
Condition of Gautam Buddha University[/caption]
Condition of Gautam Buddha University[/caption]
इस विश्वविद्यालय की दुर्गति पर शिक्षाविदों का कहना है कि केवल जीबीयू में अव्यवस्थाओं के लिए विवि प्रशासन को डांटने भर से कुछ नहीं होगा।यहाँ नाग की तरह फैले भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना पड़ेगा तभी विश्वविद्यालय का स्वरूप बचा रह सकता है । शिक्षाविद साफ़ साफ़ कह रहे हैं कि अवैध नियुक्तियां करके यहाँ के प्रशासन ने करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की है ।जीबीयू एक सफेद हाथी साबित हो रहा है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना के समय 511 एकड़ के विशाल भू-भाग पर लाखों करोड़ों रूपये की लागत से बने इस विश्वविद्यालय को दुनिया का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय बनाने का दावा किया गया था ।जहां देश-विदेश के छात्रों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा दी जानी थी लेकिन जीबीयू में अव्यवस्थाओं पर कभी ध्यान नहीं दिया गया। इस विश्वविद्यालय पर मायावती सरकार ने जमकर पैसा लगाया था। लेकिन यहां पढ़ाने के लिए शिक्षकों की भारी कमी है। अधिकतर शिक्षक कम वेतन में अस्थाई रूप से काम कर रहे हैं।इन्हें मात्र 40 से 50 हजार का मासिक वेतन मिलता है। विश्वविद्यालय में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए शासन स्तर पर कभी कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। शिक्षकों की कमी व कमजोर प्रबंधन के कारण छात्रों का रूझान इस विवि के प्रति काफी कम है और जो छात्र यहां पढ़ते हैं उनका भविष्य भी अंधकार में लगता है।
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Condition of Gautam Buddha University[/caption]
शिक्षाविदों का मानना है कि विवि में फैले भ्रष्टाचार तथा यहां की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए शासन को सख़्त प्रयास करने चाहिए।