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हम अक्सर कूड़े में प्लास्टिक की दूध की थैलियों बड़े-बड़े आटे की थैली या फिर अलग तरह की प्लास्टिक की थैलियां को फेंक देते हैं लेकिन गिव मी ट्री अभियान पर्यावरण के संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है और हम ऐसी अनेक संस्थाओं से मिलकर व्यवस्थित रूप से कार्य कर रहे हैं। दूध की थैलियों और आटे की थैलियों को साफ करके हमारी टीम में जो भी शैक्षिक संगठन या व्यक्तिगत रूप से कोई जुड़ा हुआ है वह घर में निकलने वाली सब्जी से बीजों को धोकर सुखाकर तैयार करते हैं और फिर इन थैलिया में जो हमारी खाद कंपोस्ट खाद वाली स्वैच्छिक संगठन है,हम उनसे खाद मिट्टी लेकर इन थैलियों में भरकर पौधे तैयार करते हैं। और यह पौधे स्वच्छ और स्वस्थ भारत के लिए जगह-जगह एक अभियान के रूप में पौधा रोपण करके इस्तेमाल किए जाते हैं और इनको व्यक्तिगत रूप से आप कमाई का माध्यम भी बना सकते हैं जिससे पर्यावरण भी स्वच्छ रहेगा और कचरे को रिसाइकल करके पर्यावरण को सुरक्षित रखने का हमारा बड़ा मकसद भी हल होगा ।
पुराने कपड़ों का इस्तेमाल...
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बहुत सारे घरों में पुराने कपड़े और चादर, तकिये के गिलाफ आदि भी कूड़े के ढेर में डाल दिए जाते हैं और जब तमाम तरह के अलग-अलग कचरे जैसे कपड़े प्लास्टिक की थैलियां कागज के और गत्ते के बने डिब्बे वायर बिजली का बचा हुआ सामान तमाम चीज लोग कचरे के ढेर में फेंक देते हैं। और ई वेस्ट तो बहुत खतरनाक होता है और जब यह सब चीज कचरे में मिक्स करके फेंकी जाती है तो वह कचरा होता है, लेकिन जब हम इन्हें अलग-अलग करके रीसायकल कर देते हैं तो यही हमारे लिए महत्वपूर्ण संसाधन बन जाता है।
कपड़ों का बेहतर इस्तेमाल कालीन बनाने से लेकर हस्तशिल्प तक...
जब हम घरों से कपड़ा एकत्र करने का अभियान चलाते हैं तो उन पुराने फेंकने वाले कपड़ों का बेहतर इस्तेमाल करते हैं और अच्छे-अच्छे कपड़े निकाल कर गूंज संस्था जरूरतमंद लोगों को देती है और जो बचे हुए कपड़े होते हैं उनका हस्तशिल्प के नमूने बनाने में सुंदर इस्तेमाल किया जाता है।
घर का गीला कचरा, कंपोस्ट खाद बनाने के लिए इस्तेमाल...
और जब हम घर में अगर गीले कचरे को जो सब्जी के छिलके, वेस्ट बची हुई सब्जी दाल कूड़े में फेंकते हैं तो यह भी पर्यावरण को दूषित करने वाला खतरनाक कूड़े के पहाड़ों में बदल जाता है। क्योंकि उसमें हम लोहा मिट्टी सीमेंट कपड़ा कागज सभी कुछ फेंकते रहते हैं लेकिन जब हम गीले कचरे को अलग इकट्ठा करते हैं तो उसका काफी महंगा कमपोस्ट का तैयार कर लिया जाता है। गीले कचरे से हम घर में पड़े हुए बंद खाली बड़ी-बड़ी बोतलों या डिब्बों में डालकर कंपोस्ट खाद भी बना सकते हैं । और जब हम उसको अभियान के रूप में लेते हैं तो हम इस गीले कचरे को नगर निगम या संबंधित कंपोस्ट खाद बनाने वाली एजेंसियों को रीसायकल के लिए भेज देते हैं।
लोहे के तार और ई-वेस्ट का इस्तेमाल...
इसी तरह से ई-वेस्ट के कचरा, जो कचरे में जाकर बहुत ही ज्यादा खतरनाक साबित होता है ,कूड़े के पहाड़ ही नहीं बल्कि हमारे जानवरो आदि के लिए भी गीले कचरे के साथ मिलकर वह तार और खतरनाक चीज बहुत नुकसान पहुंचती हैं। इस क्षेत्र में भी हमें आदत डालनी होगी कि अपने-अपने घरों में खतरनाक और काम आने वाली चीज अलग-अलग ही एकत्र करें और कचरे को पर्यावरण के लिए खतरनाक स्थिति में ना बदले बल्कि इन कचरे को आप संसाधन के रूप में रिसाइकल करके एक से बढ़कर एक इस्तेमाल कर सकते हैं।
कचरे को अलग-अलग एकत्र करने की आदत डालना एक अभियान.
श्रीमती अर्चना प्रमोद ने यह तमाम जानकारी देते हुए कहा की रिसर्च मैनेजमेंट टीम का मकसद जनता के बीच में पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कचरे को अलग-अलग इकट्ठा करने और डिस्पोज करने का एक अभियान है। हम अच्छी आदतें डालें। अच्छी आदतों के साथ हम वेस्ट को भी गजब के संसाधन में बदल सकते हैं जो पर्यावरण को सुंदर बनाने में महत्वपूर्ण कार्य करने की एक मुहिम है। रिसोर्स मैनेजमेंट टीम में मेधा जोशी, सरिता , मुक्ता , विनीता , कमल कुमार , कुमकुम का कागज और कागज से बनी चीजों के एकत्र करने में विशेष योगदान रहा बारिश के बावजूद सभी ने पर्यावरण सुरक्षा के लिए इस समाज सेवा में अपना उल्लेखनीय योगदान दिया Ghaziabad News
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