनयान के द्वारा भारत के चार लाड़ले बेटे आसमान (स्पेश) में भारत का झंडा गाडने वाले हैं। भारत के जो चार बेटे गगनयान के जरिए आसमान में भारत का झंडा गाडने वाले हैं। उनमें से दो लाडले बेटे उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। एक बेटा केरल प्रदेश का है तो एक बेटा तमिलनाडु का रहने वाला है। हम यहां विस्तार से बता रहे हैं देश को गौरवान्वित करने वाले चारों बेटों व गगनयान की पूरी कहानी।
क्या है गगनयान ?
जैसा कि नाम से ही जाहिर है कि गगनयान आसमान यानि गगन में जाकर कमाल करने वाला भारत का एक अनोखा मिशन है। गगनयान के द्वारा भारत के चार लाडले बेटे आसमान में भारत का झंडा गाडने को पूरी तरह से तैयार हो चुके हैं। आप को यह भी बता दें कि गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है जिसके तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष की सैर कराई जाएगी। इस मिशन को 2024 के आखिर या 2025 की शुरुआत तक भेजा जा सकता है। इसी साल मानव रहित परीक्षण उड़ान होगी, जिसमें एक व्योममित्र रोबोट भेजा जाएगा। गगनयान मिशन तीन दिवसीय है। मिशन के लिए 400 किलोमीटर की पृथ्वी की निचली कक्षा पर मानव को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा और फिर सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा। इस मिशन के ऊपर भारत 90 अरब रूपए खर्च करेगा। जी हां ठीक सुना आपने गगनयान
मिशन पर पूरे 90 अरब रूपए खर्च होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार (27 फरवरी) को केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र का दौरा किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने गगनयान मिशन की तैयारियों की समीक्षा की और मिशन पर जाने वाले चार भारतीयों को सम्मानित किया।
गगनयान मिशन को कई चरणों के जरिए सफलता के अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। गगनयान में कू्र एस्केप सिस्टम (सीईएस) सबसे खास है। अक्तूबर 2023 में किया गया परीक्षण वाहन टीवी-डी1 का प्रक्षेपण गगनयान कार्यक्रम के चार मिशनों में से पहला था।
टीवी-डी-1 टेस्ट मिशन की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग कई मायनों में अहम है। दरअसल, 2025 में जब भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष अभियान गगनयान के तहत अंतरिक्ष यात्री धरती से 400 किमी ऊपर अंतरिक्ष में तीन दिन बिताने जाएंगे, तब किसी भी वजह से अंतरिक्ष यात्रियों को नहीं खोना पड़े, इसके लिए कुल छह परीक्षण की शृंखला में यह पहला परीक्षण था। इसरो के इस परीक्षण से कू्र इस्केप सिस्टम (सीईएस) की क्षमता और दक्षता के बारे में विस्तार से जानकारी मिली। इसके अलावा किसी आपात परिस्थिति में अभियान को बीच में ही रद्द किए जाने पर अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित बचाने की रणनीति को सेफ बनाने में मदद मिलेगी।
Gaganyaan Mission
राष्ट्रीय अंतरिक्ष इसरो के मुताबिक, फ्लाइट टेस्ट व्हीकल अबॉर्ट मिशन-1 में किसी अनहोनी की दशा में अंतरिक्ष यात्रियों को बचाने में यह क्रू-एस्केप प्रणाली काम आएगी। उड़ान भरते समय अगर मिशन में गड़बड़ी हुई तो यह प्रणाली क्रू मॉड्यूल के साथ यान से अलग हो जाएगी, कुछ समय उड़ेगी और श्रीहरिकोटा से 10 किमी दूर समुद्र में उतरेगी। इसमें मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को नौसेना की ओर से समुद्र से सुरक्षित वापस लाया जाएगा।
इसके बाद दूसरा परीक्षण वाहन टीवी-डी2 मिशन और गगनयान (एलवीएम3-जी1) का पहला मानव रहित मिशन होगा। परीक्षण वाहन मिशन (टीवी-डी3 और डी4) की दूसरी श्रृंखला और रोबोटिक पेलोड के साथ एलवीएम3-जी2 मिशन की अगली योजना बनाई गई है। एजेंसी के मुताबिक, चालक दल मिशन की योजना सफल परीक्षण वाहन के नतीजे और उन मिशनों के आधार पर बनाई गई है जिनमें कोई चालक दल नहीं है।
मिशन से क्या हासिल करेगा भारत?
