
Ghaziabad Kirti Death Case : गाजियाबाद से हापुड़ जाते समय होनहार बेटी कीर्ति दो लुटेरों की दरिन्दगी का शिकार हो गई। लुटेरों द्वारा मोबाइल फोन छीने जाने के दौरान कीर्ति बेटी घायल हुई और उसकी जान चली गई। इस दु:खद घटना के 9 घंटे के अंदर UP पुलिस ने लुटेरे को मौत के घाट उतारकर कीर्ति को इंसाफ दिला दिया। केवल 9 घंटे में कीर्ति को मिले इंसाफ के पीछे का सच यह है कि यह इंसाफ UP के CM योगी की "ठोको" नीति का नतीजा है।
गाजियाबाद जिले से अलग होकर हापुड़ जिले के जिला मुख्यालय हापुड़ में पन्नापुरी मोहल्ले में रहने वाली कीर्ति की दर्दनाक कहानी की शुरुआत होती है 27 अक्टूबर की शाम को जब गाजियाबाद के एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई करके 19 साल की कीर्ति सिंह ऑटो से अपने घर लौट रही थी। वो ऑटो में एक लड़की के साथ गाजियाबाद से हापुड़ के लिए निकली थी, लेकिन इसी बीच जैसे ही नेशनल हाईवे नंबर 9 के डासना फ्लाईओवर पर पहुंची तो ऑटो के साथ-साथ चल रहे बाइक सवार लुटेरों ने उससे उसका मोबाइल फोन छीनने की कोशिश की और इसी कोशिश में बड़ा हादसा हो गया। कीर्ति ऑटो से नीचे गिर कर बुरी तरह से जख्मी हो गई।
इसके बाद पहले उसे हापुड़ के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया और उसके बाद वहां से उसे गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने भी कीर्ति को बचाने की तमाम कोशिश की। लेकिन दो दिन बाद 29 अक्टूबर की देर शाम आखिरकार कीर्ति की जान चली गई। उसके पूरे परिवार में मातम पसर गया। हर तरफ गम के आंसू और दर्दभरी आंहे थी। पूरा परिवार कीर्ति की मौत से गहरे सदमे में चला गया है। परिवार ही क्या पन्नापुरी मोहल्ले में भी मातम पसरा हुआ है।
बीच सड़क पर हुई लूटपाट की ये वारदात फ्लाई ओवर पर लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई थी। जिसके सहारे गाजियाबाद पुलिस ने बाइक नंबर का पता लगा लिया और लुटेरों की तलाश करने लगी। लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट तब आया, जब 29 अक्टूबर की रात को ही पुलिस मसूरी थाना इलाके में गंगनहर के पास नाका लगाकर चेकिंग कर रही थी। इस रास्ते पर पुलिस को रात करीब 10 बजकर 30 मिनट पर दो बाइक पर दो लोग आते हुए दिखे।
पुलिस ने मोटर साइकिल पर आ रहे युवकों को रुकने का इशारा किया, लेकिन दोनों ही लड़कों ने ना सिर्फ भागने की कोशिश की, बल्कि पुलिस पर गोली भी चला दी। पुलिस को गोली नहीं लगी, लेकिन पुलिस की गोली से जितेंद्र उर्फ जीतू नाम के एक बदमाश की मौत हो गई, जबकि उसका एक साथी बोबिल उर्फ बलवीर पुलिस की गोली से जख्मी हो गया। ध्यान देने वाली बात ये है कि ये वही दोनों बदमाश थे, जिन्होंने दो दिन पहले कीर्ति सिंह से उसका मोबाइल फोन छीनने के चक्कर में उसे इस कदर जख्मी कर दिया था कि उसकी जान चली गई थी। जितेन्द्र उर्फ जीतू ही इस लूटपाट का मुख्य किरदार था। जीतू मसूरी थाना क्षेत्र के कल्लूगढ़ी गांव का रहने वाला था। उसके विरुद्ध लूट के 9 मामले दर्ज थे।
कीर्ति अपने माता-पिता की इकलौती बेटी थी। वह न सिर्फ घर वालों की चहेती थी। आस-पड़ोस से लेकर कॉलेज के टीचर और स्टूडेंट भी उसे काफी पसंद करते थे। कीर्ति के परिवार ने बताया कि वह हमसे हमेशा यही कहती थी कि अच्छी नौकरी मिलने के बाद ही वो शादी करेगी, उससे पहले नहीं। परिवार के मुताबिक, वह स्कूल के दिनों से ही इंजीनियर बनना चाहती थी। साल 2022 में जेईई क्रैक करने के बाद कीर्ति को लखनऊ के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग में एडमिशन मिला। परिवार चाहता था कि बेटी घर के पास रहकर ही पढ़ाई करे। उसने कड़ी मेहनत से पढ़ाई की ताकि जेईई में बेहतर रैंक हासिल कर सके। 2023 में फिर उसे गाजियाबाद के एबीईएस में एडमिशन मिल गया। एडमिशन के बाद कुछ दिनों तक कीर्ति का भाई उसके साथ कॉलेज जाता था.। लेकिन जब कीर्ति के कॉलेज में दोस्त बन गए तो वो उनके साथ आने-जाने लगी।
पुलिस के अधिकारी हों, कर्मचारी हों, सामाजिक कार्यकर्ता अथवा राजनेता सभी मान रहे हैं कि लाड़ली बेटी कीर्ति को 9 घंटे में इन्साफ यूं ही नहीं मिला है। कीर्ति को इन्साफ मिलने के पीछे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की "ठोको" नीति का हाथ है। CM योगी ने पुलिस को निर्देश दे रखा है कि बहन-बेटियों के विरूद्ध अपराध को कदापि बर्दाश्त ना करें। महिलाओं के साथ अपराध करने वाले को तुरंत ठिकाने लगाने का निर्देश भी CM योगी ने पुलिस को दे रखा है। अपनी जनसमस्याओं में भी सीएम योगी कहते हैं कि जो महिलाओं को छेड़ेगा वह यूपी में जिंदा नहीं बचेगा। एक चौराहे पर वारदात करने वाले को अगले चौराहे पर यमदूत का सामना करना पड़ेगा। CM योगी के यमदूत वाले फार्मूले ने कीर्ति को इन्साफ दिला दिया है।