Ghaziabad News : व्यक्ति को मनुष्य बनाने का काम करता है साहित्य : हरि सुमन बिष्ट
Literature works to make a person a human being : Hari Suman Bisht
भारत
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 02:56 AM
भारत
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 02:56 AM
- कथा संवाद में विभिन्न परिवेश की कहानियों पर हुआ सार्थक विमर्श
Ghaziabad : गाजियाबाद। सुप्रसिद्ध लेखक हरि सुमन बिष्ट ने ‘कथा संवाद’ में अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि लेखन व्यक्ति व समाज को बेहतर बनाने की कोशिश है। लेखक का धर्म कागज काले करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को मनुष्य बनाना होता है। हमारे पास मनुष्य नाम का जो व्यक्ति था, आजादी मिलने के बाद हमने उसे मार दिया। आज भी हम व्यक्ति के रूप में बचे हुए हैं। हमारा मनुष्य बनना अभी शेष है। नई पीढ़ी का आह्वान करते हुए श्री बिष्ट ने कहा कि लेखक का दायित्व अपने समय को लेखन में दर्ज करना होता है। लिहाजा नए लेखकों को अपने परिवेश का विश्लेषण निरंतर करते रहना चाहिए।
मीडिया 360 लिट्रेरी फाउंडेशन की ओर से आयोजित ‘कथा संवाद’ को संबोधित करते हुए हरि सुमन बिष्ट ने कहा कि संवादहीनता के बढ़ते दौर में ऐसे आयोजन ही जड़ता को तोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला में सुनी गई पकी-अधपकी रचनाएं भविष्य के प्रति आश्वस्त करती हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और सुप्रसिद्ध रचनाकार राकेश रेणु ने कहा कि ऐसी कार्यशाला हमारी कल्पनाशीलता को मूर्त रूप देने के साथ यह भी सिखाती है कि हमारी रचना की भाषा और शिल्प कैसे गढ़ा जाता है। उन्होंने कहा कि यहां अपनी रचना लेकर आने वाले लोगों के पास संवेदनशीलता और वैचारिक दृष्टि है, लेकिन लेखन का अनुभव नहीं है। हमारे रचनाक्रम में शामिल होने से पहले बहुत कुछ लिखा जा चुका है, बहुत कुछ प्रकाशित हो चुका है। उसे पढ़ भी लेना चाहिए। इससे हमें खुद को फिल्टर करने में सहूलियत होती है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में सुनी गई कई कहानियां रुढ़िवादिता और अंधविश्वास के परंपरागत खांचों से बाहर नहीं निकल पाई हैं। इन खांचों को तोड़कर ही कोई लेखक समाज का कल्याण कर सकता है।
‘कथा संवाद’ में प्रतिभा प्रीत की कहानी ‘मुक्ति’, शकील सैफ की ‘करामाती जिन्नात’, सिमरन की ‘मां’, तेजवीर सिंह की ‘गुनमुनी’, मनु लक्ष्मी मिश्रा की ‘मृत्यु नहीं जीवन’, डॉ. अजय गोयल की ‘इंडिया मस्ट बी ब्लेड’, संस्था के अध्यक्ष शिवराज सिंह की ‘आत्मा’ और डॉ. प्रीति कौशिक की शीर्षक विहीन कहानी पर हुए विमर्श में सुभाष चंदर, सुरेंद्र सिंघल, आलोक यात्री, अनिल शर्मा, हंसराज सिंह, सत्य नारायण शर्मा ने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का संचालन लेखिका रिंकल शर्मा ने किया। इस अवसर पर डॉ. बीना शर्मा, सिनीवाली शर्मा, नेहा वैद, डॉ. निधि अग्रवाल, अनिल मीत, पवन कुमार श्पवनश्, अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव, संजीव शर्मा, सरोज गुप्ता, नित्यानंद तुषार, डॉ. मिथिलेश भास्कर, बीएल बतरा, राजीव सिंघल, जावेद खान सैफ, आचार्य शील भास्कर, अंजलि, टेकचंद, सौरभ कुमार, निकिता करायत, पराग कौशिक, शिवानी, हेमलता, अभिषेक कौशिक, कुलदीप, राममूर्ति शर्मा, गजेंद्र चौधरी, साजिद खान सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।