भूमि घोटाला: सेवानिवृत्त अफसरों की जमीन धोखे से बेची, कोर्ट ने पुलिस को लगाई फटकार
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भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:04 AM
Ghaziabad News गाजियाबाद। विजयनगर के अकबरपुर बहरामपुर में 1992 में सेवा सुरक्षा एजेंसियों रॉ, एसएसबी आदि के 196 सेवानिवृत्त अफसरों ने आवास विकास समिति लखनऊ से पंजीकृत कराकर रहने के लिए किसानों से करीब 40 बीघा जमीन खरीदी थी। विविध कारणों से निर्माण में देरी हो रही थी तो यह निर्णय लिया गया कि इनमें से कुछ जमीन बिल्डरों को दे दी जाए और उस पैसे से अफसरों के फ्लैट का निर्माण निशुल्क हो जाएगा। इसमें 25 बीघा जमीन बिल्डर को देकर 15 बीघा में अफसरों के लिए आवास बनाने का निर्णय लिया गया। लेकिन बिल्डर ने समिति के पदाधिकारियों के साथ सांठगांठ कर 25 बीघा जमीन पर फ्लैट बनाकर बेच भी दिए और शेष जमीन पर अफसरों को तय समय में न फ्लैट बनाकर दिए और न ही रुपये दिए। इस मामले में अदालत ने मामले के आरोपियों को क्लीनचिट देने को लेकर यूपी पुलिस को फटकार लगाई है।
कोऑपरेटिव हाउसिंग घोटाला मामले में अदालत का फैसला
गाजियाबाद की एक अदालत ने 300 करोड़ रुपये के कोऑपरेटिव हाउसिंग घोटाला मामले का संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इस मामले को लेकर एसएसबी के पूर्व अधिकारियों केसी पांडे और पीएस बोरा द्वारा दाखिल याचिका पर संज्ञान लिया है। इस मामले में अदालत ने मामले के आरोपियों को क्लीनचिट देने को लेकर यूपी पुलिस को फटकार लगाई है। विजयनगर थाने में दर्ज इस मामले की जांच को लेकर भी अदालत ने सवाल उठाए हैं। अदालत ने आरोपियों को आगामी 13 दिसंबर को अदालत ने तलब किया है। यूपी पुलिस ने मामले में RaW और SSB से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों को क्लीनचिट दी, जिसको लेकर गाजियाबाद की एडिशनल सीजेएम कोर्ट ने पुलिस को घेरे में लिया है।
जान बूझकर तथ्यों को नजरअंदाज किया
इस मामले में एडिशनल सीजेएम कोर्ट ने एक आदेश जारी कर मामले की जांच करने वाले विवेचक यानी इंवेस्टिंगेटिंग ऑफिसर पर भी सवालिया निशान लगाया है। अदालत ने कहा कि विवेचक ने हाउसिंग सोसायटी केस की जांच के दौरान जान-बूझकर तथ्यों को नजरअंदाज किया। इतना ही नहीं आईओ मुख्य गवाहों के बयान रिकॉर्ड करने में भी नाकाम रहे।
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कोर्ट ने विवेचना को संदिग्ध करार दिया
अदालत ने केस डायरी चेक कर विवेचना को संदिग्ध करार दिया है और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-2 की कोर्ट ने विवेचक को लताड़ लगाते हुए कहा कि विवेचक ने सिर्फ एक आरोपी बिल्डर संदीप सिंह के खिलाफ आरोपपत्र पेश किया था, जबकि सेवा सुरक्षा सहकारी आवास समिति के अध्यक्ष एससी कटोच, उपाध्यक्ष प्रद्युम्न कांत, सचिव पीके पांडे व चार अन्य सदस्य आरके राजवंशी, आरके सिंह, डीएस राठी, अमीलाल को क्लीनचिट दे दी थी। कोर्ट ने इस याचिका के आधार पर सभी आरोपियों को प्रथम दृष्टया साजिश रचकर धोखाधड़ी करने का दोषी माना है।
क्या था मामला
आपको बता दें कि इस मामले में पीड़ित व आरोपी, दोनों पक्ष एसएसबी और RaW के पूर्व अधिकारी हैं। 1992 में एसएसबी, आईबी, रॉ समेत अन्य सुरक्षा एजेंसियों के 196 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने अपने आवास के लिए किसानों से 40 बीघा जमीन खरीदी थी जिसमें टेंडर के अनुसार बिल्डर को 70, 100 और 200 गज के 264 फ्लैट बनाने थे। 1992 में जमीन खरीदने के लिए सदस्यों ने एक से डेढ़ लाख रुपये निवेश किए थे अब बिल्डर व समिति के पदाधिकारियों ने मिलकर फर्जीवाड़ा करके जमीन बेच दी। और इन अधिकारियों को आवास बनाकर भी नहीं दिया।
टेंडर और सहमति के बाद भी घोटाला किया गया
एससी कटोच व अन्य पदाधिकारियों की सहमति बनी कि इस जमीन में से 25 बीघा जमीन बिल्डर को देकर शेष जमीन में बिना रकम दिए बिल्डर से फ्लैट बनवाए जाएं। इसके बाद उन्होंने टेंडर प्रक्रिया की जिसमें तीन बिल्डरों ने अपनी फाइल प्रस्तुत की। आरोप है कि एचसी कटोच ने उन तीन बिल्डरों में से किसी को टेंडर ना देकर श्रेष्ठा लँड प्राइवेट लिमिटेड बिल्डर संदीप सिंह को टेंडर दे दिया। मकान जल्दी मिलने को लेकर 196 सदस्यों ने सहमति दे दी। इसमें तय हुआ कि बिल्डर 2016 तक फ्लैट बनाकर आवंटित करके अगर तय समय में नहीं किए तो 8 हजार रुपये प्रतिमाह किराया जुर्माने के नाम पर भुगतान करेगा। सदस्यों का आरोप है कि बिल्डर ने फ्लैट दिए ना रुपये दिए। आरोप कि बिल्डर ने समिति के पदाधिकारी के साथ मिलकर जमीन व फ्लैट बेचकर 200 करोड़ रुपये कमा लिए।
तय 15 बीघा जमीन में भी कर दिया घोटाला
सेवानिवृत्त अधिकारी विकास चोपड़ा ने बताया कि बिल्डर ने 25 बीघा से अलग उनकी 15 बीघा में से भी 10 बीघा पर कब्जा करके फ्लैट बनाकर बेच दिए। इसके बाद शेष पांच बीघा में जीडीए की अनुमति के बिना कुछ फ्लैट बना दिए जो अधूरे पड़े हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन और पुलिस से शिकायत की है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
कोर्ट के आदेश के बाद थाने में रिपोर्ट दर्ज
मामले में विजयनगर थाने में बिल्डर संदीप सिंह, समिति के अध्यक्ष एससी कटोच, उपाध्यक्ष प्रद्युमन कांत, सचिव पीके पांडे, सदस्य आरके राजवंशी, आरके सिंह, डीएस राठी और अमीलाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। विजयनगर थाना प्रभारी का कहना है कि मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
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