Ghaziabad News : जीडीए में भ्रष्ट बाबू तंत्र की एक और मिसाल आई सामने
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 05:03 AM
महानिरीक्षक निबंधन की पहल पर उपलब्ध रिपोर्ट ने खोली घपले की पोल आलोक यात्री
Ghaziabad : गाजियाबाद। जीडीए (Ghaziabad Development Authority ) की बुनियाद ही भ्रष्टाचार पर खड़ी है। प्राधिकरण के भ्रष्टाचारी बाबू जो कर दें, वह कम है। भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है कि पाठक भी दांतों तले अंगुलियां दबाने को मजबूर हो जाएंगे। जो अधिकार प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के पास नहीं हैं, वह अधिकार प्राधिकरण के बाबू के पास है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष द्वारा आवंटित भवन बाबू द्वारा दस्तावेजों में कूट रचना कर बदल दिया गया। बल्कि शिकायत के बावजूद उक्त भवन का म्यूटेशन भी हो गया। आवंटन के बाद भवन का नंबर कैसे बदला? और बदला गया भवन किसके नाम और कैसे आवंटित हुआ? यह अलग से जांच का विषय है।
दस्तावेजों के आधार पर मामला कुछ यूं है कि अविनाश चंद्र पुत्र राम स्वरूप को 5 मार्च 1991 को अरावली, कौशांबी योजना में भवन संख्या-904 आवंटित हुआ था। किसी वजह से तत्कालीन उपाध्यक्ष द्वारा 22 दिसंबर 1995 को अरावली, कौशांबी का भवन परिवर्तित कर थर्ड ए-209 रचना, वैशाली आवंटित कर दिया गया। भवन संख्या थर्ड ए 209 रचना वैशाली के आवंटी द्वारा 19 अगस्त 1996 को बैनामा लेखक दिनेश शर्मा के जरिए राजकमल अग्रवाल के पक्ष में पावर ऑफ अटॉर्नी करवाई गई थी। जो तहसील के अभिलेख जिल्द संख्या-75, बही संख्या-4, दस्तावेज संख्या-1551, पृष्ठ संख्या-297 से 300 पर दर्ज है। अब इस प्रकरण के खेल को समझते हैं। मूल भवन आवंटित हुआ था 904 अरावली, कौशांबी। जो परिवर्तित होकर हो गया थर्ड ए-209 रचना, वैशाली। पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर ही एक फरवरी 2002 को जीडीए से यह भवन फ्री-होल्ड भी हो गया। तत्पश्चात पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर 4 मार्च 2002 को इस भवन की रजिस्ट्री भी संपन्न हो गई।
रजिस्ट्री अभिलेखों में भवन संख्या थर्ड ए-209 रचना, वैशाली का नंबर बदल कर थर्ड ए-203 रचना, वैशाली हो गया। जो सब रजिस्टार नंबर-4, बही संख्या-1, जिल्द संख्या-1672, दस्तावेज संख्या-3467 पर दर्ज है। सवाल यह उठता है कि भवन संख्या थर्ड ए-209 रचना, वैशाली से बदल कर थर्ड ए-203 कैसे हो गया? ऐसा भूलवश हुआ या किसी ने जानबूझकर कूट रचना की? यह आज भी जांच का विषय है। दूसरा सवाल यहां यह उठता है कि यदि भवन संख्या थर्ड ए-209 के आवंटी के दस्तावेजों में भवन संख्या 203 दर्ज हो गया था तो कब्जा देते समय यह भूल सुधारी क्यों नहीं गई?
इस प्रकरण का सबसे अहम सवाल यह है कि भवन संख्या थर्ड ए-209 रचना, वैशाली के आवंटी ने भवन संख्या थर्ड ए-203 की रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली और वह वहां रहने भी लगा, तो भवन संख्या थर्ड ए-203 का मूल आवंटी कहां गया? रिक्त हुआ भवन संख्या थर्ड ए-209 किसे आवंटित हुआ? और वर्तमान में उक्त भवन की क्या स्थिति है? इस प्रकरण की शिकायत विभिन्न व्यक्ति द्वारा समय-समय पर जीडीए के आला अधिकारियों से की जाती रही। लेकिन, तमाम शिकायतों को बाबू स्तर पर डस्टबिन का रास्ता ही दिखाया जाता रहा। लेकिन, हाल ही में महानिरीक्षक निबंधन की पहल पर उपनिबंधक द्वितीय, गाजियाबाद द्वारा भवन संख्या थर्ड ए-209 रचना वैशाली की रजिस्ट्री की जो नकल उपलब्ध करवाई गई है, वह प्राधिकरण के भ्रष्ट बाबूतंत्र की पोल खोलती है।