गाजियाबाद की डॉ. रेणु त्रिपाठी को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चुना गया है। जानें उनकी शिक्षण पद्धति, डिजिटल शिक्षा और सफलता की पूरी कहानी।

गाजियाबाद: एक अच्छा शिक्षक सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं देता, बल्कि बच्चों के अंदर सीखने की इच्छा भी पैदा करता है। गाजियाबाद के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की विज्ञान शिक्षिका डॉ. रेणु त्रिपाठी ने इसी सोच के साथ पढ़ाने के तरीके में बदलाव किया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके काम और योगदान को देखते हुए उनका चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए किया गया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें सम्मानित करेंगी।
डॉ. रेणु त्रिपाठी पिछले करीब 20 वर्षों से राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में अपनी सेवाएं दे रही हैं। इससे पहले वर्ष 2022 में उन्हें उत्तर प्रदेश के राज्य शिक्षक पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए उनका चयन शिक्षा के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव, नवाचार और छात्राओं के बीच सीखने को आसान और रुचिकर बनाने की उनकी कोशिशों को रेखांकित करता है।
डॉ. रेणु त्रिपाठी ने महसूस किया कि केवल किताबों और रटने के तरीके से पढ़ाई करने पर कई बच्चों की रुचि कम हो जाती है। इसी वजह से उन्होंने कक्षा में एक्टिविटी आधारित और खेल-खेल में सीखने के तरीकों को अपनाया। विज्ञान जैसे विषय को आसान बनाने के लिए उन्होंने छात्राओं को प्रयोगों और गतिविधियों के जरिए समझाने पर जोर दिया।
इस तरीके से पढ़ाई को छात्राओं के लिए ज्यादा रोचक बनाने की कोशिश की गई। इससे स्कूल में छात्राओं की उपस्थिति बढ़ी और पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि भी बेहतर हुई। जो छात्राएं पहले स्कूल आने में कम रुचि दिखाती थीं, वे नए प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाई में शामिल होने लगीं।
डॉ. रेणु का मानना है कि बच्चों को किसी विषय को केवल याद कराने के बजाय उसे समझने और खुद करके सीखने का अवसर देना ज्यादा प्रभावी हो सकता है। इसी सोच को उन्होंने अपनी कक्षाओं में अपनाया। विज्ञान के कठिन विषयों को सरल तरीके से समझाने के लिए उन्होंने प्रयोगों और अलग-अलग गतिविधियों का इस्तेमाल किया।
उनकी इस कोशिश ने कक्षा में पढ़ाई के माहौल को ज्यादा सक्रिय बनाने में मदद की। छात्राओं को सवाल पूछने, प्रयोग करने और विषय को समझने का अवसर मिला। यही वजह है कि उनके पढ़ाने के तरीके को उनके शैक्षिक योगदान का अहम हिस्सा माना गया।
डॉ. रेणु त्रिपाठी ने पारंपरिक पढ़ाई के साथ डिजिटल माध्यमों का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने कंप्यूटर, ऑडियो विजुअल माध्यम और एजुकेशनल ऐप्स की मदद से कठिन विषयों को आसान तरीके से समझाने का प्रयास किया। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए उन्होंने छात्राओं के लिए YouTube चैनल भी बनाए।
उन्होंने ऑनलाइन प्रेजेंटेशन और WhatsApp ग्रुप्स के माध्यम से भी छात्राओं का मार्गदर्शन किया। कोविड काल के दौरान डिजिटल माध्यमों का महत्व और बढ़ गया था। उस समय से लकर अब तक वे इन माध्यमों के जरिए छात्राओं की पढ़ाई में मदद करती रही हैं।
शिक्षण कार्य के साथ डॉ. रेणु त्रिपाठी ने लेखन और शोध के क्षेत्र में भी काम किया है। दी गई जानकारी के अनुसार, उन्होंने 12 किताबें लिखी हैं और कई रिसर्च पेपर भी प्रकाशित किए हैं। इससे उनके शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे व्यापक काम का पता चलता है।
उनका काम केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने तकनीक, डिजिटल माध्यम और गतिविधि आधारित शिक्षा को अपनी शिक्षण पद्धति का हिस्सा बनाया, जिससे छात्राओं को अलग तरीके से सीखने का अवसर मिला।
डॉ. रेणु त्रिपाठी को शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश के राज्य शिक्षक पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। अब राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए उनका चयन उनके लिए एक और बड़ी उपलब्धि है।
इस वर्ष देशभर से कुल 48 शिक्षकों का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए किया गया है। डॉ. रेणु त्रिपाठी का चयन गाजियाबाद और उत्तर प्रदेश के शिक्षा जगत के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
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