बीएमसी चुनाव से पहले अंबरनाथ में राजनीतिक उबाल

बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल तेज होता जा रहा है। ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर परिषद एक बार फिर राजनीतिक घमासान का केंद्र बन गई है। उपाध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर आज सोमवार (12 जनवरी) को हुई है।

Maharashtra Brihanmumbai Municipal Corporation
महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल तेज (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar12 Jan 2026 08:32 PM
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बता दें कि आम सभा की बैठक के दौरान भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के पार्षदों के बीच जमकर हंगामा देखने को मिला। बैठक के दौरान दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई, जिसके बाद सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया। आरोप है कि गुस्साए बीजेपी पार्षदों ने शिवसेना समर्थित उम्मीदवार के खिलाफ नारेबाजी की और चप्पलें तक लहराईं, जिससे कुछ समय के लिए कार्यवाही बाधित करनी पड़ी।

सत्ता संघर्ष की जड़ में उपाध्यक्ष पद

बता दें कि अंबरनाथ नगर परिषद में पिछले महीने हुए चुनावों में भाजपा ने कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से अपनी उम्मीदवार तेजश्री करंजुले पाटील को परिषद अध्यक्ष चुना था। हालांकि, उपाध्यक्ष पद का चुनाव अब सत्ता संघर्ष का नया केंद्र बन गया है।

‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ का गठन और टूटन

बता दें कि 20 दिसंबर को हुए नगर परिषद चुनावों के बाद भाजपा की स्थानीय इकाई ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ (AVA) का गठन किया था। इस गठबंधन के जरिए शिवसेना को सत्ता से बाहर रखा गया, जबकि वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। 60 सदस्यीय नगर परिषद में शिवसेना के 27, भाजपा के 14, कांग्रेस के 12, एनसीपी के 4 और दो निर्दलीय पार्षद थे। AVA के पास शुरुआत में 32 सदस्यों का बहुमत था। हालांकि, इस गठबंधन से नाराज कांग्रेस ने अपने पार्षदों को निलंबित कर दिया, जिसके बाद वे बीजेपी में शामिल हो गए।

शिंदे गुट की ताकत बढ़कर 32

बता दें कि राजनीतिक समीकरण उस समय बदले जब एनसीपी के चार पार्षदों ने बीजेपी से समर्थन वापस लेकर शिवसेना का दामन थाम लिया। इससे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की संख्या बढ़कर 32 हो गई और परिषद में उनका प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो गया।

व्हिप को लेकर विवाद

बता दें कि आज की बैठक के दौरान भाजपा ने AVA के सभी घटकों को अपने उम्मीदवार प्रदीप पाटिल के पक्ष में मतदान करने के लिए व्हिप जारी किया। हालांकि, एनसीपी ने इस व्हिप को मानने से इनकार कर दिया। स्थानीय शिवसेना विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने भी AVA के अस्तित्व को खत्म घोषित कर दिया।शिवसेना ने उपाध्यक्ष पद के लिए एनसीपी के सदाशिव पाटिल को अपना उम्मीदवार बनाया है।

मतगणना के बाद आएगा फैसला

बता दें कि बैठक में हुए हंगामे के बावजूद उपाध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया पूरी की गई। आधिकारिक परिणाम औपचारिक मतदान और मतगणना के बाद घोषित किए जाएंगे। अंबरनाथ नगर परिषद का यह सियासी संग्राम आने वाले BMC चुनावों से पहले राज्य की राजनीति में बड़े संकेत दे रहा है।

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60 साल में नहीं 62 साल में रिटायर होंगे सरकारी कर्मचारी ?

सरकारी अधिकारियों तथा कर्मचारियों के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 62 साल कर दी गई है। इस प्रकार की एक खबर सोशल मीडिया पर खूब प्रसारित की जा रही है। क्या वास्तव में रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 60 साल से 62 साल कर दी गई है? यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है।

केंद्र कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र पर वायरल मैसेज की सच्चाई
केंद्र कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र पर वायरल मैसेज की सच्चाई
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar12 Jan 2026 05:19 PM
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National News : भारत में सरकारी कर्मचारियों तथा अधिकारियों को 60 साल की उम्र में रिटायर किया जाता है। भारत में अब सरकारी अधिकारियों तथा कर्मचारियों को 60 साल में नहीं बल्कि 62 साल की उम्र में रिटायर किया जाएगा। सरकारी अधिकारियों तथा कर्मचारियों के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 62 साल कर दी गई है। इस प्रकार की एक खबर सोशल मीडिया पर खूब प्रसारित की जा रही है। क्या वास्तव में रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 60 साल से 62 साल कर दी गई है? यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है।

क्या है रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने वाली खबर का सच ?