गगनयान मिशन सफल होता है, तो भारत उन देशों की एक खास सूची में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने खुद चालक दल अंतरिक्ष यान लॉन्च किया है। वर्तमान में ऐसा मुकाम हासिल करने वाले देश केवल अमेरिका, रूस और चीन ही हैं।
इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने एक बयान में कहा था कि गगनयान मिशन के लिए चुने गए अंतरिक्ष यात्री 2025 में उड़ान भरने का इंतजार कर रहे हैं। सोमनाथ ने कहा था, 'चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी धु्रव पर ऐतिहासिक लैंडिंग के बाद इसरो गगनयान मिशन को संभव बनाने के लिए प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए दिन-रात काम कर रहा है। अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित वापस लाना इस मिशन का बेहद महत्वपूर्ण पहलू है। इसे संभव बनाने के लिए हमें बहुत सारी तकनीक विकसित करने की जरूरत है और हम इसे संभव बनाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।' उन्होंने कहा था कि पिछले कुछ वर्षों में इसके लिए कई तकनीकों को नए सिरे से विकसित और सफल बनाया गया है।
Gaganyaan Mission
कौन-कौन हैं भारत के चार लाडले बेटे ?
अब तक आप भारत के सबसे बड़े अंतरिक्ष मिशन गगनयाान को जान चुके हैं। अब हम आपका परिचय गगनयान मिशन पर जाने वाले भारत के चारों लाडले बेटों से कराते हैं। उनके परिचय से पूर्व आपको बता दें कि भारत के ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन गगनयान से अंतरिक्ष जाने वाले वायुसेना के चारों लड़ाकू पायलटों ने तीन साल कड़ी ट्रेनिंग ली है। वायुसेना के मुताबिक, सभी के पास 2,000 3,000 घंटों की उड़ान का अनुभव है। इनमें से दो, ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन को राष्ट्रपति का स्वर्ण पदक और वायुसेना अकादमी का स्वॉर्ड ऑफ ऑनर मिला है। प्रयागराज के ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप और लखनऊ के विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला शेष दो पायलट हैं। वायुसेना के प्रवक्ता ने कहा, यह वायुसेना के लिए बेहद गर्व की बात है कि उसके चारों लड़ाकू पायलटों को गगनयान मिशन के लिए चुना गया है।
Noida News
पहला बेटा : ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर
गगनयान मिशन पर जाने वाले गु्रप कैप्टन प्रशांत नायर 1976 में केरल में जन्मे प्रशांत नायर एनडीए से ट्रेनिंग लेने वाले अधिकारी हैं। उन्हें दिसंबर 1998 में वायुसेना में लड़ाकू पायलट के रूप में भर्ती किया गया। नायर के पास लगभग 3,000 घंटे की उड़ान का अनुभव है। उन्होंने सू-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, हॉक, डोर्नियर और एएन-32 समेत विभिन्न विमान उड़ाए हैं।
दूसरा बेटा : ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन
गगनयान मिशन पर जाने वाले ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन चेन्नई में 1982 में जन्मे कृष्णन एनडीए के पूर्व छात्र हैं। उन्हें जून 2003 में भारतीय वायुसेना में लड़ाकू पायलट नियुक्त किया गया था। लगभग 2,900 घंटे की उड़ान के अनुभव के साथ वह एक उड़ान प्रशिक्षक और एक परीक्षण पायलट हैं। उन्होंने सू-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, जगुआर, डोर्नियर और एएन-32 सहित विभिन्न प्रकार के विमान उड़ाए हैं।
तीसरा बेटा : ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप
गगनयान मिशन पर जाने वाले ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप 1982 में प्रयागराज में जन्मे प्रताप एनडीए के रास्ते वायुसेना में अधिकारी बने। उन्हें दिसंबर 2004 में वायुसेना में लड़ाकू पायलट के तौर पर शामिल किया गया। वह 2,000 घंटे की उड़ान का अनुभव वाले उड़ान प्रशिक्षक और परीक्षण पायलट हैं। उन्होंने सू-30 एमकेआई, मिग-21, मिग- 29, जगुआर, हॉक जैसे विमान उड़ाए हैं।
चौथा बेटा : विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला
गगनयान मिशन पर जाने वाले विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला लखनऊ में 1985 में पैदा हुए शुभांशु शुक्ला को एनडीए से जून 2006 में बतौर लड़ाकू पायलट वायुसेना में शामिल किया गया। उनके पास 2,000 घंटों से अधिक का उड़ान अनुभव है। वह सू-30 एमकेआई, मिग- 21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डोर्नियर और एएन-32 समेत अन्य विमान उड़ा चुके हैं।