Ghaziabad : सीलिंग के नाम पर हुआ एक और कारनामे का खुलासा
भारत
RP Raghuvanshi
10 Sep 2022 04:46 PM
आलोक यात्री
Ghaziabad : गाजियाबाद। अवैध निर्माण या नक्शे के विपरीत निर्माण के खिलाफ ठोस कार्रवाई के लिए जीडीए में प्रवर्तन विभाग बना है। लेकिन इसी विभाग की मेहरबानी से महानगर के कुछ इलाके अवैध निर्माण के लिए खासे बदनाम हो चुके हैं। जिनमें तैनाती के लिए जीडीए के अवर अभियंता से लेकर सहायक अभियंताओं में मारामारी मची रहती है। वैशाली इंदिरापुरम, कौशांबी और विजय नगर वह इलाके हैं जहां जीडीए के अभियंताओं के भ्रष्टाचार की तूती बोलती है। प्रवर्तन विभाग के इंजीनियर सोने का अंडा तो भर पेट खाते ही हैं। मौका आते ही मुर्गी भी हजम करने में पीछे नहीं रहते। ऐसा ही एक प्रकरण इनके भ्रष्टाचार की मिसाल है।
भ्रष्टाचार का यह खेल खेला गया वैशाली सेक्टर 4 के भूखंड पर। इस भूखंड पर अपार्टमेंट्स का निर्माण हो रहा था। निर्माणकर्ता की ओर से 7 अप्रैल 2021 बैंक ऑफ बड़ौदा की नवयुग मार्केट शाखा में अग्रिम शमन शुल्क के रूप में 2 लाख रुपए जमा करवा दिए। 7 दिसंबर 2021 को भी निर्माणकर्ता की ओर से डेढ़ लाख रुपए अग्रिम शमन शुल्क के रूप में उसी बैंक की, उसी शाखा में जमा करवा दिए। यानी 7 माह में निर्माणकर्ता ने दो बार में साढ़े तीन लाख रुपए अग्रिम शमन शुल्क के रूप में जमा कर दिए। अब खेल समझिए, अग्रिम शमन शुल्क की आड़ में सोने का अंडा निगलते हुए प्रवर्तन विभाग के कर्ताधर्ताओं ने निर्माणकर्ता का दो मंजिला निर्माण होने दिया और खुद आंखें मूंदे बैठे रहे।
4 जनवरी 2022 को निर्माणकर्ता ने जीडीए को ढ़ाई लाख रुपए अग्रिम शमन शुल्क के रूप में और दे दिए गए। यानी जीडीए के खाते में अग्रिम शमन शुल्क के रूप में कुल 6 लाख रुपए पहुंच गए। जानकारी में आया है कि अप्रैल 2021 से जनवरी 2022 के दौरान 9 माह में निर्माणकर्ता कि 3 मंजिला इमारत भी अस्तित्व में आ गई। इमारत के पूरा होने यानी अपार्टमेंट्स बनने के पश्चात प्रवर्तन विभाग का असल खेल शुरू होता है। 15 मार्च 2022 को प्रवर्तन जोन-6 के प्रभारी द्वारा निर्माणकर्ता को उ. प्र. नगर योजना एवं विकास अधिनियम की विभिन्न धाराओं का हवाला देते हुए एक नोटिस जारी किया जाता है।
गौरतलब है कि यह नोटिस इमारत पूर्ण होने पर जारी किया जाता है। जिसमें कहा जाता है कि निर्माणकर्ता द्वारा स्वीकृत मानचित्र से अतिरिक्त निर्माण किया गया है। नोटिस में यह भी उल्लिखित है कि 30 नवंबर 2021 के पत्र के माध्यम से आपको सूचित किया गया था कि उक्त निर्माण शमन करवा लें। किंतु आप द्वारा वर्तमान समय तक उक्त निर्माण का शमन नहीं कराया गया है। इस नोटिस में निर्माणकर्ता द्वारा अग्रिम शमन शुल्क के तौर पर प्राधिकरण के खाते में जमा 6 लाख रुपए की राशि का कोई हवाला नहीं है। क्यों भाई? यह एकतरफा नोटिस किस लिए? नोटिस में कहा गया है कि उक्त अवैध निर्माण को विभिन्न धाराओं के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए सील बंद किए जाने के आदेश पारित किए जाते हैं।
प्रवर्तन विभाग द्वारा बनी बनाई बिकने को तैयार खड़ी इमारत सील हो गई। यह प्रकरण मिसाल है जोन-6 में प्रवर्तन विभाग में तैनात अधिकारियों की मनमानी की। जानकारी में आया है कि इमारत बनने के बाद निर्माणकर्ता से एक मोटी रकम की फरमाइश की गई थी। न देने पर बनी बनाई इमारत सील कर दी। निर्माणकर्ता से जब यह पूछा गया कि आप उच्चाधिकारियों से शिकायत क्यों नहीं करते? निर्माणकर्ता का कहना था कि पानी में रहकर मगरमच्छ से बैर नहीं किया जाता। "प्रदत्त अधिकार" लिखने वाली कलम ने न जाने भ्रष्टाचार की कितनी गाथाएं लिखी होंगी? उसकी पड़ताल फिर सही।
आलोक यात्री