चेतना मंच ने रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने वाली खबर की सच्चाई का पता लगा लिया है। सच्चाई यह है कि भारत सरकार ने सरकारी कर्मचारियों तथा अधिकारियों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया है। सोशल मीडिया पर चलाई जा रही रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने वाली खबर पूरी तरह से झूठी  खबर है। कुछ झूठ फैलाने वाले लोगों ने सोशल मीडिया पर यह झूठी खबर चलाई है कि रिटायरमेंट की उम्र 60 साल से बढ़ाकर 62 साल कर दी गई है।

भारत सरकार ने कर दिया इस खबर का खंडन

सरकारी कर्मचारियों तथा अधिकारियों को रिटायर करने की उम्र 60 साल से बढ़ाकर 62 साल कर दी गई है।  इस खबर का भारत सरकार ने खंडन कर दिया है। भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने भारत सरकार की तरफ से इस खबर का खंडन किया है। PIB ने एक्स पर पोस्ट किया "सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक खबर में दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र में 2 साल की वृद्धि करने का निर्णय लिया है। यह दावा फर्जी है। National News



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मूली की खेती में सफलता के लिए जानें बुवाई से लेकर सिंचाई तक

मूली की उन्नत किस्मों की खेती अपनाकर किसान कम समय में अधिक पैदावार और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। सही किस्म का चयन, वैज्ञानिक बुवाई और समय पर सिंचाई से यह फसल किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बन सकती है।

Radish cultivation
मूली की खेती (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar12 Jan 2026 04:01 PM
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देश में सब्जी उत्पादन से जुड़े किसानों के लिए मूली की खेती एक तेज़ी से मुनाफा देने वाला विकल्प बनकर उभरी है। कम लागत, कम समय और बेहतर बाजार मांग के चलते मूली की खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। खास बात यह है कि आधुनिक और उन्नत किस्मों की मदद से अब किसान सिर्फ 25 से 60 दिनों के भीतर प्रति हैक्टेयर 350 क्विंटल तक पैदावार हासिल कर सकते हैं।

कम समय में तैयार, हर मौसम में मांग

मूली का उपयोग सलाद, सब्जी, पराठा और औषधीय रूप में किया जाता है। पथरी जैसी बीमारियों में मूली का रस बेहद लाभकारी माना जाता है, जिससे इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है। मूली की फसल आमतौर पर 40 से 50 दिनों में तैयार हो जाती है। देसी किस्मों से जहां 250–300 क्विंटल तक उत्पादन मिलता है, वहीं उन्नत किस्मों से यह आंकड़ा और भी अधिक हो जाता है।

मूली की खेती से कितनी हो सकती है कमाई?

बाजार में मूली की कीमत 500 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक रहती है। ऐसे में एक हैक्टेयर भूमि से किसान करीब 1 से 1.5 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में मूली की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

मूली की टॉप 5 उन्नत किस्में

1. पूसा हिमानी

यह किस्म ठंडी जलवायु के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इसकी जड़ें सफेद, मोटी और 30–35 सेंटीमीटर लंबी होती हैं। यह किस्म 50–60 दिनों में तैयार होकर प्रति हैक्टेयर 320–350 क्विंटल तक पैदावार देती है।

2. पंजाब पसंद

पंजाब पसंद किस्म केवल 45 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी जड़ें लंबी, सफेद और बाल रहित होती हैं। यह बेमौसम खेती के लिए भी उपयुक्त है और मुख्य मौसम में 215–235 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक उत्पादन देती है।

3. जापानी सफेद

यह किस्म अपने हल्के तीखे स्वाद और मुलायम बनावट के लिए जानी जाती है। 45–55 दिनों में तैयार होने वाली इस किस्म से किसान 250–300 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।

4. पूसा रेशमी

इस किस्म की जड़ें लंबी, चिकनी और आकर्षक होती हैं। यह 55–60 दिनों में तैयार होती है और प्रति हैक्टेयर 315–350 क्विंटल तक उपज देती है, जिससे बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।

5. रैपिड रेड व्हाइट टिप्ड

यह सबसे जल्दी तैयार होने वाली किस्म है, जो मात्र 25–30 दिनों में फसल देती है। लाल-सफेद रंग की यह मूली देखने में आकर्षक और स्वाद में तीखी होती है, जिससे इसकी बाजार में मांग अधिक रहती है।

मूली की बुवाई और देखभाल

  • लाइन से लाइन दूरी: 45–50 सेमी
  • पौधे से पौधे की दूरी: 5–8 सेमी
  • बुवाई की गहराई: 3–4 सेमी
  • सिंचाई: पहली सिंचाई बुवाई के बाद, फिर 7–10 दिन के अंतराल पर
  • खरपतवार नियंत्रण: नियमित निराई-गुड़ाई जरूरी

बीज उपचार भी है जरूरी

बता दें कि अच्छे अंकुरण और रोग से बचाव के लिए बीज उपचार आवश्यक है।

  • रासायनिक उपचार: 1 किग्रा बीज को 2.5 ग्राम थायरम से उपचारित करें।
  • जैविक उपचार: 1 किग्रा बीज को 5 लीटर गोमूत्र में भिगोकर उपचार करें।

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