Ghaziabad News : लेखन के प्रति आत्ममुग्धता लेखन को कमजोर बनाती है: आशीष कंधवे
भारत
RP Raghuvanshi
29 Aug 2022 03:53 PM
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RP Raghuvanshi
29 Aug 2022 03:53 PM
Ghaziabad : गाजियाबाद। मीडिया 360 लिट्रेरी फाउंडेशन (Media 360 Literary Foundation) की ओर से आयोजित ‘कथा संवाद’ के अध्यक्ष सूरज प्रकाश ने कहा कि इस तरह के आयोजन हमें साहित्य के भविष्य के प्रति आश्वस्त करते हैं। ऐसे आयोजन ही किस्सागोई की परंपरा को जिंदा रखने के साथ समृद्ध बनाते हैं। उन्होंने कहा कि कहानी की पाठशाला में सुनीं गई सभी कहानियां अलग-अलग परिवेश का प्रतिनिधित्व करने वाली सशक्त रचनाएं हैं। अपनी बोध कथाओं के जरिए उन्होंने आम आदमी के दैनिक जीवन में जबरन घुसपैठ कर रहे बाजारवाद व सियासत की नए तरीके से व्याख्या की।
‘कथा संवाद’ को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि आशीष कांधवे ने कहा कि ऐसे आयोजन साहित्य की संजीवनी है। यहीं से भविष्य के रेणु और प्रेमचंद निकलेंगे। लेकिन, हर रचनाकार को यह ध्यान रखना चाहिए कि बड़ा रचनाकार वह होता है जो यह जानता है कि क्या नहीं लिखा जाना चाहिए। लेखन के प्रति मोह या आत्ममुग्धता लेखन और लेखक दोनों को कमजोर करती है। श्री कंधवे ने कहा कि एक लेखक को गरिष्ठ होना चाहिए। यदि उसका लिखा आसानी से पच गया तो वह परफार्मर बन जाएगा। हम सृजनधर्मी हैं, परफार्मर बनते ही हम भटकने लगते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में वही कहानियां जीवित रहती हैं, जो लोकरंजन के साथ लोकमंगल की भूमिका भी निभाती हैं।
‘कथा संवाद’ में शकील अहमद की कहानी ‘करामाती जिन्नात’, डॉ. पूनम सिंह की कहानी:मत लौटना अगनपाखी’, रवींद्र कांत त्यागी की शीर्षकविहीन कहानी और संस्था के अध्यक्ष शिवराज सिंह के कथानक ‘यज्ञ’ पर गंभीर विमर्श हुआ। श्री कांधवे ने कहा कि कथा में रामदास, गाय, गांव और पंचायत का वर्णन बताता है कि खासतौर से प्रौढ़ अवस्था के नए लेखक अपनी जड़ों से अभी कटे नहीं हैं। सत्य नारायण शर्मा ने कहा कि साहित्य में गणिका का दखल आदिकाल से मौजूद है। समय के साथ जिसका आचरण, व्यवहार व व्यापार का तरीका बदल गया है। गणिका को केंद्र में रखकर लिखी गई कहानी के स्वाभाविक व कृत्रिम अंत को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। कहानी की दिशा समाज की स्वीकृत अवधारणाओं से ही तय होती प्रतीत होती है।
कार्यक्रम अध्यक्ष सूरज प्रकाश ने शेखर जोशी की एक कहानी का जिक्र करते हुए कहा कि उनके दृष्टिकोण से यह कहानी श्रेष्ठ प्रेमकथा है। मौजूदा परिवेश में प्रेम को लेकर संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई है। नौबत कपड़े बदलने की स्थिति तक जा पहुंची है। यहां सुनी गई वैवाहिक जीवन में लुप्त होते प्रेम या विवाहेत्तर संबंधों पर आधारित कहानी सशक्त रचना है। लेकिन, रचनाकारों को रचना पढ़ने और सुनने के अंतर को समझना होगा। सभागार में यदि साठ श्रोता हैं और लेखक वाचन पचास साठ मिनट लेता है तो उसे समझना चाहिए कि उसने श्रोताओं का कुल कितना समय लिया? और श्रोता को दिया क्या? व्यंग्यकार सुभाष चंदर ने कहा कि यह आयोजन नवांकुरों को लेखन के प्रति और नई पीढ़ी को पढ़ने के लिए प्रेरित करने का माध्यम है। आप क्या लिख रहे हैं, यह मायने नहीं रखता। महत्वपूर्ण यह है कि आप पढ़ कितना रहे हैं और क्या पढ़ रहे हैं?
आलोक यात्री ने कहा कि दरक रहे वैवाहिक रिश्तों पर आधारित कथि ‘मत लौटना आंगन पाखी’ जहां प्रेमचंद की कहानी ‘सोहाग का शव’ याद दिलाती है, वहीं अझेय या निर्मल वर्मा की कहानियों की कतार में खड़ी नजर आती है। लेकिन, ऐसी जटिल कहानियों के लिए कार्यशाला जैसे आयोजन उपयुक्त मंच नहीं हैं। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अशोक मैत्रेय ने कहा कि एक छत के नीचे एक साथ इतनी कहानियां सुनना और उन पर चर्चा करना लेखन की सेहत सुधारने के साथ एक बड़े वर्ग को मानसिक पोषण भी प्रदान करता है।
कार्यक्रम का संचालन रिंकल शर्मा ने किया। इस अवसर पर पूर्व कथा संवाद में सुनाई गई डॉ. निधि अग्रवाल की कहानी ‘होलोकास्ट’ को प्रथम ‘दीप स्मृति कथा सम्मान’ स्वरूप 1100 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इस मौके पर अद्विक प्रकाशन के निदेशक अशोक गुप्ता ने घोषणा की कि कथा संवाद में भविष्य में सुनाई जाने वाली महिला रचनाकार की श्रेष्ठ कृति को भी प्रति माह 1100 रुपये प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इस अवसर पर अद्विक प्रकाशन की ओर से एक पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया जाना इसलिए सुखद रहा कि कई पुस्तक प्रेमियों को उचित दाम पर मनपसंद पुस्तकें उपलब्ध हो गईं।
विमर्श में डॉ. अजय गोयल, सिनीवाली शर्मा, तेजवीर सिंह, डॉ. प्रीति कौशिक, अनिल शर्मा, डॉ. संजय शर्मा, सुशील शर्मा, सुधीर राणा, अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव, देवेन्द्र देव, डॉ. मोहम्मद मुस्तरिम, पवन जैन आदि ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर डॉ. जकी तारिक, मधु अरोड़ा, विपिन जैन, डॉ. वीना मित्तल, तूलिका सेठ, प्रतिभा प्रीत, वागीश शर्मा, सोनम यादव, साक्षी देशवाल, पराग कौशिक, नीलांबर मुखर्जी, सरवर हसन सरवर, सुरेंद्र शर्मा, टेकचंद, हेम लता, सौरभ कुमार, तपन, पवन अरोड़ा, सिमरन, तन्नु, अभिषेक कौशिक, कुलदीप, सुभाष यादव, अविनाश, नेहा पाल, शशिकांत भारद्वाज, किशनलाल भारती एवं संजीव अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद थे।